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दत्तक ग्रहण कैसे होगा?

समस्या-

किशन बास वाला ने जयपुर, राजस्थान से पूछा है-

मैं एक हिंदू परिवार से हूं और मेरे दो बच्चे हैं मेरी छोटी वाली बच्ची जिसका जन्म अभी हुआ है, उसको मेरे माता पिता गोद ले रहे हैं।  क्या मैं बच्ची को गोद दे सकता हूँ और यदि गोद देता हूं तो उसकी प्रक्रिया क्या होगी? अभी बच्ची का जन्म सर्टिफिकेट नहीं बना है तो जन्म सर्टिफिकेट बच्ची का किस नाम से बनेगा मेरे नाम से या मेरे माता पिता के नाम से बनेगा? बच्ची का जन्म हॉस्पिटल में हुआ है?

समाधान-

बेटी का जन्म अस्पताल में हुआ है, वहाँ आप की पत्नी और आप का नाम दर्ज है। वे प्रमाण पत्र में भी वही नाम लिखेंगे जिस के आधार पर जन्म मृत्यु पंजीयक के यहाँ से जन्म-प्रमाण पत्र जारी होगा। वैसे भी जन्म के समय तो दत्तक नहीं हुआ था इस कारण जन्म प्रमाण पत्र में तो जन्मदाता माता पिता का नाम ही अंकित किया जाएगा। यदि कोई जुगाड़ कर के आपके माता पिता का नाम दर्ज करा दें तो यह गलत होगा और दर्ज कराने वाला परेशानी में पड़ सकता है कि उस ने गलत तथ्य बता कर जन्म प्रमाण पत्र बनवाया है। ऐसे अनेक अपराधिक मुकदमे राजस्थान में चल भी रहे हैं।

आप अपनी पत्नी की सहमति से बेटी को अपने माता पिता को गोद दे सकते हैं। इस के लिए आप व आप की पत्नी तथा आप के माता-पिता द्वारा दत्तक ग्रहण विलेख निष्पादित कर आपके क्षेत्र के उपपंजीयक के यहाँ पंजीकृत कराना होगा।

गोदनामा और वसीयत दोनों ही प्रभावी रहेंगे।

समस्या-

अंकित ने ग्राम सेथवाल, रानी की सराय, जिला आजमगढ़ (उ.प्र.) से पूछा है-

मेरी नानी ने अपनी दो बेटियों को वसीयत करने के बाद मुझे पंजीकृत विलेख से दत्तक ग्रहण किया है। उनकी छोटी पुत्री मेरी जन्मदात्री माता है।  मैं जानना चाहता हूँ कि सम्पत्ति के लिए गोदनामा प्रभावी है या वसीयत?

समाधान-

गोदनामा और वसीयत दोनों विलेख अपने अपने तरीके से प्रभावी होंगे। वसीयत तो वसीयत करने वाले व्यक्ति की मृत्यु के उपरान्त प्रभावी होती है। वसीयत को मृत्यु के पहले तक कभी भी बदला जा सकता है। एक ही विषय में अनेक वसीयतें होने पर एक व्यक्ति की अन्तिम वसीयत सभी को सुपरसीड करेगी।

गोदनामा से आप अपनी नानी के गोद पुत्र हो गए हैं। यदि परिवार में पहले से कोई पुश्तैनी सहदायिक संपत्ति हो तो जो संपत्ति नाना की मृत्यु के बाद नानी को मिली है उस में आप के गोद लेने से नानी के साथ साथ आप का हिस्सा भी तय हो चुका है। अब यदि आप की नानी की मौजूदा वसीयत बनी रहती है तो नानी के हिस्से की जो भी संपत्ति होगी वह वसीयत में आप की माँ व मौसियों को मिलेगी। इस संबंध में आप को सभी दस्तावेज बता कर किसी स्थानीय दीवानी विधि के जानकार वकील से परामर्श करना चाहिए।

गोदनामा कानून के अनुसार न हो तो उसे निरस्त करने के लिए दीवानी वाद संस्थित किया जा सकता है।

