उत्तराधिकार Archive

दादी उन के पति से मिले हिस्से की वसीयत कर सकती है।

October 29, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

योगेश सोलंकी ने नामली (रतलाम), मध्य्प्रदेश से मध्य प्रदेश राज्य की समस्या भेजी है कि-

मारे दो मकान ओर एक खेत हैं। कुछ महीनों पूर्व ही मेरी दादी की मृत्यु हुई है और मेरी दादी ने एक रजिस्टर्ड वसीयतनामा किया है उसमें एक बड़ा मकान और वो खेत मेरे चाचा के नाम किया गया और सिर्फ छोटा मकान मेरे पापा को दिया गया। जबकि खेत मेरी दादी के नाम का था और दोनों मकान नगर परिषद में के रजिस्टर में और रजिस्ट्री भी मेरे दादाजी के नाम से है और कानूनी तौर पर भी दोनों मकान मेरे दादा जी के नाम से है। वसीयत सिर्फ खुद की खरीदी हुई या स्वअर्जित संपत्ति पर ही की जाती है। तो ये जो वसीयत की गई वो सही है या गलत और मुझे क्या करना चाहिये?

समाधान-

प बिलकुल सही हैं। दादाजी के नाम की जो संपत्ति है उस का उत्तराधिकार तो दादाजी के समय ही निश्चित हो गया। यदि आप के दादाजी के दो पुत्र ही हैं और कोई पुत्री नहीं थी तो उन की समूची संपत्ति उन के देहान्त पर तीन हिस्सों में विभाजित हो कर एक एक हिस्सा दादी और आप के पिता और चाचा को मिलना चाहिए। इस तरह दोनों मकानों का एक तिहाई हिस्सा आप के पिता को मिला, एक चाचा को और एक दादी को। अब यदि दादी उन मकानों की वसीयत नहीं कर सकती है तो भी वह अपने हिस्से की वसीयत कर सकती है। इस तरह मकानों का 2/3 हिस्सा चाचा को मिलेगा और जमीन दादी के नाम होने से वसीयत से चाचा को मिलेगी।

अब आप को खुद सोचना चाहिए कि अभी जो मकान मिला हुआ है वह दोनों मकानों के मूल्य के एक तिहाई से अधिक मूल्य का है तो कुछ भी करने में कोई लाभ नहीं है। और यदि लड़ाई लड़ी जाए और फिर भी इतना ही अधिक मिले की उस से केवल लड़ाई का खर्च भी न निकले तो लड़ाई लड़ने से कोई लाभ नहीं।

समस्या-

संदीप कुमार ने ब्यावर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता की पहली पत्नी से 1979 में सीमाजिक रीति से तलाक हो चुका था, उस से एक पुत्र का जन्म हुआ था। दूसरी पत्नी से चार पुत्र तथा एक पुत्री का जन्म हुआ। जिनमें से दो अविवाहित पुत्रियों तथा एक विवाहिता पुत्री की मृत्यु हो गई। इसके बाद मेरे पिताजी का भी स्वर्गवास हो गया है। अब मेरे पिताजी की निर्वसीयती सम्पत्ती पर किस किस का अधिकार है। जबकि पहली पत्नी के पुत्र से पिताजी के जीवन काल में कोई वास्ता नहीं था। कृपया सुझाव दें।

समाधान-

दि आप की पिता की पहली पत्नी का तलाक सामाजिक रीति से हुआ था और न्यायालय ने विवाह विच्छेद की डिक्री पारित नहीं की थी तो आप के पिता का दूसरा विवाह अवैध है इस कारण दूसरी पत्नी को वैधानिक दर्जा नहीं मिलेगा। किन्तु सभी संतानों को बराबर उत्तराधिकार मिलेगा।

इस प्रकार यदि न्यायालय में यह कहा गया और साबित हुआ कि दूसरा विवाह वैध नहीं था तो पिताजी की संपत्ति में दूसरी पत्नी को कोई हिस्सा नहीं मिलेगा। जितने जीवित पुत्र पुत्री हैं उन सभी को एक एक हिस्सा मिलेगा तथा एक विवाहित पुत्री जिस की मृत्यु हो गयी है, यदि उस की संतानें और पति जीवित है तो उस का हिस्सा उन्हें प्राप्त होगा। आप ने जो विवरण दिया है उस में यह तथ्य सही अंकित है कि दूसरी पत्नी से चार पुत्र व एक पुत्री हुई है, तो फिर दो अविवाहित व एक विवाहित पुत्री की मृत्यु कहाँ से हो गयी है। आप अपने तथ्यों के हिसाब से इस राय को दुरुस्त कर सकते हैं।

