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विवाहित कर्मचारी की मृत्यु पर अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पत्नी पात्र है, भाई नहीं।

समस्या-

अफजल खान ने टीकमगढ़, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरा एक दोस्त है जिस के बडे भाई न्यायालय में थे, उनकी वाहन दुघर्टना में मृत्यु हो गई है। उनकी शादी को अभी केवल 15 माह ही हुए हैं। उनके घर में वृद्ध माता-पिता व एक बेरोजगार पुत्र है। मृत भाई की पत्नी को वृद्ध माता पिता के साथ रहना नहीं है इसलिए लडकी के माता पिता लड़-झगड़ कर अपनी लड़की को ले गये हैं। अब वृद्ध माता पिता का वही सहारा एक मात्र पुत्र है। नोमिनेशन में बडे लडके ने अपनी मां को ही नोमिनेट किया था। कृपया बतायें कि अनुकम्पा नौकरी किसको मिल सकती है, मेरे दोस्त को या उस लडकी को?

समाधान-

प का मामला मध्यप्रदेश में राज्य सरकार के अधीन अनुकम्पा नियुक्ति का है। यह नियुक्ति मध्यप्रदेश अनुकंपा नियुक्ति के नियमों के अनुसार होनी है। इन नियमों में नियुक्ति हेतु पात्रता के उपबंध निम्न प्रकार हैं-

  • दिवंगत शासकीय सेवक की पत्नी, अथवा पूर्णत: आश्रित पति को, अथवा
  • दिवंगत शासकीय सेवक का पुत्र अथवा अविवाहित पुत्री अथवा ऐसी विवाहित पुत्री जिसके पति की मृत्यु हो चुकी हो अथवा जो तलाकशुदा हो, किन्तु शर्त यह होगी कि ऐसी पुत्री दिवंगत शासकीय सेवक की मृत्यु के समय उस पर पूर्णत: आश्रित होकर उसके साथ रह रही हो, अथवा
  • अविवाहित दिवंगत शासकीय सेवक के भाई अथवा अविवाहित बहन को दिवंगत शासकीय सेवक के माता-पिता की अनुशंसा के आधार पर।
  • एक से अधिक अनुकम्पा नियुक्ति के पात्र होने पर दिवंगत शासकीय सेवक की पत्नी#पति की अनुशंसा एवं पति#पत्नि के न होने पर परिवार की सर्वसम्मति से किसी एक सदस्य को अनुकम्पा नियुक्ति की पात्रता होगी। परिवार में सहमति न होने पर संबंधित जिले के कलेक्टर द्वारा यह निर्णय लिया जावेगा कि किसे अनुकम्पा नियुक्ति दी जाये।

उक्त नियमों के अनुसार मृत्तक की पत्नी के जीवित होने की स्थिति में केवल उसे अथवा उस की अनुशंसा पर अन्य पात्र को अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त हो सकती है। आप के मामले में तो मृतक की पत्नी के सिवा कोई अन्य ऐसा आश्रित नहीं है जो अनुकम्पा नियुक्ति हेतु पात्रता रखता हो।

जहाँ तक मृतक के भाई को अनुकम्पा नियुक्ति का प्रश्न है किसी भी मृतक शासकीय कर्मचारी के भाई को उस के माता पिता की अनुशंसा पर तभी अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त ह सकती है जब कि मृतक अविवाहित हो। आप के मामले में मृतक विवाहित था वैसी स्थिति में उस का भाई या अविवाहित बहिन नियुक्ति हेतु पात्र नहीं है। अनुकम्पा नियुक्ति के लिए कोई नामांकन नहीं होता है। नामांकन अन्य उद्देश्यों से होता है। इस कारण मृतक ने किसे नामांकित किया है इस का कोई प्रभाव अनुकम्पा नियुक्ति पर नहीं पड़ेगा।

आप के मित्र के मामले में यदि मित्र की पत्नी अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन करती है तो उसे ही अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त होगी। मृतक के भाई को नहीं।

