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औद्योगिक विवाद अधिनियम में कामगार की परिभाषा

पिछली पोस्ट औद्योगिक नियोजक एवं श्रमिक/कर्मकार में हमने नियोजक और कर्मकार की परिभाषाएँ जानी थीं। इन में कर्मकार की परिभाषा कुछ व्यापक और विस्तृत है। इस परिभाषा को
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पुश्तैनी संपत्ति में पुत्रियों का हिस्सा

समस्या- हमारी पुश्तैनी जायदाद जयपुर में स्थित है। बीस वर्ष पहले पिताजी ने उस के तीन हिस्से किए। एक स्वयं रखा और एक-एक हिस्सा मुझे और मेरे भाई
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क्या बिना वकील के मुकदमा किया जा सकता है?

क्या बिना वकील के मुकदमा किया जा सकता है? -अनिरुद्ध सिंह, बांदा, उत्तर प्रदेश इस प्रश्न का उत्तर ‘हाँ’ भी हो सकता है और ‘ना’ भी। वस्तुतः कानून
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क्यों नहीं मिलते न्यायाधीश पदों के लिए योग्य व्यक्ति ?

‘भारतीय न्यायिक दृष्टिकोण-2022’ विषय पर अखिल भारतीय न्यायाधीश एसोसिएशन के दो दिवसीय अखिल भारतीय न्यायाधीश सम्मेलन के शुभारंभ के अवसर पर बोलते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अल्तमश
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दावों में अनेक वादियों और प्रतिवादियों का संयोजन

पिछले सप्ताह हम ने चर्चा की थी कि दीवानी वाद किन न्यायालयों में प्रस्तुत किए जा सकते हैं?  जब भी कोई वाद किसी न्यायालय को प्रस्तुत किया जाता
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औद्योगिक नियोजक और श्रमिक/कर्मकार

हम संक्षेप में औद्योगिक विवाद अधिनियम और उस में परिभाषित ‘उद्योग’ शब्द के बारे में बात कर चुके हैं। हम यह जानने की और आगे बढ़ें कि औद्योगिक
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कानूनी समस्या को किस तरह प्रस्तुत करना चाहिए?

समस्या- मेरे पिताजी ने अपनी ३/४ जमीन अपने भाई की विवाहिता बेटी को रजिस्ट्री कर दी है। मैं उनका इकलौता पुत्र हूँ बाकी भी मुझे नहीं देना चाहते।
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138 परक्राम्य अधिनियम के खारिज मुकदमा दुबारा कैसे स्थापित होगा

रुपए 70,000 का एक चैक अनादरित हो जाने पर मैं ने चैक प्रदाता के विरुद्ध धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम के अंतर्गत शिकायत न्यायालय में प्रस्तुत की थी।
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वाद किस न्यायालय में संस्थित किया जाए ?

पिछले रविवार को हमने बात की थी कि दीवानी प्रकृति के वाद क्या हैं ? इस कड़ी में स्पष्ट किया गया था कि ‘वह वाद, जिस में संपत्ति
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