समस्या-

लक्ष्मी नारायण ने मोहल्ला शीतलगंज, पूर्वा, जिला उन्नाव से भेजी है कि-

मेरे पिता 3 भाई थे, सबसे बडे भाई की 3 बेटियाँ, दूसरे नं. पर मेरे पिता थे और सबसे छोटे भाई ने शादी नहीं की थी। सबसे पहले मेरे पिता का देहांत हो गया और प्रोपर्टी का 1/3 हिस्सा मेरे नाम दर्ज हो गया। इसके बाद सबसे छोटे भाई का देहांत हुआ जो कि अविवाहित थे और इनकी 1/3 हिस्से की प्रौपट्री सबसे बडे भाई के नाम सन् 1985 में दर्ज हो गयी। अंत में सबसे बडे भाई का देहांत हुआ और सन् 1992 में प्रौपट्री का (1/3+1/3=2/3) हिस्सा उनकी बेटियों के नाम दर्ज हो गया जो कि सारी विवाहित हो चुकी थीं। क्या 1992 में बेटियों को प्रोपर्टी में हिस्सा मिलता था? और मुझे मेरे पिता के सबसे छोटे भाई की प्रोपर्टी में 1/2 हिस्सा नहीं मिलेगा क्या?

समाधान-

दि आप के द्वारा कथित संपत्ति में कोई कृषि भूमि सम्मिलित नहीं है तो अब तक जो भी हुआ है वह सही हुआ है।

आप के पिता की मृत्यु पर उन के हिस्से की सम्पत्ति आप के हिस्से में आ गयी। जब आप के छोटे चाचा का देहान्त हुआ तो आप के पिता जीवित नहीं थे इस कारण उन के बड़े भाई को उन की संपत्ति प्राप्त हुई। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की अनुसूची में भाई को ही उत्तराधिकार का अधिकार है मृत भाई की संतान को नहीं। चूंकि उन की संपत्ति बड़े भाई को मिल गयी तो बड़े भाई की मृत्यु पर उन की तीन बेटियों को उन की संपत्ति मिली जो सही मिली है।

उत्तर प्रदेश में खेती की संपत्ति के सिवा सभी प्रकार की संपत्ति पर बेटियों को चाहे वे विवाहित हों या अविवाहित हो पिता का उत्तराधिकार प्राप्त करने का अधिकार है, बाकी सभी राज्यों में खेती की संपत्ति पर भी सभी बेटियों को उत्तराधिकार प्राप्त है।

 

