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नोशनल परिलाभ आप को न्यायालय ही दिला सकता है।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

हरीश गुप्ता ने जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता का स्वर्गवास 1999 में हुआ उस वक्त वह निलंबित थे। मेरे द्वारा 45 दिन के अन्दर निवेदन किया गया था तब विभाग ने कहा आपके पिता निलंबित होने के कारण आपको अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी जा सकती है। 2015 में राजस्थान उच्च न्यायालय में उन्हें निरंतर सर्विस में माना है।| परिणामस्वरूप विभाग द्वारा अनुकम्पा नियुक्ति दे दी है, परन्तु अभी से सेवा में माना है। मैं चाहता हूँ कि मुझे 1999 से मेरे निवेदन को मान कर नियुक्ति मानी जाये। क्या ये हो सकता है तथा क्या मुझे नोशनल परिलाभ मिल सकता है?

समाधान-

प का प्रश्न अधूरा और विवरणहीन है। उच्च न्यायालय ने 2015 में उन्हें निरन्तर सेवा में माना है। यह किस प्रकरण में हुआ है? क्या यह आप के पिता के द्वारा संस्थित किसी प्रकरण पर हुआ है? यदि ऐसा है तो उस प्रकरण में तो आप को यह लाभ मिल नहीं सकता था। आप ने उसी प्रकरण के आधार पर पूर्व में प्रस्तुत आप के नियुक्ति आवेदन पर निर्णय लेने को कहा होगा जिस पर विभाग ने आप को अनुकम्पा नियुक्ति दे दी।

राज्य सरकार ने तो उक्त निर्णय के अनुसार आप को नियुक्ति दे दी है। वे अपना दायित्व पूर्ण कर चुके हैं। अब यदि आप नोशनल परिलाभ चाहते हैं तो राज्य सरकार के पास ऐसा कोई नियम नहीं है जिस के अन्तर्गत आप को यह परिलाभ दिए जा सकें।

स के लिए आप को पुनः राज्य सरकार को नोशनल परिलाभ देने के लिए लिखना चाहिए। जैसा की संभावित है यदि राज्य सरकार आप को नोशनल परिलाभ देने से मना करेगी। तब आप न्यायालय की शरण ले सकते हैं। हो सकता है न्यायालय आप को नोशनल परिलाभ देने का आदेश राज्य सरकार को दे दे। यह आप के पिता के संबंध में हुए निर्णय का अध्ययन कर के ही कहा जा सकता है। आप के पिता के प्रकरण को जो वकील साहब उच्च न्यायालय में देख रहे थे आप को उन्हीं से संपर्क कर के इस संबंध में राय करते हुए तुरन्त कार्यवाही करना चाहिए।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन दें, मना करने पर रिट याचिका प्रस्तुत करें।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

गुड्डू कुमार ने रामगढ़ केन्ट, झारखंड से समस्या भेजी है कि-

दिनांक 02.12.2014 को मेरे पिता एक सड़क दुर्घटना में घायल हुए और दिनांक 04.12.2014 को उन का देहान्त हो गया। वे स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लि. के स्थाई कर्मचारी थे और उन का सेवा काल दो वर्ष शेष था। मैं ने फैक्ट्री में संपर्क किया तो मुझे बताया गया कि कंपनी की इस यूनिट में अनुकम्पा नियुक्ति का नियम नहीं है। सेल की अन्य यूनिटों में अनुकम्पा नियुक्ति दी जाती है। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए।

समाधान-

ह सही है कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लि. की अलग अलग इकाइयों में अलग अलग नियम हैं। हो सकता है आप जिस इकाई की बात कर रहे हैं वहाँ इस तरह का कोई नियम नहीं हो। लेकिन सेल की इकाइयों में इस तरह के अलग अलग नियमों के होने पर आपत्तियाँ उठी हैं और एक कमेटी भी बनाई गयी है जिस के द्वारा सेल की सभी इकाइयों में एक समान नियम बनाने पर विचार हुआ है। यह काम कितना आगे बढ़ा है इस की हमें वर्तमान में जानकारी नहीं है।

