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नामान्तरण स्वत्व का निर्धारण नहीं है, मांग पर हिस्सा देना होगा।

समस्या-

अशोक अग्रवाल ने हरदा, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

म तीन भाई और एक बहन है, बहन का विवाह हो चूका हे एक भाई की कोई सन्तान नहीं है इसलिए सभी ने पिता की म्रत्यु 1990 में हो जाने के बाद आपसी सहमति से मौखिक रूप से आपसी बटवारा कर मकान दो भाइयो के नाम पंचायत अभिलेख में नामांतरण दर्ज करवा लिया। मकान जीर्ण होने से हम दो भाइयों द्वारा मकान का मरम्मत कार्य करवा लिया एवम् उसे ठीक करवा लिया। आज 20 साल बाद हमारी बहन से आपसी झगड़ा होने से उस नामान्तरण को गलत ठहरा कर हिस्सा मांग रही है, जबकि मकान 20×70 में दो भागो में बना हे जिसमे 10×70 में अलग अलग भाइयो का निवास है। मकान इस तरह बना हुआ है कि किसी तरह हिस्से नहीं हो सकते। क्या कोर्ट दखल देकर हिस्से किस प्रकार दिला सकती है? क्या बहन का हिस्सा मांगना जायज है हमारे द्वारा मकान में किया गया निर्माण में कुछ छूट मिलेगी? सिविल कोर्ट में कितना समय लगेगा? कृपया समस्या का उचित समाधान बताएँ।

समाधान-

प की बहन का हिस्सा मांगना पूरी तरह जायज है। नामांतरण किसी भी संपत्ति के स्वत्व को निर्धारित नहीं करता। पिता की मृत्यु के साथ ही उन के उत्तराधिकारियों का अधिकार उन की संपत्ति में बन गया। कोई भी अपना हिस्सा केवल रिलीज डीड के माध्यम से ही छोड़ सकता है या फिर अन्य विधि से हस्तान्तरित कर सकता है जिस का उप पंजीयक के कार्यालय में पंजीयन आवश्यक है। आप की बहन का हिस्सा उस संपत्ति में अभी भी विद्यमान है।

यदि न्यायालय समझती है कि भौतिक रूप से संपत्ति को विभाजित किया जाना संभव नहीं है तो भी पहले वह इस मामले में प्राथमिक डिक्री पारित करेगी जिस में हिस्से निर्धारित होंगे। उस के बाद यदि आपस में रजामंदी से हिस्से बांट नहीं लिए जाते अथवा खरीद नहीं लिए जाते हैं तो न्यायालय संपत्ति को विक्रय कर के सभी को हिस्से देने का निर्णय दे सकता है। आप दोनों भाई चाहें तो बहिन का हिस्सा मिल कर खरीद सकते हैं।

आप ने यदि पिता की मृत्यु के उपरान्त निर्माण किया है तो उस का सबूत देने पर न्यायालय उस खर्चे को बंटवारे से अलग रख कर निर्णय कर सकती है, खर्च के अनुरूप बंटवारे में आप का हिस्सा बढ़ा सकती है। मुकदमे मे कितना समय लगेगा इस का उत्तर तो खुद विधाता भी यदि कोई हों तो नहीं दे सकते। यह आप के यहाँ की अदालत में काम के आधिक्य पर निर्भर करेगा।

हिस्सेदार हिस्सा नहीं लेना चाहते तो उन से अपने नाम रिलीज डीड निष्पादित कराएँ।

rp_kisan-land.jpgसमस्या-

धर्मेश पटेल ने वलसाड, गुजरात से पूछा है-

मेरी मम्मी के पिताजी के मामाजी की जमीन है। मम्मी के पिताजी और उन के मामाजी दोनों का देहान्त हो चुका है। उन के खानदान में कोई नहीं बचा है। मेरी मम्मी की पाँच बहनें और हैं, पर वे खाते पीते घर से हैं, उन को जमीन नहीं चाहिए। क्या ये जमीन मेरी माँ के नाम हो सकती है?