समस्या-

इति श्रीवास्तव ने रांची , झारखंड से समस्या भेजी है कि-

मेरी माता का देहांत 2013 में हुआ, वे माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापिका के पद पर पिछले 30 सालों से अधिक से कार्यरत थीं। 2015 में वह रिटायर होने वाली थीं। उनकी मृत्यु के बाद उनकी तीन पुत्रियों में से किसी को भी अब तक उनके सेवा से जुड़ी कोई भी राशि प्राप्त नहीं हुई है। जब मैं जे.डी. ऑफिस गई तो मुझे यह बताया गया कि तीनों लड़कियों में से किसी एक को नौकरी मिलेगी और मेरे पिता को पेंशन मिलेगी हालांकि मेरी माता के अन्य बकाया के सम्बंध में कोई बात नहीं की गई। मेरी माता का मेरे पिता से कोई लेना-देना नहीं था, हालांकि दोनों में तलाक नहीं हुआ था, और माँ की सेवा पंजिका में भी उनका नाम है जिसे वो हटाना चाहती थीं लेकिन हटा नहीं सकीं। मेरे पिता कोऑपरेटिव सोसायटी, इलाहाबाद में क्लर्क हैं। मेरी माँ की मृत्यु के समय हम तीनों बहने बेरोजगार थीं और माँ के रिश्तेदारों के घर में रहती थीं। हालांकि 2015 में मुझे केंद्र सरकार में नौकरी मिल गई। पर अन्य दोनों बहनें कम सैलरी पर प्राइवेट जॉब करती हैं और कभी-कभी छोड़ना भी पड़ता है। माँ की जगह पर नौकरी हम तीनों ही नहीं करना चाहते हैं। हम तीनों अविवाहित हैं। अभी हमारी माँ की एक पैतृक अचल सम्पत्ति बिकी उसमें से माँ के रिश्तेदारों, जिनका हिस्सा भी उस सम्पत्ति में था, ने यह कहकर की कानून के अनुसार उनको एक हिस्सा मिलेगा, हमारे शेयर में से पिता को एक हिस्सा दिया जबकि हमलोग उनसे कोई मतलब नहीं रखते। अब मेरे सवाल हैं कि, मेरी माँ के विभाग से नियमतः हम तीनों को किस-किस मद में पैसे मिलने हैं। और एल आई सी तो मुझे पता क्या उनका कोई और भी देय बनता है? उनके पैसे को प्राप्त करने के लिए क्या कागजी कार्रवाई करनी होगी? कैसे मैं अपने पिता को कुछ भी लाभ प्राप्त होने से रोक सकती हूँ, क्योंकि मेरी माँ उनको पैसे नहीं देना चाहती थीं, उनका नाम सेवा पंजिका में सिर्फ इसलिए देना पड़ा क्योंकि हमतीनों नाबालिग थे। और पिता के नाम के नीचे हमतीनों के नाम भी लिखे हैं। एक महत्वपूर्ण प्रश्न ये है कि क्या मैं माध्यमिक शिक्षा परिषद, इलाहाबाद के खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकती हूं कि उन्होंने हमारा देय अभी तक नहीं दिया, मेरी माँ की मृत्यु के 4 साल बाद भी! यदि मेरी नौकरी न लगती तो हम तीनों बहनों की हालत दयनीय होती क्योंकि हमारे पिता ने कभी हम पर या माँ पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि हम लड़कियां थे। लेकिन मेरी माँ के सारे पैसे लेने के लिए वो प्रयास कर रहे हैं।

समाधान-

प की समस्या और आप के तर्क वाजिब हैं लेकिन संपत्ति आदि का जो भी निपटारा होना है वह कानून के अनुसार ही होना है। आप की माताजी की मृत्यु के समय तक उन का आप के पिता से तलाक नहीं हो सका था। इस कारण आप की माताजी के उत्तराधिकारियों में आप तीनों बहनों के साथ साथ आप के पिता भी शामिल हैं। उन की जो भी बकाया राशि विभाग, बीमा विभाग, जीवन बीमा, प्रावधायी निधि विभाग और बैंक आदि में मौजूद हैं उन्हें प्राप्त करने का अधिकार आप चारों को है। आप चारों प्रत्येक ¼ हिस्सा प्राप्त करने के अधिकारी हैं।

यदि आप की माताजी का पिता से विवाद चल रहा था तो उन्हें चाहिए था कि वे अपनी वसीयत लिख देतीं जिस में अपनी तमाम संपत्ति को आप तीनों बेटियों को वसीयत कर सकती थीं और आप के पिता को उत्तराधिकार से वंचित कर सकती थीं। लेकिन उन्हों ने ऐसा नहीं किया जिस के कारण आपके पिता भी उत्तराधिकार प्राप्त करने के अधिकारी हैं। उन्हें यह सब राशियाँ प्राप्त करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं हो सकता है लेकिन वे कानूनी रूप से अधिकारी हैं।

यदि कहीं या सभी स्थानों पर नामांकन आप के पिता का है तो वे यह सारी राशि प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि नोमिनी हमेशा एक ट्रस्टी होता है औऱ उस का कर्तव्य है कि वह राशि को प्राप्त कर के मृतक के सभी उत्तराधिकारियों में उन के अधिकार के हिसाब से वितरित करे। लेकिन अक्सर देखा गया है कि नोमिनी सारी राशि प्राप्त कर के उस पर कब्जा कर के बैठ जाता है और बाकी उत्तराधिकारियों को अपना हिस्सा प्राप्त करने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। इस कारण आप को चाहिए कि आप अपनी माताजी के विभाग, प्रावधायी निधि विभाग, कर्मचारी बीमा विभाग और जीवन बीमा व बैंक आदि को तीनों संयुक्त रूप से लिख कर दें कि नोमिनी होने पर भी आपके पिता को किसी राशि का भुगतान नहीं किया जाए क्यों कि ऐसा करने पर वे आप को आप के अधिकार से वंचित कर सकते हैं।