सी अवस्था में आप को चाहिए कि आप समस्त दस्तावेजों की प्रतियों सहित उस युनिट में जिस में आप के पिता सेवा में थे लिखित आवेदन अनुकम्पा नियुक्ति के लिए दे दें। उस युनिट के ऊपर के अधिकारियों और कम्पनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को भी इस तरह का आवेदन करें। इस से यह होगा कि आप के पार्ट पर आवेदन देने का काम पूरा हो जाएगा। आप की तरफ से कोई कमी नहीं रहेगी। प्रत्येक आवेदन जो आप दें उस की प्रतिलिपि और आवेदन प्रस्तुत करने का सबूत अर्थात प्राप्ति स्वीकृति आदी संभाल कर रखें। स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया सार्वजनिक क्षेत्र का संस्थान है और आप के आवेदन पर अनुकम्पा नियुक्ति देने से इन्कार करने पर उच्च न्यायालय में रिट याचिका प्रस्तुत की जा सकती है।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पुत्रवधु आश्रित की श्रेणी में नहीं।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

हरिओम सोनी ने कोटा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-


मेरे अॉफिस में एक वर्कचार्ज कुली की मृत्यु दिनांक 02.09.2015 को गई।  मृतक के एक मात्र पुत्र था, जिस की भी वर्ष 2012 में मृत्यु हो चुकी है। मृतक कुली की अब मात्र एक वारिस पुत्रवधु ही है।  क्या पुत्र वधु को अनुकंपा नियुकि़त मिल सकती है? यदि हां तो किस नियम के तहत कृपया शीघ् अवगत कराने की कृपा करें।

समाधान-

राजस्थान के अनुकम्पा नियुक्ति नियमों में विधवा पुत्रवधु को आश्रितों में सम्मिलित नहीं माना गया है। इस कारण सामान्य नियमों के अन्तर्गत पुत्र वधु को नियुक्ति मिलना संभव नहीं है। लेकिन यदि परिवार में वह एक मात्र आश्रित है तो उस से आवेदन प्रस्तुत करवाया जा सकता है। यह आवेेदन सामान्य नियमों में निरस्त किए जाने योग्य है। इस कारण से इसे नियम 13 के अन्तर्गत राय प्राप्त करने के लिए विभाग द्वारा राज्यसरकार को भेजा जा सकता है। फिर भी अधिक संभावना है कि यह निरस्त ही होगा।

लेकिन इस मामले में एक मात्र आश्रित होने के कारण इस मामले में आवेदन निरस्त होने पर आवेदन निरस्त होने के आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय में रिट याचिका प्रस्तुत की जा सकती है और न्यायालय उसे स्वीकार करते हुए उसे नियुक्ति देने का आदेश दे भी सकता है और नहीं भी दे सकता है। लेकिन इस मामले में पुत्र वधु को इस तथ्य के मजबूत सबूत देने होंगे कि वह पूरी तरह मृतक कर्मचारी की आश्रिता थी। हमारी राय में उस महिला को आवेदन तुरन्त प्रस्तुत कर देना चाहिए। आगे की कार्यवाही को आगे की परिस्थितियों पर छोड़ देना चाहिए।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए कर्मचारी की मृत्यु के दिन कोई आश्रित सरकारी सेवा में नहीं होना चाहिए।

rp_Compassionate-Appointment.jpgसमस्या-

उमा शंकेर जायसवाल ने जयपुर, राजस्थान से की समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी की मृत्यु दिनांक 06.06.2007 को एक सड़क दुर्घटना में हो गयी है। मैं ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया और मुझे 2008 में राजस्थान के शिक्षा विभाग में नियुक्ति मिल गयी। इस बीच मेरे छोटे भाई को भी सरकारी विभाग में नौकरी मिल गयी। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या मैं अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति के लिए अर्हता रखता था।

समाधान

राजस्थान में अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों का प्रासंगिक नियम निम्न प्रकार है-

Government service subject to the condition that employment under these rules shall not be admissible in cases where the spouse or at least one of the sons, unmarried daughters, adopted son/adopted unmarried daughter of the deceased Government servant is already employed on regular basis under the central / any State Government or Statutory Board, Organisation/Corporation owned or controlled wholly or partially by the Central/ any State Government at the time of death of the Government servant.