समस्या-

संगीता ने प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं शादी शुदा हूँ और मेरी एक बहन है, वो भी शादी शुदा हैं। मेरे पिता जी सरकारी नौकरी पर कार्यरत थे। दोनों बेटियों की शादी कर देने पर उन्होंने हम दोनों बहनो को बिना बताये अपने सगे भतीजे के बेटे को पंजीकृत गोद ले लिया। उसे  अपनी सम्पति का मालिक बना दिया सेवा के दौरान उनका देहांत हो गया तो क्या हम दोनों बहनो गोद नामा कैंसल करवा सकती हैं और अनुकम्पा के आधार पर नौकरी किसे मिल सकती है? हम को या दत्तक पुत्र को और मेरी सहमति के बिना दत्तक पुत्र को नौकरी मिल सकती है?

समाधान-

आप कैसे कहती हैं कि दत्तक पुत्र को आप के पिता ने संपूर्ण संपत्ति का स्वामी बना दिया? क्या उन्हों ने कोई वसीयत की है। यदि कोई वसीयत नहीं की है तो जैसे एक पुत्र के होते हुए विवाहित पुत्रियों को जो अधिकार प्राप्त हैं वे सभी अधिकार आपको प्राप्त हैं। आप कृषि भूमि के अतिरिक्त तमाम संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार हैं और दत्तक पुत्र भी। आप तीनों  में से प्रत्येक पिता की छोड़ी हुई संपत्ति में एक तिहाई हिस्से की हकदार हैं। अनुकंपा के आधार पर उस आश्रित को नियुक्ति मिल सकती है जो शेष आश्रितों की अनापत्ति ले आए।  आप की आपत्ति करेंगी या अनापत्ति नहीं देंगी तो दत्तक पुत्र अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त नहीं कर सकेगा। गोदनामा आप तभी निरस्त करवा सकती हैं जब कि वह कानून के अनुसार न हो। इस के लिए आप गोदनामा की प्रति प्राप्त कर किसी स्थानीय वकील से सलाह कर सकती हैं और गोद के नियमों का उल्लंघन हुआ हो तो उसे निरस्त करने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकती हैं।

विधवा द्वारा ग्रहण की गई दत्तक संतान का पिता कौन कहलाएगा?

समस्या-

पुरुषोत्तम शर्मा ने हनुमानगढ़, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

श्रीमती कमला पत्नी स्व. लालचन्द कमला देवी की आयु 45 वर्ष थी और कमला देवी के कोई औलाद नहीं थी और ना ही होने की सम्भावना थी। कमला के पति लालचन्द की मृत्यु हो चुकी.थी। कमला.ने अपने जेठ लक्ष्मीनारायण के लड़के धर्मवीर को हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार बचपन से गोद ले रखा है। गोदनामा बना हुआ है कमला.ने अपनी सम्पति का त्याग कर धर्मवीर के नाम कर दी है। तो आप मुझे ये बताएँ कि पहले सभी डाँक्यूमेन्ट में धर्मवीर पुत्र श्री  लक्ष्मीनारायण था अब पि.मु./दत्तक पुत्र होने के बाद भविष्य में सभी धर्मवीर के डाक्युमेन्ट में क्या नाम करवाया जाए? लालचन्द की मृत्यु के बाद कमला ने धर्मवीर को गोद लिया था। अब.पहचान पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड, भामाशाह कार्ड, बैक खाता, लाईसेन्स, सभी डाक्युमेन्ट में क्या नाम करवाया जाए, जो भविष्य मे पूर्ण रुप से सही हो और कोई समस्या ना आए? कोई कहता है. धर्मवीर पि.मु./दत्तक पुत्र कमला करवा लो और कोई कहता है धर्मवीर पि.मु./दत्तक पुत्र लालचन्द करवा लो। तो आप ही बताएँ कि भविष्य में क्या नाम पूर्ण रूप से सही होगा? आपका सुझाव यह था कि बच्चे का दत्तक ग्रहण होने के उपरान्त उस के पिता के स्थान पर उस के दत्तक पिता का ही नाम होना चाहिए। अन्यथा अनेक प्रकार की परेशानियाँ हो सकती हैं। मुझे थोड़ा समझने मे समस्या आ रही है कि धर्मवीर को कमला देवी ने गोद लिया था, ना कि लालचन्द ने। धर्मवीर को गोद लेने से पहले ही लालचन्द की मृत्यु हो चुकी थी। लालचन्द की मृत्यु होने के कुछ समय बाद कमला देवी ने धर्मवीर को गोद लिया था।