अनुकंपा नियुक्ति के लिए मृतक के शेष सभी आश्रितों की अनापत्ति होना जरूरी है।

समस्या-

अक्कू यादव ने प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मको हमारे पिता के चाचा ने 2012 में कानून के अनुसार सब रजिस्ट्रार के सामने गोद लिया गया था। उनकी दो शादी शुदा बेटी है, जिन की गोद लेने के पहले शादी हो गयी थी। उनकी पत्नी का देहांत 2008 में हो गया। तब उन्होने अपनी सेवा और वंशज के लिए हमको पंजीकृत गोद ले लिया, वे सरकारी सेवा पर कार्यरत थे। सेवा के दौरान उनकी 2016 में देहांत हो गया। उनकी जो दो बेटियाँ हैं उन्होंने गोद नामा कैंसल करवाने के लिए मुकदमा किया है। जब गोद लिया गया था तब उनको कोई समस्या नहीं थी। परन्तु अब मरने के बाद बोल रही 30 लाख रुपये दो तब अनुकम्पा के लिए सहमति पत्र दूँगी। अनुकम्पा के लिए मैने बिभाग में अबेदन किया तो बोले बिना सहमति के अनुकम्पा नहीं मिल सकती है तो क्या हम हाईकोर्ट में बिभाग के खिलाफ याचिका कर सकते हैं? हमको अनुकंपा कैसे मिल सकती है और क्या पंजीकृत गोद नामा कैंसल हो सकता है? जब कि सभी दस्तावेज में पिता के स्थान पर दत्तक पिता का नाम है और नॉमिनी फॉर्म भी मेरे नाम है जिला अधिकारी द्वारा वारिस पत्र भी है हम क्या करें हमे बतायें?

समाधान-

प को सही प्रकार से गोद लिया गया है और गोदनामा निरस्त होना असंभव प्रतीत होता है। लेकिन अनुकंपा नियुक्ति के लिए बहिनों की सहमति आवश्यक है। गोद लिए जाने से आप को गोद पुत्र के रूप में वही अधिकार प्राप्त हुए हैं जो एक पुत्र को होते। यदि आपके गोद पिता के कोई पुत्र होता तब भी यही स्थिति बनती। ऐसा लगता है कि आप कुछ छिपा रहे हैं। आप के गोद पिता ने और भी संपत्ति छोड़ी होगी। उस की कीमत भी कम नहीं होगी। बहनें उस संपत्ति में हिस्सा प्राप्त करने की अधिकारी हैं और अनापत्ति देने के पहले उस संपत्ति का हिस्सा आप से प्राप्त कर लेना चाहती हैं जिस के कारण बाद में उन्हें बंटवारे आदि की कार्यवाही न करनी पड़े।

आप ने यह नहीं बताया कि आप किस विभाग में नौकरी चाहते हैं। यदि अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में विवाहित बहनें आश्रित हैं तो यह स्पष्ट है कि बिना बहनों की अनापत्ति के अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल सकती। वैसे भी अनुकंपा नियुक्ति मात्र अनुकंपा है कोई अधिकार नहीं है और इस कारण दी जाती है कि परिवार को सहारा मिले। लेकिन आपके मामले में परिवार तो है ही नहीं। बहने शादीशुदा हैं। और आप के अलावा परिवार में कोई अन्य नहीं। तो सरकार वैसे भी नौकरी देने से इन्कार कर सकती है। यह दूसरी बात है कि उस स्थिति में आप उच्च न्यायालय में रिट याचिका कर सकते हैं।

हमारी राय है कि यदि आप की विवाहित बहनें आश्रित अनुुकंपा नियुक्ति नियमों में आश्रित की परिभाषा में हैं तो आप को बहनों से कोई समझौता कर लेना चाहिए और सहमति प्राप्त कर अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने की कोशिश करें। अन्यथा अनुकंपा नियुक्ति को भूल जाएँ तो बेहतर है। यदि विवाहित बहने आश्रित की श्रेणी में नहीं आती हैं और विभाग आप से उन की अनापत्ति मांग रहा है तो आप विभाग के पत्र के आधार पर रिट याचिका उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।