न नियमों में स्पष्ट है कि जिस दिन सरकारी कर्मचारी का देहान्त हुआ है उस दिन पुत्रों, अविवाहित पुत्रियों, दत्तक पुत्र/पुत्री में से कोई एक भी स्थाई आधार पर राज्य या केन्द्र के सरकारी विभाग, विधिक निकाय, संगठन, निगम में नियुक्त नहीं होना चाहिए। आप के भाई को जो नौकरी प्राप्त हुई है वह आप के पिता जी की मृत्यु के उपरान्त प्राप्त हुई है इस कारण से आप अनुकम्पा नियुक्ति के लिए अर्हता रखते थे। आप को नियक्त किया जाना नियमों के अनुकूल है।

अनुकम्पा नियुक्ति के लिए विवाहित बहिन की अनापत्ति आवश्यक नहीं।

Compassionate Appointmentसमस्या-

आकाशदीप ने बिजनौर, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी माताजी शिक्षा विभाग में कार्यरत थीं। उनका स्वर्गवास दिंनाक 14 अक्टूबर 2012 को हो गया था। हम दो भाई-बहन हैं। बहन छोटी है तथा विवाहित है। मेरा बहनोई व उसका परिवार लालची किस्म के हैं। मेरे बहनोई ने मेरी माताजी को डरा धमकाकर अपने पक्ष में कर लिया था तथा हम से सम्बन्ध विच्छेद करा दिया था।

हमारी माताजी हम से अलग बिजनौर में मकान खरीद कर रहने लगी तथा मेरी बहन व बहनोई भी जबरदस्ती उनके साथ रहने लगे। मेरी माताजी से जबरदस्ती पी.एफ. में भी मेरी बहन को नोमिनी करा लिया तथा वह मकान भी अपने नाम लिखवा लिया। उस के बाद उन्होनें एक वसीयत अपने पक्ष में लिखवा कर रजिस्टर्ड करा ली। उस वसीयत में यह भी उल्लेख नहीं है कि मेरी बहन विवाहित है। वसीयत के बाद मेरी माताजी को घर से निकाल दिया। मेरी माताजी उनसे अलग होकर वहीं पडोस में किराये पर रहने लगी। मेरी माताजी के स्वर्गवास बाद उनका सारा सामान एवं सारे कागजात उन्होने अपने कब्जे में कर लिये तथा हमसे मना कर दिया कि उनके पास कुछ भी नहीं हैं।

उनकी मृत्यु के बाद इसकी सूचना मैं ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में दी तथा अनुकम्पा नियुक्ति के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया। मेरा वारिसान प्रमाण पत्र जिलाधिकारी बिजनौर द्वारा निर्गत किया जा चुका है। महोदय अभी तक पी.एफ. का पैसा भी नहीं निकला है और न ही मेरी नियुक्ति हुई है। क्या विवाहित पुत्री उत्तराधिकारी बन सकती है? मेरी बहन व बहनोई नौकरी एवं पैसा दोनों लेना चाहते हैं। क्या विवाहित पुत्री को अनुकम्पा में नियुक्ति मिल सकती है? क्या मुझे नौकरी पाने के लिए मेरी बहन की अनापत्ति की आवश्यकता पडेगी। मैं बडी मुसीबत में हूँ। नियुक्ति ना मिलने की दशा में मुझे क्या करना चाहिए। मैं क्या करूं?