 

समाधान-

स जमीन का अन्य कोई उत्तराधिकारी न होने से आप की माँ और उन की बहनें ही उत्तराधिकारी हैं, इस कारण सबूत प्रस्तुत करने पर उक्त जमीन का नामान्तरण आप की माँ और उन की बहनों के नाम खोला जाना चाहिए।

यदि आप की माँ की बहनेँ उक्त जमीन में किसी तरह का कोई हिस्सा नहीं चाहती हैं तो उन सब का हिस्सा वे रिलीज डीड आप की माँ के नाम निष्पादित कर सकती हैं और इस रिलीज डीड के पंजीकृत हो जाने पर इस के आधार पर पूरी जमीन आप की माँ के नाम नामान्तरित हो सकती है। यदि रिलीज डीड होने के पहले ही आप की माँ और उन की बहनों के नाम संयुक्त नामान्तरण खुल जाए तो भी बाद में रिलीज डीड प्रस्तुत करने पर उस के आधार पर उस बहिन का हिस्सा जिस ने रिलीज डीड निष्पादित की है आप की माँ के नाम हस्तान्तरित होने का नामान्तरण अलग से खुलवाया जा सकता है।

पिता के सभी उत्तराधिकारी माँ के नाम रिलीज डीड कराएँ।

Release Deedसमस्या-

राघवेन्द्र दीक्षित ने शान्ति नगर, गियासपुरा, लुधियाना, पंजाब से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता जी ने 1993 में 200 गज का प्लाट ख़रीदा था जिस में से 50 गज 2003 में चाचा जी के नाम कर दिया था जिसे 2005 में चाचा जी से झगड़े के कारन पिता जी ने चाचा जी से प्लाट खरीद कर माता जी के नाम कर दिया। अब 200 गज में से 150 गज पिता जी के नाम और 50 गज माता जी के नाम हो गया जिनकी (150 व 50 गज वाली) रजिस्ट्री हमारे पास है। 2006 में मेरे पिता जी की दिमागी हालत ख़राब हो जाने के कारन वो घर से कहीं चले गए और अभी तक नहीं आये। मेरी माता जी ने 2006 में पुलिस थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई थी जिसकी कापी हमारे पास है। मै आप से जानना चाहता हूँ कि 1- बाकी बचे 150 गज प्लाट जो पिता जी के नाम है वो मैं माता जी के नाम कराना चाहता हूँ इसके लिए मुझे क्या करना होगा? 2- हम दो भाई हैं तो क्या ये जरूरी है 150 गज जमीन हम तीनों के नाम होगी या सिर्फ माता जी के नाम करा सकता हूँ 3- इस के लिए कौन से दस्तावेजो की जरूरत होगी।

समाधान

प के पिताजी 2006 में लापता हुए। तब उक्त प्लाट का 150 गज पिताजी के नाम तथा 50 गज आप की माताजी के नाम था जिस के दस्तावेज आप के पास हैं। लापता होने की तिथि से अर्थात जिस दिन प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गयी है उस दिन से 7 वर्ष पूर्ण होने पर 2013 मैं यह अवधारणा ली जा सकती है कि उन का देहान्त हो चुका है। इस तरह उन के हिस्से का प्लाट का 150 गज प्लाट का हिस्सा उन के उत्तराधिकारियों को उत्तराधिकार में प्राप्त हो गया है। अर्थात यदि आप के कोई बहिन नहीं है तो आप दोनों भाई और माताजी के नाम हो चुका है। यदि कोई बहिन है तो उस में बहिन का भी हिस्सा है।

भूखंड का 50 गज तो माताजी के नाम है ही। यदि आप पूरा भूखंड माताजी के नाम कराना चाहते हैं तो भूखंड के शेष हिस्सेदार अर्थात आप, आप का भाई और कोई बहन/ बहनें हों तो वे सभी मिल कर अपने हिस्से की एक रिलीज डीड अपनी माताजी के नाम निष्पादित करवा कर उप पंजीयक के कार्यालय में निष्पादित करवा दें। इस से आप सभी भाई बहनों के हिस्से माताजी को प्राप्त हो जाएंगे और माताजी उक्त संपूर्ण प्लाट की स्वामिनी हो जाएंगी।