समाधान-

मारा जो सुझाव था वही सही है। यदि विधवा किसी पुत्र को दत्तक ग्रहण करती है तो उस का दत्तक पिता दत्तक ग्रहण करने वाली स्त्री का पति ही होगा। उस के पिता के स्थान पर उस के जन्मदाता पिता का नाम तो इस कारण अंकित नहीं किया जा सकता कि वह तो अपनी पत्नी की सहमति से अपने पुत्र को दत्तक दे चुका होता है और पिता होने की हैसियत को त्याग देता है।

हिन्दू दत्तक ग्रहण एवं भरण पोषण अधिनियम 1956 की धारा 14 की उपधारा (4) में उपबंधित किया गया है कि जब एक विधवा या अविवाहित स्त्री किसी बालक को दत्तक ग्रहण करती है और बाद में किसी पुरुष से विवाह करती है तो जिस पुरुष से वह विवाह करती है वह उस दत्तक बालक का सौतेला पिता कहलाएगा।

इस उपबंध से स्पष्ट है कि किसी विधवा द्वारा दत्तक ग्रहण करने पर दत्तक ग्रहण किए गए बालक का पिता उस विधवा स्त्री का मृत पति ही होगा। इस मामले में दत्तक ग्रहण किए गए बालक के दस्तावेजों में धर्मवीर पुत्र स्व. श्री लालचंद लिखवाना होगा। जो कि दत्तक ग्रहण विलेख की प्रति प्रस्तुत कर परिवर्तित कराया जा सकता है। हर दस्तावेज में परिवर्तन की प्रक्रिया भिन्न भिन्न हो सकती है जो आप संबंधित विभाग से पता करें।

दत्तक ग्रहण पंजीकृत दत्तक विलेख या दत्तक ग्रहण समारोह की मौखिक साक्ष्य से ही साबित किया जा सकता है।

adoptionसमस्या-

अमित ने नई दिल्ली से समस्या भेजी है कि-

मेरी बुआ फूफा ने मुझे २ वर्ष कि आयु से गोद ले कर पालन पोषण किया। अब मेरी आयु २८ वर्ष है फूफा की मृत्यु पहले ही हो गई थी, बुआ कि मृत्यु अब हो गई है। उनकी दवा, ईलाज, अंतिम संस्कार मैं ने ही किया। उन की कोई औलाद नहीं थी। वोटर कार्,ड अधार कार्ड, राशन कार्ड, सब जगह पिता के स्थान पर फूफा का नाम है। क्या मुझे संम्पत्ति में अधिकार मिल सकता है?

 

समाधान-

प को फूफा और बुआ की संपत्ति में अधिकार तभी प्राप्त हो सकता है जब कि आप अपने फूफा के गोद लिए हुए पुत्र हों या फिर आप के फूफा या बुआ दोनों में से किसी ने उन की संपत्ति आप को वसीयत कर दी हो। आप ने वसीयत का उल्लेख नहीं किया है जिस का अर्थ है कि उन दोनों ने आप के हक में कोई वसीयत नहीं की है।

प ने तीन दस्तावेजों में पिता के स्थान पर अपने फूफा का नाम दर्ज होना अंकित किया हुआ है। इन में से वोटर कार्ड और आधार कार्ड ऐसे दस्तावेज हैं जिन में पिता का नाम बिना पिता की सहमति के भी अंकित किया जा सकता है। इस कारण इन दस्तावेजों से यह साबित करना संभव नहीं है कि आप अपने फूफा के गोद पुत्र हैं। राशन कार्ड एक ऐसा दस्तावेज है जिस में आप के फूफा का नाम मुखिया के रूप में दर्ज हो सकता है यदि ऐसा है तो उस के आधार पर यह माना जा सकता है कि उन्हों ने आप को पुत्र का दर्जा दिया है।