समाधान-

प ने यह उल्लेख नहीं किया है कि माताजी की वसीयत में क्या लिखा है। अर्थात उन्हों ने वसीयत के माध्यम से अपनी किस किस संपत्ति के लिए किस किस को अपना वसीयती घोषित किया है।

हाँ तक पीएफ का प्रश्न है तो उस पर सभी उत्तराधिकारियों का उन के हिस्से के समान हक है। यदि वसीयत में पी.एफ. का किसी को अधिकारी घोषित नहीं किया गया है तो पीएफ सभी उत्तराधिकारियों को प्राप्त होगा। नोमिनी केवल उसे प्राप्त करने की अधिकारी है लेकिन प्राप्त राशि को उत्तराधिकार विधि के अनुसार उत्तराधिकारियो में वितरित करने की उस की ड्यूटी है। आप को पी.एफ. व अन्य सभी संपत्तियों व धरोहरों के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जिला न्यायालय से प्राप्त कर विभागों को प्रस्तुत करना चाहिए जिस से आप को अपना हिस्सा प्राप्त हो सके।

त्तर प्रदेश के अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों में क्या प्रावधान हैं जो आप की माताजी के विभाग पर प्रभावी हैं उन की जानकारी हमें नहीं मिल रही है। फिर भी सामान्य रूप से विवाहित पुत्री जिस का पति जीवित हो उसे अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त करने का अधिकार नहीं है। उस की अनापत्ति की भी कोई आवश्यकता नहीं है। क्यों कि वह अपने पति के परिवार की सदस्या है न कि आप की माताजी के परिवार की सदस्य है।

दि किसी प्रकार से विभाग आप को अनुकम्पा नियुक्ति देने से इन्कार करता है तो आप को तुरन्त नियुक्ति से इनकार करने वाले आदेश के विरुद्ध रिट याचिका उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए तथा अन्य व्यक्ति को नियुक्ति देने से रोकने का स्थगन आदेश प्राप्त कर लेना चाहिए। हमारी राय में आप अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पात्र हैं और आप की बहिन से आप को अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि विभाग आप से इस तरह की अपेक्षा करता है और कोई पत्र जारी करता है तो आप उस पत्र के विरुद्ध भी रिट याचिका कर सकते हैं। इस मामले में आप को आप के उच्च न्यायालय में प्रेक्टिस कर रहे सेवा मामलों के वकील से राय करनी चाहिए।