पत्नी से बचाने के जुगाड़ में आप अपनी सम्पत्ति को खो न बैठें।

rp_property.jpgसमस्या-

शैल ने अहमदाबाद, गुजरात से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी 65 वर्ष के हैं, उन्हों ने अपनी कमाई से दो घर बनाए थे जो मेरी मम्मी के नाम हैं। अभी 15 दिन पहले मेरी मम्मी का हार्ट अटैक से देहान्त हो गया है। मैं ने अपनी पत्नी के विरुद्ध 2013 में विवाह विच्छेद का मुकदमा डाला हुआ है जो अभी लंबित है। क्या मेरी पत्नी उन दो मकानों में कोई हिस्सा मांग सकती है। क्या हम दो भाई और बहन उन दो मकानों को अपने पिता के नाम कर सकते हैं जिस से मेरी पत्नी उन में से हिस्सा न मांग सके?

समाधान

प की माता जी के के देहान्त के बाद उत्तराधिकार के अनुसार उन के नाम के दो मकानों पर आप दोनों भाई, बहन और पिताजी का स्वामित्व स्थापित हो चुका है। अब उक्त मकानों में आप चारों का एक एक हिस्सा है अर्थात आप का हिस्सा एक चौथाई है। आप दोनों भाई और बहन चाहें तो एक रिलीज डीड निष्पादित कर अपने हिस्से पिताजी के नाम रिलीज कर सकते हैं। इस से संपूर्ण संपत्ति आप के पिताजी के स्वामित्व की हो जाएगी। आप के पिताजी के जीवनकाल के उपरान्त उक्त संपत्ति आप को उत्तराधिकार में प्राप्त होगी। तब तीनों का व्यक्तिगत हिस्सा एक तिहाई के बराबर होगा।

र्तमान में जो कानून है उस के अनुसार विवाह विच्छेद के समय पत्नी अपने लिए स्थाई भरण पोषण के लिए एक मुश्त राशि निर्धारित करवा सकती है या वह चाहे तो जब तक दूसरा विवाह न करे तब तक निरन्तर भरण पोषण प्राप्त करती रह सकती है। इन दोनों का निर्धारण पत्नी और पति की आर्थिक सामाजिक हैसियत के अनुसार हो सकता है। यह हैसियत आप की निरन्तर आय और संपत्ति को देख कर निर्धारित की जा सकती है। लेकिन पत्नी को पति की संपत्ति में हिस्सा मांगने का कोई अधिकार नहीं है। हाँ यह प्रस्तावित कानून जरूर है, जो कब संसद पारित करेगी और कब अस्तित्व में आएगा कहा नहीं जा सकता।

ह आप को स्वयं निर्धारण करना होगा कि आप अपना ¼ हिस्सा पिता के नाम या किसी अन्य सह स्वामी अर्थात आप के भाई या बहिन के नाम हस्तान्तरित करना चाहते हैं या नहीं। यदि केवल आप अपना हिस्सा पिता के नाम हस्तान्तरित करेंगे तो उन के देहान्त के समय पिताजी के पास चार में से दो हिस्से अर्थात आधी संपत्ति होगी। आपको अपने पिता से इस आधी संपत्ति का एक तिहाई अर्थात कुल का 1-6 हिस्सा प्राप्त होगा और भाई बहनों को भी। उन के पास का एक चौथाई पहले का मिला कर 5/12 प्रत्येक के पास हो जाएगा।

प यह सब हिसाब ठीक से लगा लें और फिर निर्णय करें कि आप को क्या करना है। कहीं ऐसा न हो कि आप को जो ¼ हिस्सा अभी मिला है आप उसे पत्नी से बचाने का उपाय करने की जुगाड़ में उस से भी वंचित हो जाएँ।

उत्तराधिकार में प्राप्त मकान के पंजीयन की कोई आवश्यकता नहीं है।

house lockedसमस्या-

अंकित ने इन्दौर, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

म जिस मकान में रहते है वो मेरे दादाजी ने सन १९५८ में ख़रीदा था। मेरे दादाजी के चार बेटे हैं। दादाजी की वसीयत के मुताबिक उस मकान के चार हिस्से हुए जो कि चारों बेटो में बांट दिए जिस में से एक हिस्सा मेरे पिताजी को भी मिला और उस हिस्से में हम रहते हैं। बाकि तीनो भाई अपने-अपने हिस्से में उस मकान में कभी नहीं रहे। मेरे पिताजी का देहांत हो चुका है और अब मैं उस हिस्से को जो की मेरे पिताजी को मिला था उसे अपने नाम पर रजिस्टर्ड कराना चाहता हूँ। दादाजी और दादीजी का भी देहांत हो चुका है कृपया सुझाव दीजिये।