 

गोदनामा कानून के अनुसार न हो तो उसे निरस्त करने के लिए दीवानी वाद संस्थित किया जा सकता है।

समस्या-

संगीता ने प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं शादी शुदा हूँ और मेरी एक बहन है, वो भी शादी शुदा हैं। मेरे पिता जी सरकारी नौकरी पर कार्यरत थे। दोनों बेटियों की शादी कर देने पर उन्होंने हम दोनों बहनो को बिना बताये अपने सगे भतीजे के बेटे को पंजीकृत गोद ले लिया। उसे  अपनी सम्पति का मालिक बना दिया सेवा के दौरान उनका देहांत हो गया तो क्या हम दोनों बहनो गोद नामा कैंसल करवा सकती हैं और अनुकम्पा के आधार पर नौकरी किसे मिल सकती है? हम को या दत्तक पुत्र को और मेरी सहमति के बिना दत्तक पुत्र को नौकरी मिल सकती है?

समाधान-

आप कैसे कहती हैं कि दत्तक पुत्र को आप के पिता ने संपूर्ण संपत्ति का स्वामी बना दिया? क्या उन्हों ने कोई वसीयत की है। यदि कोई वसीयत नहीं की है तो जैसे एक पुत्र के होते हुए विवाहित पुत्रियों को जो अधिकार प्राप्त हैं वे सभी अधिकार आपको प्राप्त हैं। आप कृषि भूमि के अतिरिक्त तमाम संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार हैं और दत्तक पुत्र भी। आप तीनों  में से प्रत्येक पिता की छोड़ी हुई संपत्ति में एक तिहाई हिस्से की हकदार हैं। अनुकंपा के आधार पर उस आश्रित को नियुक्ति मिल सकती है जो शेष आश्रितों की अनापत्ति ले आए।  आप की आपत्ति करेंगी या अनापत्ति नहीं देंगी तो दत्तक पुत्र अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त नहीं कर सकेगा। गोदनामा आप तभी निरस्त करवा सकती हैं जब कि वह कानून के अनुसार न हो। इस के लिए आप गोदनामा की प्रति प्राप्त कर किसी स्थानीय वकील से सलाह कर सकती हैं और गोद के नियमों का उल्लंघन हुआ हो तो उसे निरस्त करने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकती हैं।

अनापत्ति का निर्णय तो सभी आश्रितों को आपस में ही करना होगा।

समस्या-

नाज़िया ख़ान ने लखनऊ, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे पापा रेलवे में कर्मचारी थे। वो मेरी मम्मी को बहुत मारते थे कि पैसा लाओ। फिर उन्ही ने मार के 10 रुपए के स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर करा लिया बोले ये तलाक़ है। लेकिन मेरी मम्मी नहीं मानी फिर उन्हों ने घर से भगा दिया। मम्मी ने फॅमिली कोर्ट में केस कर दिया। उनको वहाँ 5 हजार रुपए अंतरिम मिलने लगे। अदालत ने तलाक को नहीं माना। हम दो भाई बहन हैं। फिर मेरे पापा ने दूसरी औरत रख ली। रेलवे वाले उन्हे पास और मेडिकल सुविधा दे रहे थे। मेरे पापा की सेवाकाल में ही मृत्यु हो गई 7 महीना पहले। रेलवे वाले बोल रहे हैं कि तुम लोग इनको पेन्शन और पैसा लिखो फिर वो दूसरी औरत तुमको नौकरी लिखेगी। मैं ने कहीं नहीं सुना कि सब दूसरी पत्नी का होता है। उसके कोई बच्चे नहीं हैं।  हमारी मदद करें।