आप स्वयं अपनी माता जी के विभाग में जा कर संबंधित विद्यालय या जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय से पता कर सकती हैं कि आप की माताजी की कौन कौन सी राशियाँ विभाग के पास बकाया हैं। उन राशियों का मूल्यांकन भी आप पता सकती हैं। यदि समस्या आए तो आप सूचना के अधिकार का उपयोग कर के विभाग से ये सूचनाएं प्राप्त कर सकती हैं। जब आप को पता लग जाए कि कौन कौन सी राशिया विभाग और अन्यत्र बकाया हैं तो आप उन सब के लिए जिला न्यायालय में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर सकती हैं।  इस के साथ ही जिला न्यायालय में आवेदन कर के विभाग/ विभागों के विरुद्ध यह आदेश भी जारी करवा सकती हैं उत्तराधिकार प्रमाण पत्र बनने के पहले किसी को भी आप की माताजी की बकाया राशियों का भुगतान नहीं किया जाए।

इस मामले में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आप को स्थानीय वकील की मदद लेनी होगी। इस कारण बेहतर है कि किसी अच्छे स्थानीय वकील से सलाह करें और उस के मुताबिक यह काम करें।

आप तीनों अनुकम्पा नियुक्ति नहीं चाहती हैं, आप के पिता की अनापत्ति के बिना आप  में से किसी बहिन को अनुकम्पा नियुक्ति मिल भी नहीं सकती थी। आप की अनापत्ति के बिना आप के पिता को नहीं मिलेगी। वैसे भी वे अब नौकरी प्राप्त करने की उम्र के नहीं रहे होंगे।

समस्या-

शशि भूषण कुमार ने समस्तीपुर, झितकाही, बिहार वैशाली से समस्या भेजी है कि-

दो बच्चों की विधवा माँ से शादी कर लिया और उसके दोनों बच्चों को अपना लिया। पुनर्विवाह के बाद दो और बच्चा हुआ है। पूर्वजों ने किसी के नाम वसीयत ना की। इस संपत्ति का अधिकार सब बच्चो को बराबर मिलेगा या उस विधवा के पुनर्विवाह होने के बाद जन्में बच्चो को मिलेगा?

समाधान-

पूर्वजों से चली आई संपत्ति को सहदायिक संपत्ति कहा जाता है। इस संपत्ति में केवल पुरुष संतानों को ही अब तक अधिकार मिलता था। 2005 में हुए हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के बाद से इस संपत्ति में पुत्रियों को भी अधिकार मिलना आरंभ हुआ है। इस संपत्ति में से केवल पुरुष की औरस तथा गोद ली हुई संतानो को ही उत्तराधिकार प्राप्त हो सकता है अन्य किसी को नहीं।

विधवा के पूर्व विवाह से जन्मी संतानों को किसी प्रकार का कोई अधिकार अपनी माँ के नए पति की संपत्ति या उस के पूर्वजों की संपत्ति में प्राप्त नहीं होगा। विधवा के नए पति ने बच्चों को अपनाया है तो वह उन का लालन पालन कर सकता है। स्वअर्जित संपत्ति में से कुछ भी अपनी इच्छा से दे सकता है लेकिन बच्चों को उत्तराधिकार का कोई अधिकार माता के नए पति या पूर्वजों से चली आई सहदायिक संपत्ति में उत्पन्न नहीं होता है।

विधवा की मृत्यु के बाद जो भी संपत्ति वह छोड़ कर जाएगी उस संपत्ति में उस के पूर्व पति तथा पुनर्विवाह के बाद वर्तमान पति दोनों से जन्मी संतानों को समान रूप से उत्तराधिकार प्राप्त होगा।

समस्या-

विशाल कुमार ने मवई कलाँ, मलीहा बाद, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी समस्या यह है कि मेरे पापा ने दो शादियाँ की थी। उनकी पहली पत्नी के लडका पैदा हुआ, उसके बाद किसी बीमारी के कारण पहली पत्नी की मृत्यु हो गई उसके बाद मेरे पापा ने दूसरी शादी की जिनका पुत्र मै हूँ।  कुछ समय बाद मेरे पापा की भी मृत्यु हो गयी। उसके बाद मेरे पापा की सारी संपत्ति 1/3 हो गई जिसमें पहले पत्नी के लडके व मेरी माँ को एवम मुझे अधिकार प्राप्त हुआ था अब मेरी माता जी की भी मृत्यु हो गई है क्या मेरी माता जी की संपत्ति मुझे अकेले को प्राप्त होगी।