समाधान-

प के दादा जी ने मकान खरीदा था। उस का विक्रय पत्र आप के पास होगा। यदि नहीं है तो उस की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त की जा सकती है। वसीयत से उस का एक हिस्सा आप के पिताजी को प्राप्त हुआ है। वसीयत आप के पास होगी अन्यथा उस की प्रमाणित प्रति अपने पास रखिए। पिताजी की मृत्यु के उपरान्त मकान का पिताजी का हिस्सा उन के सभी उत्तराधिकारियों के हिस्से में आ चुका है। अर्थात आप की माताजी और भाई बहन यदि कोई हों तो उनका हिस्सा भी उस में है। यदि कोई नहीं है तो मकान का हिस्सा स्वतः ही आप के नाम है। यदि मकान इन्दौर में है तो आप नगर निगम में आवेदन दे कर उस हिस्से को अपने नाम करवा सकते हैं। इस तरह मकान आप को उत्तराधिकार में मिला है उस के लिए किसी प्रकार के रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है।

दि आप की माताजी, भाई बहन भी हैं तो उन का हिस्सा भी मकान में आप के पिता वाले हिस्से में हिस्सा है। यदि आप के अतिरिक्त मकान के उस हिस्से के हिस्सेदार अपने हिस्से को को आप के नाम रिलीज करते हुए रिलीज डीड पंजीकृत करवा दें तो मकान के आप के पिता वाले हिस्से के आप एक मात्र स्वामी हो जाएंगे। उक्त सब दस्तावेजों के आधार पर आप इन्दौर नगर निगम में मकान के उक्त हिस्से का नामान्तरण करवा सकते हैं।

संयुक्त संपत्ति में हिस्से की वसीयत की जा सकती है।

हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियमसमस्या-

राजेश कुमार ने कटिहार, बिहार से समस्या भेजी है कि-

मेरी माँ के नाम से दो घर व खेती की जमीन है। यह मेरे पिता जी ने अपनी कमाई से खरीदा है। मेरी माँ का देहान्त 15 फरवरी को हो गया है। मेरी चार बहनें विवाहित हैं, बड़े भाई और मैं भी विवाहित हूँ। मेरे पापा की भी उम्र हो चुकी है। पर भैया हमेशा पैसा बरबाद करते रहते हैं क्यों कि उन्हें शराब और जुआ की गन्दी लत है। पापा अब चाहते है कि जमीन की वसीयत मेरे नाम हो जाए जिस से बड़े भाई बेच नहीं सकें।

समाधान-

हुत देर हो चुकी है। संपत्ति आप की माता जी के नाम से है। इस कारण उन की मृत्यु के साथ ही उस का उत्तराधिकार तय हो चुका है। आप के पिता जी, चार बहनें और दो भाई कुल 7 उत्तराधिकारी हैं। अब समूची संपत्ति में इन सभी के 1/7 हिस्से हैं। हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा-30 के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति किसी संयुूक्त, पुश्तैनी या सहदायिक संपत्ति में अपने हिस्से की वसीयत सकता है। आप के पिता जी यदि वसीयत करते हैं तो वह वसीयत केवल उन के 1/7वें हिस्से पर प्रभावी होगी। यदि वे वसीयत से अपना हिस्सा आप के नाम कर दें और आप की बहनें अपना हिस्सा रिलीज डीड निष्पादित कर उन का हिस्सा आप के नाम रिलीज कर दें तो आप के पास संपत्ति का 6/7वाँ हिस्सा हो जाएगा। आप के भाई के पास केवल उस का 1/7वाँ हिस्सा रह जाएगा। आप चाहें तो यह व्यवस्था कर सकते हैं। जो बेहतरीन तरीका है।

