Download!Download Point responsive WP Theme for FREE!

कर्मचारी का चरित्र सत्यापन

हमें सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के किसी कर्मचारी के चरित्र सत्यापन के संबंध में अनेक तरह से प्रश्न पूछे जाते हैं। हर प्रश्नकर्ता को उस के प्रश्न का पृथक से उत्तर देना संभव नहीं है। सार्वजनिक क्षेत्र में नियोजन प्राप्त करते समय कर्मचारी द्वारा पूर्व में किसी अपराध के लिए अभियोजित किए जाने या दोष सिद्ध पाए जाने और दंडित किए जाने के तथ्य को छुपाने के मामले में उच्चतम न्यायालय ने अवतार सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (ए.आई.आर. 2016 सुप्रीमकोर्ट 3598)  के मामले में स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। यह स्थिति इस प्रकार है…

किसी अभ्यर्थी द्वारा दोषसिद्धि, गिरफ्तारी या किसी आपराधिक मामले के लंबित होने के बारे में, सेवा में प्रवेश करने से पहले या बाद में नियोजक को दी गई जानकारी, सही होना चाहिए और आवश्यक जानकारी का कोई दमन या गलत उल्लेख नहीं होना चाहिए।

झूठी जानकारी देने के लिए सेवाओं की समाप्ति या उम्मीदवारी को रद्द करने का आदेश पारित करते समय, कर्मचारी द्वारा ऐसी जानकारी देते समय यदि कोई विशेष परिस्थितियाँ रही हों तो उन पर विचार कर सकता है। निर्णय लेने के समय नियोक्ता, कर्मचारी पर लागू सरकार के आदेशों / निर्देशों / नियमों को ध्यान में रखेगा।

यदि किसी आपराधिक मामले में शामिल होने की जानकारी को छुपाने या गलत जानकारी देने का मामला हो, जिसमें आवेदन / सत्यापन फॉर्म भरने से पहले ही दोषी ठहराया या बरी कर दिया गया था और ऐसा तथ्य बाद में नियोक्ता के ज्ञान में आता है, तो वह कोई भी निम्नलिखित में से मामले के लिए उपयुक्त कोई भी कदम उठा सकता है: –

  1. तुच्छ प्रकृति के मामलों में, जिनमें दोषसिद्धि दर्ज की गयी हो, जैसे कम उम्र में नारे लगाना, या एक छोटे से अपराध के लिए, जिसके बारे में अगर बता दिया गया होता तो भी कर्मचारी को पद के लिए अयोग्य नहीं माना गया होता, नियोक्ता अपने विवेक से गलत जानकारी देने या उसे छुपाने की कर्मचारी की गलती की अनदेखी कर सकता है।
  2. जहां दोषसिद्धि दर्ज की गई है जो प्रकृति में तुच्छ नहीं है, नियोक्ता कर्मचारी की उम्मीदवारी को रद्द कर सकता है या कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर सकता है।
  3. यदि तकनीकी आधार पर नैतिक अवमानना ​​या जघन्य / गंभीर प्रकृति के अपराध से जुड़े मामले में कर्मचारी पहले ही बरी हो चुका था, और यह पूरी तरह से बरी होने का मामला नहीं हो, या संदेह का लाभ दिया गया है, तो नियोक्ता उपलब्ध अन्य प्रासंगिक तथ्यों पर पूर्ववृत्त के रूप में विचार कर सकता है, और कर्मचारी की निरंतरता के रूप में उचित निर्णय ले सकता है।
  1. ऐसे मामले में, जहाँ कर्मचारी ने एक निष्कर्षित आपराधिक मामले की सत्यता से घोषणा की है, नियोक्ता अभी भी पूर्ववृत्त पर विचार कर सकता है और उसे उम्मीदवार को नियुक्त करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।
  2. ऐसे मामले में जहाँ चरित्र सत्यापन में रूप में तुच्छ प्रकृति के आपराधिक मामले का लंबित होना कर्मचारी द्वारा घोषित किया गया है तब नियोक्ता मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में, अपने विवेक से उम्मीदवार को नियुक्त करने का निर्णय ले सकता है।
  3. जहाँ कर्मचारी कई लंबित मामलों के संबंध में जानबूझकर तथ्य छुपाने का मामला हो वहाँ इस तरह की झूठी जानकारी देने को अपने आप में महत्वपूर्ण मान कर एक नियोक्ता उस व्यक्ति की नियुक्ति के आदेश को जिसके खिलाफ कई आपराधिक मामले लंबित थे ,उचित नहीं मानते हुए उसे रद्द कर सकता है या सेवाओं को रद्द कर सकता है।

7.यदि आपराधिक मामला लंबित था, लेकिन फॉर्म भरने के समय उम्मीदवार को पता नहीं था, फिर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और नियुक्ति प्राधिकारी अपराध की गंभीरता को देखते हुए निर्णय ले सकता है।

  1. यदि कर्मचारी की सेवा में पुष्टि हो जाती है, तो तथ्यों को छुपाने या सत्यापन के रूप में गलत जानकारी प्रस्तुत करने के आधार पर सेवा से हटाने या बर्खास्तगी का आदेश पारित करने से पहले विभागीय जांच करना आवश्यक होगा।
  2. सूचनाएँ छुपाने या गलत सूचनाओं के निर्धारण के लिए सत्यापन / सत्यापन-प्रपत्र अस्पष्ट नहीं अपितु विशिष्ट होना चाहिए। ऐसी जानकारी जिसका विशेष रूप से उल्लेख किया जाना आवश्यक हो उसका खुलासा किया जाना चाहिए। यदि जानकारी नहीं मांगी जाए, लेकिन नियोक्ता के ज्ञान के लिए प्रासंगिक हो तो उस मामले में उद्देश्यपूर्ण तरीके से फिटनेस के मामले पर विचार किया जा सकता है लेकिन ऐसे मामलों में गलत जानकारी प्रस्तुत करने या जानबूझ कर छुपाने के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है।
  3. यदि किसी व्यक्ति को गलत जानकारी प्रस्तुत करने या जानबूझ कर छुपाने के आधार पर दोषी ठहराए जाने से पहले, यह तथ्य उसके ज्ञान में लाया जाना और उसे सफाई का अवसर दिया जाना चाहिए।
Print Friendly, PDF & Email