समाधान-  

दि आप के पिता का आप की माता के साथ तलाक को वैध नहीं भी मानने पर भी मुस्लिम पर्सनल ला के अनुसार दूसरा विवाह वैध था। अर्थात दोनों पत्नियों को समान अधिकार प्राप्त था। आप दोनों बहन भाइयों को भी अपना अधिकार प्राप्त है। लेकिन अनुकंपा नियुक्ति तो किसी एक आश्रित को तभी मिल सकती है जब अन्य सभी आश्रित उस के नाम पर अपनी अनापत्ति दर्ज कराएँ। अनापत्ति का निर्णय तो सब आश्रितों को मिल बैठ कर ही करना होगा।

ऐसी स्थिति में आप के पिता की दूसरी पत्नी पूरी तरह से बारगेन कर सकती है कि उसे पेंशन और नौकरी से मिलने वाली ग्रेच्युटी आदि दी जाए तो वह आप के या आप के भाई के नौकरी पाने पर अपनी अनापत्ति दे सकती है। यह बात उस ने रेलवे वालों को कही होगी और उन्हों ने आप को बताई है। इस का निर्णय तो आपसी समझ से ही करना पड़ेगा। वैसे भी यदि आप के भाई को नौकरी मिलती है तो उस के एवज में बाकी चीजें छोड़ देना बुरा नहीं है।

अनुकंपा नियुक्ति के लिए पत्नी सब से अधिक योग्य व्यक्ति है।

समस्या-

अजय कुमार शर्मा ने तहसली थानागाजी , जिला अलवर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

क सरकारी कर्मचारी ने अपनी सेवा पुस्तिका में माता को नोमिनी बना रखा था। उस की मृत्यु हो गयी है। इस कर्मचारी ने भी अपने पिता के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त की थी। क्या मृत्यु के उपरान्त उस की पत्नी अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त कर सकती है?

समाधान-  

सेवा पुस्तिका में नोमिनी अंकित कराने का अर्थ है कि यदि कर्मचारी की मृत्यु हो जाए तो उस के बकाया लाभ नोमिनी को दे दिए जाएँ। हालांकि हर नोमिनी केवल ट्रस्टी होता है उस का कर्तव्य होता है कि वह इस तरह प्राप्त धनराशि को उस के असली उत्तराधिकारियों में बांट दे। यदि कोई नोमिनी सारे लाभ स्वयं रख ले और उत्तराधिकारियों को न दे तो उस से लाभ प्राप्त करने के लिए उत्तराधिकारी दीवानी वाद संस्थित कर सकते हैं। यहाँ तक कि विभाग से लाभ प्राप्त करने पर रोक भी लगवा सकते हैं।

नोमिनी नियुक्त करने का कोई भी संबंध अनुकंपा नियुक्ति से नहीं है। मृत्यु के दिन यदि कोई व्यक्ति सरकारी कर्मचारी था तो उस का कोई एक आश्रित उस के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त कर सकता है। मृतक की पत्नी सब से बेहतर व्यक्ति है जिसे अनुकंपा नियुक्ति मिलनी चाहिए। इस के लिए किसी की अनापत्ति की आवश्यकता भी नहीं है। आप मृतक की पत्नी से समय रहते आवेदन कराएँ।

गोद गया भाई परिवार का सदस्य नहीं है।

समस्या-

डाडम चन्द रैदास ने पनमोदी, प्रतापगढ़, राजस्थान समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी पशुपालन विभाग में कार्यरत थे, जिनका सेवाकाल के दौरान ही निधन हो गया। हम तीन भाई हैं, मेरा छोटा भाई जो मेरे चाचा जी के सन्तान नहीं होने से उनके दत्तक पुत्र के रूप में उनके पास ही रह रहा है। जो कि पशुपालन विभाग में ही डॉ. के पद पर कार्यरत है वह हमारे साथ नहीं रहता है।  मेरे पिताजी के देहान्त के दौरान मैंने अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया है। लेकिन मुझे यह कह कर मना कर दिया कि आपका भाई पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। क्या मुझे यह अनुकम्पा नियुक्ति मिल सकती है।