लेकिन फिर भी वास्तविक तथ्य यह है कि आप उन के पुत्र न थे। आप का स्वयं का कथन यह है कि उन्हों ने आप को 2 वर्ष की उम्र से गोद लिया था। तब आप को यह प्रमाणित करना होगा कि उन्हों ने आप को गोद लिया था। गोद लेना अर्थात दत्तक ग्रहण को प्रमाणित करने का प्राथमिक साक्ष्य तो यह है कि दत्तक ग्रहण को कोई दस्तावेज लिखा गया हो और उसे उप पंजीयक के कार्यालय में पंजीकृत कराया गया हो। यदि ऐसा होता तो आप को यहाँ सलाह लेने की आवश्यकता न होती।

त्तक ग्रहण को एक और तरीके से साबित किया जा सकता है। कोई विवाद होने पर आप न्यायालय में मौखिक साक्ष्य से साबित कर सकते हैं कि जब आप दो वर्ष के थे तो आप की बुआ और फूफा ने वाकई गोद लेने का समारोह आयोजित कर आप को गोद लिया था जिस में आप के माता-पिता और आप को बुआ-फूफा की सहमति थी। इस अवसर पर लोगों को बुलाया गया था और उस में शामिल लोगों को नेग जैसे बताशे, नारियल आदि कुछ वितरित किया गया था और लोगों ने आप को कुछ उपहार दिए थे आदि आदि जो भी आप के यहाँ परंपरा से गोद लेते समय किया जाता हो। यदि दत्तक ग्रहण की यह मौखिक गवाही उपलब्ध हो तो न्यायालय के समक्ष उन के बयानों से दत्तक ग्रहण को साबित किया जा सकता है। तब आप के ये तीनों दस्तावेज वोटर कार्ड, आधार कार्ड और राशन कार्ड सहायक साक्ष्य के रूप में दत्तक ग्रहण के तथ्य को मजबूती से साबित कर सकते हैं।

पत्नी के सहमत न होने पर या बालक के 15 वर्ष से अधिक उम्र का होने के कारण दत्तक ग्रहण संभव नहीं है।

Willसमस्या-

रिरमल ने जोधपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे बड़े पिताजी हैं। उन की पत्नी उन से अलग रहती है। उन के एक पुत्री है जिस का पिताजी ने विवाह कर दिया है। मेरी उम्र 22 वर्ष है। मेरे बड़े पिताजी ने मुझे सामाजिक रूप से अपना गोद पुत्र घोषित कर रखा है। बड़े पिताजी की पत्नी इस गोदनामे से सहमत नहीं है। इस कारण से मुझे राय दें कि वे गोदनामा को कानूनी रूप से कैसे संपादित कर सकते हैं?

समाधान-

प के बड़े पिताजी का उन की पत्नी से विवाह विच्छेद नहीं हुआ है और वे अब भी उन की पत्नी हैं। किसी भी दत्तक ग्रहण में यह आवश्यक है कि पत्नी की सहमति हो। दूसरा कोई भी व्यक्ति जिस की उम्र् 15 वर्ष से अधिक हो उसे द्त्तक ग्रहण नहीं किया जा सकता जब तक कि इस तरह की परिवार या समाज में कोई परंपरा न हो। इस प्रकार ऐसा प्रतीत होता है कि आप के बड़े पिताजी द्वारा आप को दत्तक ग्रहण किया जाना कानूनी रूप से संभव नहीं है।

त्तक ग्रहण का कानूनी परिणाम यह होता है कि दत्तक ग्रहण किए जाने वाला व्यक्ति दत्तक ग्रहण किए जाने वाले व्यक्ति का उसी प्रकार पुत्र माना जाता है जैसे कि वह दत्तक ग्रहण करने वाले की औरस संतान हो। आप को दत्तक ग्रहण किए जाने पर आप को बड़े पिताजी के जीवनकाल के उपरान्त उन के औरस पुत्र की ही भाँति आप उन के उत्तराधिकारी होते। उन की एक विवाहित पुत्री भी है। इस प्रकार पिताजी के जीवनकाल के उपरान्त तीन उत्तराधिकारी होते। बड़े पिताजी की पत्नी, पुत्री और एक आप। इस तरह उत्तराधिकार में आप को उन की एक तिहाई संपत्ति प्राप्त होती।