पुत्री या दत्तक पुत्री ही आश्रित हो सकती है, पति की पूर्व पत्नी की पुत्री नहीं।

courtroomसमस्या-

बबिता वाधवानी ने मानसरोवर, जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरी माताजी का देहान्‍त 26 जनवरी 2013 में हो गया था । मेरे पिता ने दो शादियाँ की थी। पहली की मृत्‍यु हो जाने पर दूसरा विवाह हुआ था।  मेरे पिता की म़त्‍यु हो जाने पर मेरी माता को उनके स्‍थान पर अनुकम्‍पा नौकरी मिली थी। उनकी मौत पर हमें अनुकम्‍पा नौकरी फार्म भरना था जिसे मेरी बड़ी बहन ने भर दिया जो पूर्व पत्‍नी की संतान हैं। हालाँकि वो पिछले 15 सालों से एक ही कम्‍पनी में काम कर रही है। उस ने हमेशा यही कहा कि मुझे 3000 रू ही तनख्‍वाह मिलती है, वो भी समय से नहीं मिलती। अभी वर्तमान में पता चला है वो अचल सम्‍पति भी रखती है और उसकी तनख्‍वाह पूरे तौर पर तो नहीं पता पर अन्‍दाजा ही लगाया जा सकता है कि 10000 रू से ज्‍यादा ही होगी। घर वालों के दबाव में मुझे उस धोषणा पत्र पर हस्‍ताक्षर करने पडे जिस में उन्‍होने दर्शाया कि वो नौकरी नहीं करती व टयूशन से 2500 ही कमाती है अत उन्‍हे नौकरी दी जाये। उनका फार्म आफिस से रिजेक्‍ट हो गया और बीएसएनएल से मुझे फार्म भरने को कहा गया। मैंने फार्म भर दिया व सभी दस्‍तावेज लगा दिये। पर मुझे अपनी इस बहन का अनापत्ति प्रमाण पत्र जमा करवाने को कहा गया जो बहन ने देने से मना कर दिया है। मम्‍मी की पेन्‍शन मेरे नाम से बनी है। उस फार्म के साथ पेन्‍शन के कागज भी लगते है जो मैंने लगा दिये हैं। क्‍या आप बता सकते हैं कि बहन के अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना मैं अनुकम्‍पा नौकरी प्राप्‍त कर सकती हूँ। बहन ने बीएसएनएल पर मुकदमा कर दिया है कि मुझे नौकरी दी जाये। व मेरे भाई जिसको मम्‍मी अन्‍य सभी लाभों के लिए नामिनी कर गयी है उसमें से भी हिस्‍सा चाहती है। मैं अपनी बहन का झूठ साबित नहीं कर सकती क्‍योंकि मेरे पास ऐसा कोई सबूत नहीं, दूसरा मेरे घर के दूसरे बडे लोग ये सोचते है‍ कि मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ तो मिलने वाले लाभ को सामाजिक कार्यो में लगा दूंगी। वे किसी प्रकार का सहयोग करने को तैयार नहीं। पेन्‍शन प्राप्‍त करने के लिए भी मुझे राज्‍य महिला आयोग की मदद लेनी पडी थी क्‍योंकि उसमें भी बडी बहन ने अनापत्ति प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया था । मेरी उम्र 41 साल हो चुकी है। प्राइवेट सेक्‍टर में मैंने काम किया लेकिन कभी भी किसी आफिस में 2 से 3 महीने से ज्‍यादा नहीं टिक पायी। मुझे अपनी बेटी की उच्‍च शिक्षा के लिए इस नौकरी की जरूरत है।

समाधान-

बिता जी¡ आप ने यह नहीं बताया कि बड़ी बहिन का आवेदन क्यों निरस्त किया गया है? बीएसएनएल ने उन का आवेदन निरस्त करने का कारण जरूर प्रदर्शित किया होगा। हो सकता है आप को यह पता नहीं हो पर आप को यह पता करना चाहिए।

में लगता है कि आप की बहिन का आवेदन इस कारण निरस्त हुआ है क्यों कि वह नियमानुसार आप की माता की आश्रित नहीं मानी जा सकती क्यों कि वह उन की पुत्री नहीं बल्कि आप के पिता की पहली पत्नी की पुत्री है, उसे आप की माता जी की दत्तक पुत्री भी नहीं कहा जा सकता क्यों कि दत्तक ग्रहण के लिए प्रक्रिया आवश्यक है वह नहीं हुई है। नियम यह है कि केवल पुत्री या दत्तक पुत्री ही आश्रित हो सकती है। इस नियम के कारण आप की बहिन इस नियुक्ति के योग्य नहीं है। आप इस के लिए सर्वथा योग्य हैं।

प की बहिन ने मुकदमा कर दिया है उस मुकदमे में आप भी आवश्यक पक्षकार हो गई हैं यदि नहीं हैं तो आप पक्षकार बनें और मुकदमे में अपना प्रतिवाद प्रस्तुत करें। अपने अधिकार के लिए लड़ना बुरी बात नहीं। आप बीएसएनएल को भी कह सकती हैं कि आप की बहिन आप की माता की नियमानुसार आश्रित नहीं है इस कारण आप की नियुक्ति के लिए उन की अनापत्ति की किसी तरह की कोई आवश्यकता नहीं है। बीएसएनएल को आप के तर्क को स्वीकार कर के आप को नियुक्ति दे देना चाहिए।

दामाद ससुर का आश्रित नहीं, उसे अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल सकती।

Compassionate Appointmentसमस्या-

राहुल कुमार ने पीपल्दा, जिला कोटा राजस्थान से पूछा है-

मेरे ससुर जी का देहान्त हो गया है, वे कानूनगो के पद पर राजकीय सेवा में थे। मेरी पत्नी उन की इकलौती पुत्री है, लेकिन वह पढ़ी लिखी नहीं है। मैं बी.ए., बी.एड हूँ। क्या मुझे अनुकंपा नियुक्ति मिल सकती है?