समाधान-

दि परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी या अर्धसरकारी सेवा में हो तो अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। ऐसा करना नियम विरुद्ध होगा। आप ने कहा है कि आप का भाई चाचा के यहाँ गोद चला गया था। यदि वह गोद चला गया था तो उसे आप के परिवार का सदस्य नहीं माना जा सकता है।

लेकिन उस के गोद जाने के सबूत के रूप में पंजीकृत व वैध गोदनामा होना चाहिए। मुझे लगता है कि आप ऐसा कोई सबूत प्रस्तुत नहीं कर पाए जिस से आप के भाई को गोद चले जाना सिद्ध हो सकता।

यदि आप के पिताजी के देहान्त के पूर्व कोई गोदनामा रजिस्टर हुआ हो तो आप अब उच्च न्यायालय में रिट याचिका कर सकते हैं और गोदनामा के आधार पर भाई को चाचा के परिवार का सदस्य सिद्ध करते हुए अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने में सफल हो सकते हैं।

आप को अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त होना संभव नहीं।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

मनोज राठौर ने उदयपुर, राजस्थान से पूछा है-

मेरे पिता जी चिकित्सा विभाग में एलडीसी पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2004 में मेरे पिताजी की मृत्यु हो गयी जिसके बाद मेरे विवाहित भाई ने मेरे पिताजी की सरकारी नौकरी अनुकम्पा नियुक्ति के तोर पर प्राप्त की। वर्ष 2008 में उसकी पत्नी और  ससुराल वालों के साथ पारिवारिक झगडे के कारण उसने आत्महत्या कर ली। मेरे भाई की मृत्यु के बाद मेरे भाई की सर्विस के कारण मिलने वाला पैसा लगभग 5 लाख रूपया भी भाई की पत्नी ने ले लिया और वर्तमान में विधवा कोटे में अध्यापिका के रूप में सरकारी नोकरी कर रही है। मेरे भाई की एक बच्ची भी है। मेरी भाभी और उसकी बच्ची दोनों मेरे भाई की मृत्यु के बाद उसके पीहर में रह रही हैं। मेरे भाई की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में पोइजन आया है। अब मेरा सवाल ये है की क्या मैं मेरे पिता की, अनुकम्पा नियुक्ति के रूप में मेरे भाई (मृत) द्वारा की गयी सरकारी नोकरी को पा सकता हूँ?

समाधान-

किसी सरकारी कर्मचारी की नौकरी में रहते हुए मृत्यु हो जाने पर उस के एक परिजन को जो नौकरी प्रदान की जाती है वह अनुकंपा का नियम है। किसी के द्वारा की जाने वाली अनुकंपा कभी भी लाभ प्राप्त करने वाले का अधिकार नहीं होता है। उसे अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता है। किन्तु राज्य ने इस तरह के नियम बनाए हैं और उस नियम के अंतर्गत राज्य सरकार को सही तरीके से काम करना होता  है।

आप के पिता के स्थान पर आप के भाई को अनुकंपा नौकरी दे दी गयी थी। चार वर्ष उस ने नौकरी भी की। वह अनुकंपा तो सरकार कर चुकी है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि वह पीढ़ी दर पीढी दी जाती रहे। इस कारण आप को यह नौकरी प्राप्त होना संभव प्रतीत नहीं होता है।

आप के भाई के पोस्टमार्टम में जहर से मृत्यु होने का तथ्य होने से भी इस पर कोई अन्तर नहीं पड़ेगा।

अनुकंपा नियुक्ति पर कार्य ग्रहण कर लिपिक के पद के लिये उच्च न्यायालय के समक्ष रिट याचिका दाखिल करें।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