ब आप को दत्तक ग्रहण कानूनी रूप से नहीं कर पाने के कारण आप के बड़े पिताजी आप के नाम एक तिहाई संपत्ति वसीयत कर सकते हैं तथा पत्नी और पुत्री को भी एक तिहाई संपत्ति वसीयत कर सकते हैं। यह व्यवस्था भी वसीयत द्वारा की जा सकती है कि तीनों वसीयतियों में से किसी एक का देहान्त उन के जीवनकाल में हो जाने पर उन की संपत्ति शेष दो व्यक्तियों में बराबर बाँटी जाएगी। वसीयत में किसी अन्य प्रकार की व्यवस्था भी की जा सकती है।

विधवा द्वारा दत्तक ग्रहण

lawसमस्या-
बाबू साहब ने दरभंगा, बिहार से पूछा है-

मेरे मामाजी तीन भाई थे। पहले (उम्र- 58 वर्ष) को एक पुत्र और तीन पुत्री हैं। इन का पुत्र 18 वर्ष से कम उम्र का है एवं सभी पुत्रियों का विवाह हो चुका है। दूसरे (उम्र-45) वाले नि:संतान थे जिन की मृत्यु दो साल पहले हो गई। तीसरे (उम्र-4०) वाले को पॉच पुत्र और दो पुत्रियाँ हैं। सभी संतान 18 वर्ष से नीचे के उम्र के हैं। दूसरे वाले मामा की मृत्यु के बाद उनको अग्नि तीसरे वाले मामा के तीसरे पुत्र ने दिया। कर्म समाप्त होने के बाद पंचो के समक्ष उस लड़के को दूसरी मामी को गोद दिया गया और कोर्ट से गोदनामा भी बनाया गया। दूसरी मामी स्वभाव की ठीक नहीं है। मामा की असमय मृत्यु (45 वर्ष के उम्र में) उसी के कारण हुआ। पुरे परिवार से बराबर झगड़ा किया करती थी। गोद लेने के दो महिने बाद झगड़ा करके उसने लड़के को तीसरे मामा को वापस कर दिया। अब वह जमीन बेच कर कहीं और जाना चाहती है। मामा की मृत्यु के बाद मिले बीमा के पैसों को भी इधर-उधर कर रही है। सारा खेत का जमीन पहले वाले मामा के नाम से है जो किसी तीसरे व्यक्ति से खरिदा गया था। घर वाला जमीन उनके पिता के नाम से है एवं घर के पीछे की जमीन तीनों भाइयों के नाम से है। कृपया बतायें कि क्या वो जमीन बेच सकती है। उस गोद लिये बच्चे का क्या हक है? आप को बता दें कि मेरी माँ दो बहन हैं। मैं नानी गॉव मे ही बसा हूँ। कुछ दिन पह्ले गॉव की एक अभद्र औरत के साथ मिलकर मामी ने अपराधिक मामला में फँसाने का धमकी भी दी है।

समाधान-

प के मामा का देहान्त होते ही आप के मामा की जो व्यक्तिगत संपत्ति थी वह तो उत्तराधिकार में आप की मामी को प्राप्त हो चुकी है क्यों कि मामा के कोई संन्तान नहीं थी। अब आप के तीसरे मामा की सन्तान को उस ने गोद लिया है। जिसे आप कहते हैं कि उसे वापस तीसरे वाले मामा को दे दिया है। लेकिन एक बार किसी सन्तान को गोद ले लिया जाए तो उसे वापस नहीं दिया जा सकता। इस कारण वह लड़का अभी भी मामी का गोद पुत्र है। गोद ली हुई संतान मामी ने मामा की मृत्यु के बाद गोद ली है इस कारण वह केवल मामी का गोद पुत्र है मामा जी का नहीं। इस कारण उस का मामी पर वही अधिकार है जो कि केवल मामी के पुत्र का होता। किसी भी स्त्री की संपत्ति पूरी तरह से उसी की होती है। इस कारण से आप की मामी को जो संपत्ति मामा से उत्तराधिकार में प्राप्त हुई है उस पर उस का पूरा अधिकार है उसे वह बेच सकती है या किसी को दे सकती है। बीमा के पैसे उस के ही हैं, वह उन का कुछ भी कर सकती है।