दि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी या बेटी के नाम से संपत्ति खरीदता है तो यह माना जाता है कि वह संपत्ति उस के हित के लिए खरीदी गयी है। यदि यह साबित कर दिया जाए कि यह संपत्ति आप के पिता ने पत्नी के हित के लिए खरीदी थी और उस का देहान्त हो चुका है जिस के कारण वह संपत्ति उन की स्वयं की हो गयी है तो वे समूची संपत्ति की वसीयत कर सकते हैं। पर इस वसीयत को आप के भाई द्वारा न्यायालय के समक्ष चुनौती दी जा सकती है। इस से मुकदमे बाजी बढ़ेगी और व्यर्थ समय जाया होगा। फिर यह मुकदमा भी जटिल होगा उस में यह साबित करना होगा कि संपत्ति पिता ने अपनी निजि आय से पत्नी के हित के लिए खरीदी थी और पत्नी की मृत्यु से वे उस के असल स्वामी हो गए हैं। इस तरह के मामले कम देखने में आए हैं और अभी तक इस तरह के मामलों में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय की नजीरें भी देखने को नहीं मिली हैं। इस कारण हमारी राय में आप के लिए पहला वाला उपाय ही ठीक है। पिता अपने हिस्से की वसीयत आपके नाम कर दें और बहनें सम्पति को आप के नाम रिलीज कर दें।

अन्य हिस्सेदारों के हिस्से रिलीज कराएँ या खरीद कर अपने नाम कराएँ।

lawसमस्या-

रंजन कुमार ने बरौनी, बिहार से पूछा है-

मेरे दादा जी के 6 लड़के एवं 2 लड़कियाँ हैं। 2 लड़कों (मेरे पिताजी और 1 चाचाजी) की मौत हो चुकी है। दादीजी अभी जिंदा हैं। संपत्ति का बँटवारा अभी तक नहीं हुआ है। मेरे नौकरी करने और विवाह होने पर दादाजी ने अपने नाम की ज़मीन पर, जो उन्हे उनके चाचाजी से गिफ्ट मिला था, मेरे लिए घर बनवा दिया। जिस के लिए पैसा मैं ने दिया था। दादाजी मेरे नाम से कोई कागज तैयार नहीं करवाया। घर के बने हुए 7 साल और दादाजी के मरे हुए 5 साल से अधिक हो गये हैं। घर मेरे कब्ज़े में है। यद्यपि मैं नौकरी के कारण घर से बाहर बंगाल में रहता हूँ। मैं उस ज़मीन का मालिकाना हक़ पाना चाहता हूँ तथा सरकार के करों का उचित भुगतान करना चाहता हूँ। इस के लिए मुझे क्या करना चाहिए?

समाधान-

संपत्ति दादाजी को गिफ्ट में प्राप्त हुई थी और उस पर उन का व्यक्तिगत स्वामित्व था। उस पर उन्हों ने आप से मकान बनवाने के लिए कहा और आप ने बना लिया। हो सकता है कि आप के पास इस बात के सबूत हों कि मकान आप ने बनवाया है। लेकिन उन के देहान्त के उपरान्त उस गिफ्ट में मिली जमीन के उत्तराधिकारी तो सभी छह लड़के और दो लड़कियाँ हैं। छह लड़कों में से जिन दो का देहान्त हो चुका है उन के हिस्से पर उन की पत्नियों और संन्तानों का उत्तराधिकार है। इस तरह उक्त भूखंड अविभाजित हिन्दू परिवार की संपत्ति है।

स संपत्ति के आप के नाम होने का एक ही तरीका है कि अविभाजित परिवार के शेष सदस्य आप के नाम उक्त मकान में अपने हकत्याग की डीड निष्पादित कर पंजीकृत करवा दें। आप को इस के लिए सभी को मना कर यह काम करवाना होगा। जब तक यह काम न हो तब तक आप कब्जा बनाए रखें। आप सभी अन्य हिस्सेदारों को उस जमीन में उन के हिस्से की कीमत आँक कर उस का भुगतान कर उन का हिस्सा खरीद भी सकते हैं। यदि ऐसा करते हैं तो आप को हिस्सा खरीद के विलेख का पंजीयन करवाना चाहिए।