अरविन्द्र कुमार ने वाराणसी, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मेरे पिता वाराणसी विकास प्राधिकरण में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे, जिनका सेवाकाल के दौरान ही बीमारी की वजह से 24/6/2014 को देहांत हो गया। तत्पश्चात मेरे व्दारा  विभागीय कर्मचारियों की सलाह (मौखिक) के बाद से लिपिक के पद पर मृतक आश्रित के रुप में आवेदन किया गया। लेकिन विगत दो वर्षों तक लगातार टालमटोल विभाग के द्वारा किया जाता रहा,और दिनांक 16/10/2016 को मेरी शैक्षिक योग्यताओं को नजरअंदाज करते हुए चपरासी के पद पर नियुक्ति पत्र का आर्डर जारी कर दिया गया। तमाम अधिकारियों से संपर्क करने के पश्चात भी कोई तार्किक जवाब नहीं दिया जा रहा है और उपेक्षित रवैया अपनाया जा रहा हैं। मैंने अभी तक ज्वाइनिंग नही किया है, मुझे क्या करना चाहिए, कृपया करके मेरी सहायता कीजिए कि मुझे अब क्या करना चाहिए?

समाधान-

पिता के देहान्त के उपरान्त उन के स्थान मिली नौकरी अनुकम्पा है अधिकार नहीं। वह भी तभी दी जा सकती है जब कि विभाग में स्थान रिक्त हो। आप को जानना चाहिए कि क्या विभाग में लिपिक का पद रिक्त है। यदि लिपिक का पद रिक्त है तो विभाग द्वारा आप को लिपिक के रिक्त पद पर नियुक्ति दी जानी चाहिए थी।

लेकिन आज के भीषण बेरोजगारी के युग में कोई भी नौकरी त्यागनी नहीं चाहिए। विशेष रूप से आप की परिस्थितियों में। आज तक सरकारी नौकरी के लिए इंजिनियरिंग पास लोग तक आवेदन देते दिखाई देते हैं। वैसी स्थिति में हमारी सलाह यह है कि आप को तुरन्त प्रस्तावित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी पर ज्वाइनिंग दे देनी चाहिए। नौकरी पर जाने के बाद आप को उच्च न्यायालय के किसी वकील से संपर्क कर रिट याचिका दाखिल करनी चाहिए कि लिपिक का रिक्त पद होते हुए भी जानबूझ कर आप को चतुर्थश्रेणी कर्मचारी की नौकरी दी गयी है। विभाग को आदेश दिया जाए कि वह आप की नियुक्ति लिपिक के

छूट की सीमा से अधिक उम्र होने पर अनुकम्पा नियुक्ति नहीं।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

आशीश नामा ने जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है

मेरे पिताजी विद्युत विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे जिनका निधन दिसम्बर २०१५ को हुआ उस समय मेरी उम्र 38 वर्ष 5 महीने थी। मैं ने अनुकम्पा नियुक्ति  के तहत विद्युत विभाग में नौकरी पाने के लिए आवेदन किया।  आवेदन के कुछ समय के पश्चात मुझे कहा गया की आपकी उम्र 38 वर्ष  से उपर होने के कारण नियुक्ति नहीं दी जा सकती।  जबकि हमारी जानकारी के अनुसार 40 वर्ष तक के व्यक्ति को नियुक्ति दी जाती है।  में असंजस में हूँ। विभाग द्वारा बार बार मना किया जा रहा है तथा आश्वासन भी दिया जा रहा है कि आपकी नियुक्ति दी जायगी। अगर उसी विभाग में पद की भर्ती निकलेगी। सर में भ्रम की स्थिति में हूँ | मेरा गुजारा भी नही हो रहा है। कृपया हमे मार्गदर्शन कर राज्य सरकार में सेवा प्रदान करने का मौका मिले और में अपनी आजीविका को भी आसानी से चला सकूँ।

समाधान-

प ने बताया नहीं कि किस विद्युत विभाग में नौकरी के लिए आवेदन किया है। ऐसा कोई सरकारी विभाग नहीं है। राजस्थान में बिजली उत्पादन और वितरण की कंपनियाँ हैं, आप ने किस कंपनी में आवेदन किया है?