समाधान-

नुकंपा नियुक्ति अपने आप में संविधान की मूल आत्मा के विरुद्ध है। राजकीय सेवाओं में नियुक्त होने का हर नागरिक को अधिकार है। इस कारण राजकीय सेवाओं में नियुक्तियाँ योग्यता के अनुसार सभी योग्य नागरिकों को खुली भर्ती के आधार पर अवसर प्रदान करते हुए ही होनी चाहिए। अनुकंपा नियुक्ति इस सामान्य नियम का अपवाद है जो जनविरोधी भी है। एक राजकीय कर्मचारी के देहान्त के उपरान्त उस के परिवार को पेंशन प्राप्त होती है। एक साधारण किसान जो खेत में पसीना बहाता है, एक मजदूर जो उद्योगों में अपना पसीना बहाता है उस की मृत्यु पर तो उस के आश्रित को कुछ नहीं मिलता। फिर किसी राज्य कर्मचारी के आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति क्यों मिलनी चाहिए? क्या यह भारत के अन्य नागरिकों के साथ अन्याय नहीं है?

फिर भी संविधान ने राजकीय कर्मचारी की सेवा में रहते हुए मृत्यु हो जाने पर अचानक उस का परिवार संकट में न आ जाए इस कारण से नियमानुसार उस के किसी एक आश्रित को नौकरी देने की छूट दे रखी है। अनुकंपा नियुक्तियाँ राज्य की अनुकंपा हैं, यह किसी का अधिकार नहीं है। यदि राज्य के पास स्थान रिक्त हो। कोई आश्रित योग्य हो तो उसे ऐसी नौकरी अनुकंपा के रूप में दी जा सकती है। वह भी केवल सख्ती के साथ केवल नियमों के अनुरूप ही।

राजस्थान के अनुकंपा नियुक्ति नियमों में विवाहित पुत्रियाँ भी आश्रित की श्रेणी में नहीं आतीं दामाद तो दूर की बात है। आप की पत्नी यदि पढ़ी लिखी होती तो भी वह अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने की अधिकारी नहीं होती। आप तो उन के दामाद हैं। आप को अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त नहीं हो सकती।

एक भी आश्रित के पहले से राज्य सेवा में होने पर अनुकम्पा नियुक्ति नहीं

Compassionate Appointmentसमस्या-
अशोक कुमार ने जोधपुर,  राजस्थान से पूछा है-

मेरे पिता जी का देहान्त राजकीय सेवा में रहते हुए हो गया। हम दो भाई हैं जिन में से छोटा शिक्षा विभाग में अध्यापक के पद पर नियुक्त है जिस का अभी प्रोबेशन काल चल रहा है। बड़ा भाई बेरोजगार है। क्या उसे अनुकम्पा नियुक्ति प्राप्त हो सकती है?

समाधान-

राजस्थान में  THE RAJASTHAN COMPASSIONATE APPOINTMENT OF DEPENDANTS OF DECEASED GOVERNMENT SERVANTS RULES, 1996 का नियम 5 निम्न प्रकार है

5. Appointment subject to certain conditions :- (1) When a Government servant dies while in service one of his/her dependents may be considered for appointment in Government service subject to the condition that employment under these rules shall not be admissible in cases where the spouse or at least one of the sons, unmarried daughters, adopted son/adopted unmarried daughter of the deceased Government servant is already employed on regular basis under the central / any State Government or Statutory Board, Organisation/Corporation owned or controlled wholly or partially by the Central/ any State Government at the time of death of the Government servant.