खेत की जमीन पहले वाले मामा के नाम है तो उन की ही है। इस कारण दूसरी मामी उस को नहीं बेच सकती। घर की जमीन मामा के पिता जी अर्थात आप के नाना के नाम है इस कारण वह उसे भी नहीं बेच सकती। यदि आप के नाना नहीं हैं तो वह उस घऱ में अपना हिस्सा जरूर मांग सकती है। लेकिन वह संपत्ति पुश्तैनी हो जाने के कारण उस में दूसरे मामा के हिस्से में मामी के साथ साथ मामी द्वारा गोद लिए पुत्र का भी बराबर का हक है। पीछे की जमीन जो तीनों भाइयों के नाम है उस में भी मामी का हिस्सा है। लेकिन उस में गोद लिए पुत्र का कोई हिस्सा नहीं है। मामी चाहे तो इस जमीन में हिस्सा मांग सकती है लेकिन इस हिस्से को प्राप्त करने के लिए उसे न्यायालय में कार्यवाही करनी होगी। मामी की मृत्यु के बाद यदि कोई संपत्ति बचती है तो उस का उत्तराधिकार उन के द्वारा गोद लिए पुत्र को प्राप्त होगा।

दत्तक का पूर्व संपत्तियों पर अधिकार

Mother Holding Child's Handसमस्या-
अखिलेश चौधरी ने जोधपुर, राजस्थान से पूछा है-

मेरे दादाजी के 7 संताने हैं मेरे ताउजी के कोई संतान नहीं हैं उनके पास काफी चल और अचल संपति हैं, जिस में से कुछ तो मेरी ताउजी के नाम से हैं उन्‍होने मेरे छोटे भाई को गोद ले रखा है। किन्‍तु मेरी जानकारी में किसी प्रकार का गोदनामा/ इकरारनामा अथवा वसीयत या गोद लेने का पंजीयन नहीं है।  लोक नजर में वह उनका गोदपुञ है व उसका परिवार उनके साथ रहता है। आप मुझे यह अवगत करावें कि वह ताउजी की संपति के साथ साथ मेरे पिताजी की संपति में भी उत्‍तराधिकार हक रखता है या अथवा दोनों में। इस प्रकार का गोद नियम सम्‍मत होगा या नहीं?  क्‍योंकि मेरी ताईजी कहती हैं कि वह हमारी जमीन में भी हिस्‍सा लेगा अथवा उनके रहमोकरम पर हमारे लिये हिस्‍सा छोडेगा। इस संबंध में मुझे कानूनी राय दें।

समाधान-

त्तक ग्रहण दत्तक के दस्तावेज को पंजीकृत करवा कर भी किया जा सकता है। लेकिन इस दस्तावेज का पंजीकृत होना जरूरी नहीं है। लेकिन यह आवश्यक है कि दत्तक ग्रहण के समय दत्तक ग्रहण किए जाने वाले व्यक्ति की आयु 15 वर्ष से अधिक नहीं हो। इस कारण यदि आप के भाई को अभी तक गोद नहीं लिया गया है तो अब गोद लेना संभव नहीं है। यदि दत्तक ग्रहण का दस्तावेज पंजीकृत न हो तो गोद लेने की रस्म रिवाज के अनुसार होना जरूरी है। यदि यह रस्म समारोह नहीं हुआ है और उस की कोई साक्ष्य नहीं है तो उस का गोद लिया जाना प्रमाणित होना कठिन है।

दि किसी व्यक्ति को कानूनी तरीके से गोद नहीं लिया गया है तो वह अपने दत्तक पिता की संपत्ति को उत्तराधिकार में प्राप्त नहीं कर सकता। उसे संपत्ति प्राप्त होने का केवल वसीयत के द्वारा ही प्राप्त हो सकती है।

