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चुनाव आयोग नागरिकता के आधार मतदाता सूची से नाम हटाने को चुनौती देने पर आयोग को सिद्ध करना होगा कि वह मतदाता भारतीय नागरिक नहीं है

भारतीय चुनाव आयोग (Election Commission of India) मतदाता सूची से किसी मतदाता का नाम केवल  वैध आधार  पर ही हटा सकता है। यदि किसी मतदाता के नागरिकता या पंजीकरण को चुनौती दी जाती है, तो  सिद्धि का भार (Burden of Proof)  मुख्य रूप से  उस व्यक्ति पर होता है जो चुनौती दे रहा है, न कि मतदाता पर। यह सिद्धांत भारतीय न्यायिक निर्णयों और चुनाव कानूनों में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है।

प्रमुख न्यायिक निर्णय

  1. लाल बाबू प्रसाद vs. भारत निर्वाचन आयोग (2017)
  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि किसी मतदाता की नागरिकता पर सवाल उठाया जाता है, तो  आरोप लगाने वाले को सबूत देना होगा  कि व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है।
  • मतदाता से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह बार-बार अपनी नागरिकता साबित करे, जब तक कि विपक्षी पक्ष ठोस सबूत न दे
  • एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स vs. भारत संघ (2002) 5 SCC 294
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया  न्यायसंगत और पारदर्शी होनी चाहिए।
    • यदि कोई व्यक्ति पहले से मतदाता सूची में शामिल है, तो उसका नाम हटाने के लिए  ठोस कारण और सबूत  आवश्यक हैं।
  • राजबाला vs. हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग (2016)
  • पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कहा कि  नागरिकता का दावा करने वाले व्यक्ति के पास उचित दस्तावेज (जैसे जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, आधार कार्ड) होने पर उसे मतदाता सूची में बने रहने का अधिकार है
    • चुनाव आयोग बिना पर्याप्त जाँच के किसी का नाम नहीं हटा सकता।

मुख्य बिंदु:

  • सिद्धि का भार (Burden of Proof): जो व्यक्ति किसी मतदाता की नागरिकता या पात्रता को चुनौती देता है, उसे  सबूत देना होगा  कि वह व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है या मतदाता सूची में शामिल होने के लिए अयोग्य है।

  • मतदाता का अधिकार:  एक बार मतदाता सूची में नाम शामिल हो जाने के बाद, उसे  लाभ का संदेह (Benefit of Doubt)  मिलता है, और उसका नाम बिना उचित प्रक्रिया के नहीं हटाया जा सकता।

  • निष्कासन प्रक्रिया: चुनाव आयोग को नाम हटाने से पहले  सुनवाई का अवसर  देना होगा और  लेख्य सबूत (Documentary Evidence)  की जाँच करनी होगी।

इस तरह भारतीय चुनाव आयोग  बिना वैध कारण और न्यायिक प्रक्रिया के  किसी मतदाता का नाम नहीं हटा सकता। यदि नागरिकता पर सवाल उठाया जाता है, तो   चुनौती देने वाले को सबूत देना होगा, न कि मतदाता को। यह सिद्धांत भारतीय न्यायपालिका द्वारा कई मामलों में पुष्ट किया गया है।

भारतीय चुनाव आयोग (ECI) बिना उचित प्रक्रिया अपनाए किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटा सकता, भले ही वह नागरिकता पर संदेह क्यों न करे। यह सिद्धांत भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कई बार स्पष्ट किया गया है।