Provided that this condition shall not apply where the widow seeks employment for herself.

क्त नियम के अनुसार अभ्यर्थी का आवेदन अनुकम्पा नियुक्ति के लिए तब स्वीकार नहीं किया जा सकता जब कि मृत राज्य कर्मचारी की मृत्यु के दिन उस का पति/ पत्नी, या कम से कम एक पुत्र, अविवाहित पुत्री, दत्तक पुत्र /पुत्री, किसी केन्द्रीय या राज्य सरकार का, या केन्द्रीय या राज्य सरकार द्वारा पूर्ण या आंशिक रूप से नियंत्रित संगठन या निगम में नियमित आधार पर नियोजन में हो। इस स्थिति में केवल मृत राज्य कर्मचारी की विधवा का आवेदन स्वीकार किया जा सकता है।

प के मामले में आप का छोटा भाई राज्य के शिक्षा विभाग का नियमित आधार पर नियोजन में है। इस तरह आप का आवेदन स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है। भाई के प्रोबेशन काल में होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है।

अनुकम्पा नियुक्ति किसी का अधिकार नहीं, पिता की संपत्ति में हर उत्तराधिकारी का अधिकार है।

Compassionate Appointmentसमस्या-
आशीष कुमार ने दुमका, झारखण्ड से पूछा है-

मेरे पिताजी झारखण्ड मे साहकारिता विभाग में लिपिक के पद पर कार्यरत थे। वे कैँसर रोग से पीड़ित थे। उनका देहान्त 20 फरवरी 2012 को हो गया। वे तब तक सरकारी सेवा में कार्यरत थे। हम तीन भाई हैं। सब से बड़ा मैं हूँ और बेरोजगार हूँ, लेकिन मेरी माँ और छोटा भाई मझले भाई को अनुकम्पा के तहत नौकरी दिलाना चाहते हैं और मुझे अपने पिताजी का कोई रुपया पैसा जमीन जायदाद नहीं देना चाह रहे हैं। मुझे नौकरी और जायदाद लेने का उपाय सुझावें और क्या मैं बड़ा बेटा होने के नाते नौकरी पाने का हकदार हूँ या नहीं?

समाधान-

राजकीय सेवा में रहते हुए किसी राज्य कर्मचारी की मृत्यु हो जाने पर उस के किसी आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति पाना किसी तरह का अधिकार नहीं है। यह राज्य की अनुकम्पा मात्र है। किसी राज्य कर्मचारी की सेवा में रहते हुए मृत्यु हो जाने पर अचानक उस का परिवार किसी तरह की आमदनी न होने पर निराश्रित न हो जाए, उसे जीने का सहारा बना रहे इस सिद्धान्त के अंतर्गत अनुकम्पा नियुक्ति दी जाती है। प्रत्येक राज्य सरकार के इस के अपने नियम हैं। ऐसी नियुक्ति नियमों के अनुसार और पद रिक्त होने पर ही प्रदान की जा सकती है।

हाँ तक आप के परिवार का प्रश्न है आप की माता जी और आप तीनों भाई आप के पिता के उत्तराधिकारी हैं। कोई भी रोजगार पर नहीं है। ऐसी अवस्था में आप के पिता के आश्रितों में से किसी एक को जिस पर शेष तीन उत्तराधिकारियों में से किसी को आपत्ति न हो उसे ही नौकरी दी जा सकती है। इस कारण आप चारों उत्तराधिकारियों को किसी एक पर सहमत होना पड़ेगा। माँ की सहमति अधिक महत्वपूर्ण है। यदि आप की माता जी और दोनों भाई आप को नौकरी दिलाने के लिए अपना अनापत्ति प्रमाण पत्र दे देते हैं तो आप को अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त हो सकती है, अन्यथा नहीं। केवल बड़ा पुत्र होने मात्र से आप को कोई अधिकार प्राप्त नहीं होता है।