प के मामले में आप के भाई को गोद लेना प्रमाणित नही है। हो सकता है उसे गोद पुत्र कहा जाता हो लेकिन केवल उस के नाम वसीयत ही कर रखी हो जो कि पंजीकृत नहीं हो। वसीयत का पंजीकृत होना आवश्यक नहीं है।

गोद जाने वाले व्यक्ति की अपने मूल परिवार में जो भी प्रास्थिति होती है वह समाप्त हो जाती है। अर्थात उस का अपने मूल परिवार से उत्तराधिकार का अधिकार समाप्त हो जाता है। लेकिन यदि वह गोद जाने के पहले ही कोई संपत्ति प्राप्त कर चुका है या किसी संपत्ति में अधिकार प्राप्त कर चुका है तो उस पर उस का अधिकार समाप्त नहीं होता।

प के मामले में आप के भाई का आप के पिता की संपत्ति में अधिकार बना हुआ है क्यों कि उस के गोद जाने का कोई प्रमाण नहीं है। इस कारण वह अपने कथित गोद पिता की संपत्ति को तो प्राप्त करेगा ही वह अपने मूल परिवार की संपत्ति भी उत्तराधिकार में प्राप्त करेगा।

दत्तक संतान और उत्तराधिकार

Mother Holding Child's Handसमस्या-
अजय शर्मा ने श्योपुर, मध्यप्रदेश से पूछा है-

मेरी मौसी अभी मेरे मामाजी के साथ रहती है ओर आंगनबाड़ी में जॉब करके अपना पालन पोषण करती है। शादी के कुछ महीने बाद मौसजी से उनका संबंध खराब होने के कारण वह मामाजी के पास ही रहती है। उन्होंने मुझे (अजय शर्मा) अपने दत्तक् पुत्र के रूप में रखा है। मेरे नानाजी की ज़मीन है जो अभी तक मेरे नानाजी के नाम पर ही है। क्या मेरी मौसी उस ज़मीन में से हिस्सा लेने का अधिकार रखती है? अगर हाँ तो प्लीज मुझे इसके बारे में सूचना उपलब्ध करवाएँ।

समाधान-

प की समस्या में यह स्पष्ट नहीं है कि आप के नाना जी जीवित हैं या नहीं हैं। दूसरे यह स्पष्ट नहीं है कि आप को मामाजी ने दत्तक लिया है या फिर मौसी ने।

खैर¡ दत्तक ग्रहण लिए जाने का समारोह होना आवश्यक है तथा दत्तक देने वाले जन्मदाता माता-पिता की तथा दत्तक लेने वाले माता पिता की सहमति से ही दत्तक ग्रहण हो सकता है। इस के अतिरिक्त उपपंजीयक के यहाँ दत्तक ग्रहण का दस्तावेज पंजीकृत कराने से भी दत्तक ग्रहण हो सकता है। यदि आप इन दोनों तरीकों में से किसी एक से दत्तक ग्रहण नहीं किए गए हैं तौ आप को दत्तक नहीं रखा गया है। आप गलत समझ रहे हैं कि आप को दत्तक ग्रहण कर लिया गया है। यदि उक्त तरीकों में से किसी एक से आप का दत्तक ग्रहण हुआ है तो आगे चला जाए।

संपत्ति आप के नाना की है। यदि वे जीवित हैं तो संपत्ति उन्हीं की है। किसी का कोई अधिकार नहीं है वे अपने जीवनकाल में किसी को भी वसीयत कर सकते हैं या बेच सकते हैं या फिर दान आदि दे सकते हैं। यदि आप के नाना उक्त में से किसी प्रकार से कोई हस्तान्तरण नहीं करते हैं और उन का देहान्त हो जाता है या फिर वे अभी भी जीवित नहीं हैं तो फिर वह संपत्ति उत्तराधिकार में आप के मामा, मौसी, आप की माँ तथा उन के अन्य भाई बहनों की संयुक्त संपत्ति है तथा उन में से कोई भी बँटवारे का वाद संस्थित कर के संपत्ति का कानून के अनुसार बँटवारा करवा कर अपना हिस्सा प्राप्त कर सकता है।