राजस्थान की बिजली कंपनियों में अनुकम्पा नियुक्ति के लिए राजस्थान सरकार के नियमों को प्रभावी मान रखा है। इन नियमों में किसी भी पद पर नियुक्ति के लिए निर्धारित उम्र की ऊपरी सीमा  से 5 वर्ष अधिक या 40 वर्ष में से जो भी कम हो है। यह उम्र उस दिन देखी जाएगी जिस दिन आप ने आवेदन किया है।

आप ने किस पद के लिए आवेदन किया है तथा उस की अधिकतम उम्र सीमा क्या है इस से निर्धारित होगा कि आप को नियुक्ति प्राप्त होगी अथवा नहीं।आप अपने आवेदन के तथ्यों को देख कर स्वयं निर्धारित कर सकते हैं कि आप को नौकरी मिलेगी अथवा नहीं।

हमारी राय में आप को देरी करने के स्थान पर जयपुर में उच्च न्यायालय में सेवा मामलों की प्रेक्टिस करने वाले किसी वकील से अपने तमाम दस्तावेज दिखा कर तुरन्त राय करना चाहिए और आगे की कार्यवाही करनी चाहिए।

नोशनल परिलाभ आप को न्यायालय ही दिला सकता है।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

हरीश गुप्ता ने जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता का स्वर्गवास 1999 में हुआ उस वक्त वह निलंबित थे। मेरे द्वारा 45 दिन के अन्दर निवेदन किया गया था तब विभाग ने कहा आपके पिता निलंबित होने के कारण आपको अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी जा सकती है। 2015 में राजस्थान उच्च न्यायालय में उन्हें निरंतर सर्विस में माना है।| परिणामस्वरूप विभाग द्वारा अनुकम्पा नियुक्ति दे दी है, परन्तु अभी से सेवा में माना है। मैं चाहता हूँ कि मुझे 1999 से मेरे निवेदन को मान कर नियुक्ति मानी जाये। क्या ये हो सकता है तथा क्या मुझे नोशनल परिलाभ मिल सकता है?

समाधान-

प का प्रश्न अधूरा और विवरणहीन है। उच्च न्यायालय ने 2015 में उन्हें निरन्तर सेवा में माना है। यह किस प्रकरण में हुआ है? क्या यह आप के पिता के द्वारा संस्थित किसी प्रकरण पर हुआ है? यदि ऐसा है तो उस प्रकरण में तो आप को यह लाभ मिल नहीं सकता था। आप ने उसी प्रकरण के आधार पर पूर्व में प्रस्तुत आप के नियुक्ति आवेदन पर निर्णय लेने को कहा होगा जिस पर विभाग ने आप को अनुकम्पा नियुक्ति दे दी।

राज्य सरकार ने तो उक्त निर्णय के अनुसार आप को नियुक्ति दे दी है। वे अपना दायित्व पूर्ण कर चुके हैं। अब यदि आप नोशनल परिलाभ चाहते हैं तो राज्य सरकार के पास ऐसा कोई नियम नहीं है जिस के अन्तर्गत आप को यह परिलाभ दिए जा सकें।

स के लिए आप को पुनः राज्य सरकार को नोशनल परिलाभ देने के लिए लिखना चाहिए। जैसा की संभावित है यदि राज्य सरकार आप को नोशनल परिलाभ देने से मना करेगी। तब आप न्यायालय की शरण ले सकते हैं। हो सकता है न्यायालय आप को नोशनल परिलाभ देने का आदेश राज्य सरकार को दे दे। यह आप के पिता के संबंध में हुए निर्णय का अध्ययन कर के ही कहा जा सकता है। आप के पिता के प्रकरण को जो वकील साहब उच्च न्यायालय में देख रहे थे आप को उन्हीं से संपर्क कर के इस संबंध में राय करते हुए तुरन्त कार्यवाही करना चाहिए।

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