समाधान-

प की माता जी को जो संपत्ति आपके पिता से उत्तराधिकार में प्राप्त हुई वह उन की व्यक्तिगत संपत्ति हो चुकी थी। अब आप की माता जी के देहान्त के उपरान्त आप के माताजी का उत्तराधिकार हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा-15 व 16 से शासित होगा।

इन धाराओं के अनुसार सब से पहले स्त्री की संपत्ति उस के पुत्रों व पुत्रियों को प्राप्त होगी। इस तरह यदि आप के अपनी माता से कोई भाई व बहिन नहीं हैं तो फिर उनकी सारी संपत्ति आप को ही प्राप्त होगी। धारा 15 की उपधारा (2) (बी) में यह उपबंध है कि स्त्री को कोई संपत्ति यदि उस के पति या ससुर से प्राप्त हुई थी तो वह मृतका की संतानों को प्राप्त होगी। निश्चित रूप से आप का सौतेला भाई आप की माँ की संतान नहीं है। इस कारण उसे आप की माता से उत्तराधिकार के रूप में कुछ भी प्राप्त नहीं होगा।

सहदायिक संपत्ति में पुत्रियों/ स्त्रियों का अधिकार

September 21, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

मोहिनी देवी ने बांसवाडा, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

रदादा द्वारा खरीदी गयी कृषि भूमि है जो 1956 के पूर्व खरीदी गयी है, परदादा की मृत्यु 1956 के पूर्व हुई है, मृत्यु पश्चात दादा के नाम हो गयी, दादा की मृत्यु 1956 के बाद हुई है और मेरे पिता की मृत्यु 1993 में हुई है। कृपया मुझे ये बताये की उक्त भूमि में मेरे पिता की मृत्यु पश्चात पुत्रियों का अधिकार उक्त कृषि भूमि में है क्या? इस कृषि भूमि में मेरे पिता द्वारा कोई वसीयत नही बनायीं गयी है?

समाधान-

क्त कृषि भूमि में आप का तथा आपके पिता की अन्य पुत्रियों का अधिकार है।

17 जून 1956 को हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम प्रभावी हुआ था। इस अधिनियम की धारा-6 में यह व्यवस्था थी कि जो संपत्ति सहदायिक है उस का उत्तराधिकार सर्वाइवरशिप से अर्थात प्राचीन हिन्दू विधि के अनुसार ही होता रहेगा न कि हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार।  सहदायिक संपत्ति का अर्थ था जो संपत्ति किसी पुत्र को उस के पिता, दादा या परदादा से उत्तराधिकार में प्राप्त हो वह सहदायिक है और उस में उस  पुरुष सन्तानों और उन की पुरुष सन्तानों को जन्म से अधिकार प्राप्त हो जाता है।

आपके परदादा की स्वयं की खरीदी हुई कृषि भूमि 1956 के पूर्व उन की मृत्यु के कारण आप के दादा को उत्तराधिकार में प्राप्त हुई है। इस तरह यह संपत्ति सहदायिक हो गयी और हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम लागू होने के उपरान्त भी उस में आप के पिता और यदि उन का कोई भाई हुआ तो उस को जन्म से ही अधिकार प्राप्त होता रहा। किन्तु आप को व आप की अन्य बहनों को यह अधिकार जन्मसे प्राप्त नहीं हुआ।

इस तरह की सहदायिक संपत्ति में हिस्सा रखने वाले किसी पुरुष की मृत्यु होने पर उस के हिस्से का उत्तराधिकार सहदायिक संपत्ति के दाय के उत्तरजीविता (सर्वाइवरशिप) के नियम के अनुसार होता था। किन्तु इसी अधिनियम की धारा-6 में यह प्रावधान था कि ऐसे पुरुष की मृत्यु के समय अधिनियम की अनुसूची प्रथम में वर्णित कोई ऐसी स्त्री उत्तराधिकारी या ऐसी स्त्री के माध्यम से अपना उत्तराधिकार क्लेम करने वाला पुरुष उत्तराधिकारी हुआ तो उस के हिस्से का दाय उस पुरुष की वसीयत के द्वारा और वसीयत न होने पर अधिनियम के अनुसार होगा।