प किसी के भी दत्तक पुत्र हों भी तो भी आप को उसी प्रकार से अपने दत्तक पिता/माता की संपत्ति पर अधिकार प्राप्त होगा जैसे उन के खुद के औरस पुत्र को प्राप्त होता। आप को उन की संपत्ति पर अधिकार उन के द्वारा संपत्ति आप को हस्तान्तरित कर देने पर या उन की वसीयत से या फिर उन के देहान्त के उपरान्त उत्तराधिकार में प्राप्त होने पर ही हो सकता है।

विवाह, दत्तक आदि से जाति परिवर्तन आरक्षण हेतु मान्य नहीं . . .

lawसमस्या-
दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल से जॉन लेप्का ने पूछा है –

मैं एक अनुसूचित जाति से हूँ। मेरा विवाह 16 फरवरी 2007 को मन्दिरा प्रधान से हुआ है जो कि अन्य पिछड़ी जाति से है। मैं जानना चाहता हूँ कि मेरी पत्नी श्रीमती मन्दिरा प्रधान की जाति क्या होगी? वह अनुसूचित जाति की मानी जाएगी या फिर अन्य पिछड़ी जाति की मानी जाएगी। क्या उसे अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र प्राप्त हो सकता है?

समाधान-

भारत में जाति का महत्व वैवाहिक और पारिवारिक मामलों में काफी समय से रहा है। अब अन्तर्जातीय विवाहों के बाद उन कारणों से जाति का कोई महत्व नहीं रह गया है। लेकिन भारतीय संविधान में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ी जातियों को शैक्षणिक संस्थानों व नौकरियों में आरक्षण प्रदान किया गया है। इस कारण से इस तरह के विवाद हुए भी हैं और न्यायालयों तक पहुँचे भी हैं। जाति प्रमाण पत्र का भी इसी कारण से महत्व है।

स तरह के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय का नवीनतम मत यह है कि एक व्यक्ति को आरक्षण का लाभ इस कारण से मिलता है कि वह किसी जाति में उत्पन्न हुआ है और उस ने उस जाति की असुविधाओं को झेला है या उसे विरासत में प्राप्त हुई हैं। लेकिन कोई यदि ऐच्छिक रीति से विवाह, या दत्तक ग्रहण के माध्यम से अपनी जाति बदलता है और फिर उसे इस कारण से आरक्षण का लाभ दिया जाता है तो इस से फर्जी जाति परिवर्तन के मामले बहुत बढ़ जाएंगे और लोग इस तरह जाति बदल कर आरक्षण का लाभ उठाने लगेंगे। वैसे भी जब एक व्यक्ति वयस्क होने तक एक जाति के लाभ प्राप्त कर लेता है और फिर सोच समझ कर विजातीय से विवाह करता है तो यह उस का  ऐच्छिक कृत्य है। इस कारण से उस का लाभ उसे प्राप्त नहीं होना चाहिए। उच्चतम न्यायालय द्वारा 4 जनवरी 1996 को श्रीमती वलसम्मा पॉल बनाम कोचिन विश्वविद्यालय व अन्य के प्रकरण में दिए गए निर्णय में इस संबंध में विस्तृत रूप से विचार किया गया है।

प दोनों का वयस्क होने के उपरान्त विवाह हुआ है जो दोनों की इच्छा से संपन्न हुआ है। इस कारण से इस ऐच्छिक कृत्य से आप दोनों की ही जाति का परिवर्तन होना मान्य नहीं हो सकता। आप की पत्नी की जाति पूर्व की तरह अन्य पिछड़ी जाति (ओबीसी) बनी रहेगी। उन का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र नहीं बन सकेगा। यदि किसी तरह बनवा भी लिया जाता है और उस के आधार पर कोई लाभ प्राप्त किया जाता है तो उसे कोई भी चुनौती दे सकता है तथा वैसी स्थिति में वह जाति प्रमाण पत्र सही नहीं माना जाएगा और उस के आधार पर प्राप्त लाभ भी आप की पत्नी से छिन जाएगा।

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