प के पिता की जमीन, जायदाद और नौकरी के कारण मिलने वाले लाभ हैं उन पर आप के पिता के चारों उत्तराधिकारियों का समान अधिकार है। यदि अन्य उत्तराधिकारी उस में आप का हिस्सा नहीं देना चाहते हैं तो आप अचल संपत्ति के लिए बँटवारे का दीवानी वाद न्यायालय में प्रस्तुत कर सकते हैं तथा नौकरी के कारण आप के पिता के लाभ जो उन के विभाग से मिलने वाले हैं उन्हें प्राप्त करने के लिए आप विभाग को सीधे आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं वे इन लाभों का वितरण रोक देंगे। आप जिला न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर अपने चौथाई हिस्से के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। उस प्रमाण पत्र के आधार पर विभाग आप को उन की मृत्यु पर देय लाभों का एक चौथाई हिस्सा आप को अदा कर देगा।

अनुकम्पा नियुक्ति पूरी तरह मेहरबानी है, पर सरकार द्वारा की गई मेहरबानी भी न्यायपूर्ण होनी चाहिए।

कानूनी सलाहसमस्या-

सीहोर, मध्य प्रदेश से विशाल शर्मा ने पूछा है-

मेरे पिता जी का देहान्त 27.05.2003 को हुआ था वे जिला कलेक्ट्री सीहोर में सहायक ग्रेड-2 में नौकरी में थे। मैं उस समय 16 वर्ष का था, मैं ने तुरन्त अनकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। मैं 2005 में बालिग हुआ, मैं ने पुनः आवेदन किया, लेकिन दो वर्ष तक कुछ नहीं हुआ यह कहा गया कि स्थान रिक्त नहीं है। फिर 2006 में मेरी बहिन संविदा शिक्षक के रूप में नौकरी करने लगी। विभाग ने जाँच कराई और इस आधार पर आवेदन रद्द कर दिया कि परिवार का सदस्य (बहिन) नौकरी कर रही है। एक साल बाद उस का विवाह हो गया। मैं ने पुनः आवेदन किया है लेकिन मेरी सुनवाई नहीं हो रही है।

समाधान-

सेवा में रहते हुए कर्मचारी की मृत्यु हो जाने पर परिवार के सदस्य को मिलने वाली नौकरी अनुकंपा नौकरी है जिस का आधार पूरी तरह से मेहरबानी है। मेहरबानी का अर्थ है कोई करे तो करे न करे तो न करे। आप को आपत्ति उठाने का अधिकार नहीं है। लेकिन सरकार तो सब की है तो कानून यह कहता है कि सरकार किसी के प्रति मर्जी से अन्याय नहीं कर सकती उसे न्यायपूर्ण तरीके से काम करना चाहिए।

प के मामले में जब आप का आवेदन बहिन के संविदा शिक्षक के रूप में काम करने के कारण निरस्त की गई थी तभी आप को उच्च न्यायालय में उस आदेश के विरुद्ध रिट याचिका कर देनी चाहिए थी। अब आपने बहुत देरी कर दी है। तब उच्च न्यायालय यह देखता कि जिस दिन आपने आवेदन किया था उस दिन तथा पिता की मृत्यु के समय परिवार का कोई सदस्य नौकरी नहीं कर रहा था।

स मामले में आप अभी भी उच्च न्यायालय के किसी वकील से मिल कर सरकार को एक नोटिस दे दें और उस के बाद अपनी रिट याचिका उच्च न्यायालय में दाखिल करवाएँ। इस मामले में यदि आप का राहत मिल सकती है तो केवल उच्च न्यायालय से ही मिल सकती है। जरूरी नहीं कि वहाँ से भी राहत मिल जाए क्यों कि अनुकम्पा नियुक्ति के मामले में कानून बहुत लचीला है। लेकिन आप को प्रयत्न तो करना ही चाहिए।

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