आपके पिता की मृत्यु 1993 में हुई तब आप और आप की बहने मौजूद थीं। इस कारण आप के दादा की छोड़ी हुई संपत्ति में जो हिस्सा आप के पिता को प्राप्त हुआ था वह पुश्तैनी होने पर भी उस का दाय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 8 के अनुसार हुआ और आप को तथा आप की बहनो को पिता की संपत्ति में उन की मृत्यु के उपरान्त हिस्सा प्राप्त हुआ।जब कि आप के भाई को उसी संपत्ति में जन्म से ही अधिकार प्राप्त था। उस को जितना अधिकार जन्म से प्राप्त हो चुका था। इस कारण आपके पिता की छोड़ी हुई अविभाजित संपत्ति में आप को आपके पिता की मृत्यु के दिन से ही उत्तराधिकार के कारण हिस्सा प्राप्त है। यदि आप का कोई भाई जीवित है  तो उसे भी उस संपत्ति में आप के ही समान अधिकार प्राप्त है। लेकिन आपके भाई की कोई पुत्री 2005 के पहले पैदा हो चुकी है तो उसे 2005 में धारा 6 में किए गए संशोधन के प्रभावी होने की तिथि से आप के भाई के जीवनकाल में ही अधिकार प्राप्त हो चुका है, और यदि भाई की कोई पुत्री 2005 के संशोधन के प्रभावी होने के बाद जन्मी है तो उसे जन्म से इस सहदायिक संपत्ति में अधिकार प्राप्त है।

समस्या-

संगीता ने प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं शादी शुदा हूँ और मेरी एक बहन है, वो भी शादी शुदा हैं। मेरे पिता जी सरकारी नौकरी पर कार्यरत थे। दोनों बेटियों की शादी कर देने पर उन्होंने हम दोनों बहनो को बिना बताये अपने सगे भतीजे के बेटे को पंजीकृत गोद ले लिया। उसे  अपनी सम्पति का मालिक बना दिया सेवा के दौरान उनका देहांत हो गया तो क्या हम दोनों बहनो गोद नामा कैंसल करवा सकती हैं और अनुकम्पा के आधार पर नौकरी किसे मिल सकती है? हम को या दत्तक पुत्र को और मेरी सहमति के बिना दत्तक पुत्र को नौकरी मिल सकती है?

समाधान-

आप कैसे कहती हैं कि दत्तक पुत्र को आप के पिता ने संपूर्ण संपत्ति का स्वामी बना दिया? क्या उन्हों ने कोई वसीयत की है। यदि कोई वसीयत नहीं की है तो जैसे एक पुत्र के होते हुए विवाहित पुत्रियों को जो अधिकार प्राप्त हैं वे सभी अधिकार आपको प्राप्त हैं। आप कृषि भूमि के अतिरिक्त तमाम संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार हैं और दत्तक पुत्र भी। आप तीनों  में से प्रत्येक पिता की छोड़ी हुई संपत्ति में एक तिहाई हिस्से की हकदार हैं। अनुकंपा के आधार पर उस आश्रित को नियुक्ति मिल सकती है जो शेष आश्रितों की अनापत्ति ले आए।  आप की आपत्ति करेंगी या अनापत्ति नहीं देंगी तो दत्तक पुत्र अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त नहीं कर सकेगा। गोदनामा आप तभी निरस्त करवा सकती हैं जब कि वह कानून के अनुसार न हो। इस के लिए आप गोदनामा की प्रति प्राप्त कर किसी स्थानीय वकील से सलाह कर सकती हैं और गोद के नियमों का उल्लंघन हुआ हो तो उसे निरस्त करने के लिए दीवानी वाद संस्थित कर सकती हैं।

विधवा और उस की पुत्री को विभाजन कराने का अधिकार है।

August 15, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

सौरव ताया ने रसीना, कैथल, हरियाणा से समस्या भेजी है कि-

20 दिन पहले मेरे भाई की मौत हो गई है और अब से 2 साल पहले मेरे पापा की मौत हो गई थी। मेरे भाई की शादी को 2 साल 6 माह हो गए है। क्या उसकी पत्नी और डेढ़ साल की बेटी का उनकी सम्पत्ति पर अधिकार है? जबकि उनके पास मेरे भाई के नाम सहित कोई भी दस्तावेज नहीं है और मेरे पिता के बाद उनकी सम्पति का बंटवारा नहीं हुआ। उन की संपत्ति अपने आप मेरी मां और हम 3 भाईयों के हिस्से में आ गई थी। भाभी हमारे घर रहना नहीं चाहती और ना ही अपनी बेटी को छोड़ रही है।

समाधान-

प के पिता के देहान्त के उपरान्त पिता की संपत्ति के चार हिस्सेदार हुए आप तीन भाई और माँ। इस संपत्ति में एक हिस्सा आप के मृत भाई का था। जेसै आप के पिता की संपत्ति आप चारों के नाम अपने आप आ गयी थी, उसी तरह आप के भाई के हिस्से की संपत्ति उस की पत्नी और बेटी के नाम आ चुकी हैं।

आप की भाभी आप के साथ नहीं रहना चाहती तो यह उन की मर्जी है उन्हें साथ रहने को बाध्य नहीं किया जा सकता। डेढ़ वर्ष की उन की बेटी उन की जिम्मेदारी है, वह उन के साथ ही रहेगी जब तक वह वयस्क हो कर उस का विवाह नहीं हो जाता।

आप की जिस संपत्ति में ¼ हिस्सा आप की भाभी व भतीजी का है वे उस हिस्से को प्राप्त करने की अधिकारी हैं। आप स्वैच्छा से दें तो ठीक अन्यथा आप की भाभी विभाजन का वाद संस्थित कर के भी अपना हिस्सा अलग प्राप्त कर सकती हैं।

पिता की संपत्ति पर उस के जीते जी संतान का कोई अधिकार नहीं।

August 11, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

सहज प्रीत सिंह ने लुधियाना, की समस्या भेजी है कि-

मेरा नाम सहज प्रीत सिंह है।  2006 में मेरा डाइवोर्स हो गया था। मेरा एक बेटा है जो अपनी माँ के पास है। मेरे पिता जी स. जसवीर सिंह सारी प्रॉपर्टी मेरे नाम करवाना चाहते हैं लेकिन उन्हे डर है कि कहीं मेरा बेटा जो मेरी पत्नी क पास है. प्रॉपर्टी पर अधिकार मांगने ना आ जाए. मेरे पिता जी ने डाइवोर्स सेटल्मेंट के समय लिखवाया था कि मेरे पोते का किसी चीज़ पर कोई हक नहीं और उस टाइम मेरी पत्नी ने 2 लाख रुपए मांगे थे जो दे दिए थे. लेकिन क्या मेरा बेटा मुझ से या मेरे पिता जी पर प्रॉपर्टी हक के लिए कोई क़ानूनी कार्रवाई कर सकता है? जो भी प्रॉपर्टी है मेरे पिता जी ने खुद बनवाई है. जो मेरे डाइवोर्स के बाद खरीदी थी. अभी 2/3 साल में. यह प्रॉपर्टी मेरे माता जी के नाम पर है लेकिन ये मेरे खुद के पैसे से खरीदी है लेकिन रजिस्टर्ड मेरे माता जी क नाम पर है.

समाधान-

सल में जिस संपत्ति के बारे में आप चिन्तित हैं वह आपकी माताजी के नाम है और वही उस की स्वामिनी हैं। मेरा एक सवाल ये है कि क्या आप कानूनी रूप से इस समय अपने पिताजी या माताजी की संपत्ति में हिस्सा मांग सकते हैं? नहीं न, तो फिर आप का बेटा आप के जीतेजी आप की संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं मांग सकता। उस का कोई भी हक पैदा होगा तो तब होगा जब आप नहीं रहेंगे और आप की संपत्ति के उत्तराधिकार का प्रश्न उठेगा। आप के जीवन काल में आप के पुत्र का आप की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है।

माताजी के नाम जो संपत्ति है उसे वे आप के नाम वसीयत कर सकती हैं। इस से उन के जीवनकाल के बाद आप उस के स्वामी हो जाएंगे। आप अपनी संपत्ति जिसे देना चाहेँ उसे वसीयत कर सकते हैं। आप दूसरा विवाह करें तो अपनी पत्नी और होने वाली संतानों के नाम या उन में से किसी एक के नाम वसीयत कर सकते हैं। इस से आप के शेष उत्तराधिकारी उन के उत्तराधिकार के हक से वंचित हो जाएंगे। आप के जीवन काल में आप की तलाकशुदा पत्नी से उत्पन्न पुत्र का कोई हक आप की संपत्ति पर नहीं है लेकिन यदि आप अपनी संपत्ति की कोई वसीयत नहीं करते तो जो भी निर्वसीयती संपत्ति आप के जीवनकाल के उपरान्त शेष रहेगी उस में आप की पहली पत्नी से उत्पन्न पुत्र का भी अधिकार रहेगा।

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