शेष उत्तराधिकारी माँ के नाम अपने हिस्से की रिलीज डीड निष्पादित कर दें।

real5समस्या-
राघवेन्द्र दीक्षित ने लुधियाना पंजाब से पूछा है-

मेरे पिता जी ने 18-19 साल पहले 200 गज़ ज़मीन खरीदी थी जिस में से बाद में 50 गज़ ज़मीन मेरी माता जी के नाम पर कर दी। लेकिन 7 साल पहले 2006 दिसम्बर में पिता जी की दिमागी हालत खराब होने की वजह से वे घर से चले गये और अभी तक वापिस नहीं आए। हम ने पोलीस स्टेशन मे उन के गायब होने की रिपोर्ट भी दर्ज करवा दी थी। पुलिस ने एक सादे कागज पर गायब होने की रिपोर्ट लिख कर हमें प्राप्ति रसीद दे दी थी और हमने अपनी तरफ से भी बहुत ढूंढने की कोशिश की पर उन का कहीं पता नहीं चला। उन की जो 150 गज़ ज़मीन लुधियाना में है वह मैं माता जी के नाम करना चाहता हूँ। इस क़ानूनी प्रक्रिया में मुझे कौन से दस्तावेज़ो की ज़रूरत पड़ेगी और हम इसे किस तरह से करवा सकते हैं। जब पिता जी ने ज़मीन ली थी तो किसी को भी नॉमिनी नहीं बनाया था और बाद में भी नही बनाया था।

समाधान-

प के पिता जी के नाम जो जमीन है वह केवल आप के पिता ही आप की माता जी के नाम करवा सकते थे। अब आप के पिता जी को लापता हुए 7 वर्ष हो चुके हैं। इस कारण से यह अनुमान किया जा सकता है कि वे अब जीवित नहीं हैं। आप पुलिस को जो सूचना दी थी उस की प्राप्ति रसीद की प्रति के साथ तथा आप के व माता जी के शपथ पत्र के साथ उन के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर दीजिए। आम तौर पर इस तरह मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिया जाता है। यदि मृत्यु प्रमाण पत्र बन जाता है तो उस के आधार पर पिता जी की संपत्ति उत्तराधिकार में आप को, आप की माता जी को तथा आप के भाई-बहनों को स्वतः ही प्राप्त हो जाएगी। यदि जन्म मृत्यु पंजीयक मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए दीवानी अदालत की डिक्री चाहेगा तो फिर आप को पिता जी को मृत घोषित करवाने के लिए दीवानी न्यायालय में घोषणा का वाद संस्थित कर के डिक्री प्राप्त करनी होगी।

 एक बार मृत्यु प्रमाण पत्र बन जाने के बाद आप और यदि आप के भाई बहिन भी हों तो वे सब मिल कर अपनी माता जी के नाम उक्त जमीन के अपने हिस्से को रिलीज करते हुए रिलीज डीड निष्पादित कर उप पंजीयक के यहाँ पंजीकृत करवा लें। इस तरह वह भूखंड आप की माता जी के नाम हो जाएगा।

उत्तराधिकारी अन्य हिस्सेदार के पक्ष में अपने हिस्से के त्याग के लिए हक-त्याग विलेख निष्पादित करे।

Release Deedसमस्या-
चौमहला, राजस्थान से दिनेश जैन ने पूछा है-

मेरी माताजी का निधन 15 अगस्त 2012 को अचानक हो गया उनकी कोई वसीयत नहीं है। हम 2 भाई हैं व 3 बहनें हैं तथा पिताजी भी हैं| माताजी की 2 दुकानें हैं |  हम दोनों भाई साथ रहते हैं। हम दोनों चाहते हैं कि माताजी की सम्पति हमारे नाम हो जाए। इस में बहनों, पिताजी या किसी अन्य को कोई एतराज नहीं है| ये सम्पति हमारे नाम कैसे हो सकती है?

समाधान-

दोनों दुकानें माता जी की संपत्ति थीं। माता जी ने उक्त दुकानों के सम्बन्ध में कोई वसीयत नहीं की थी। इस तरह माता जी के देहान्त के साथ ही उक्त संपत्ति हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15 (1) (क) के अनुसार उन के प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारियों अर्थात आप दोनों भाइयों, तीनों बहिनों व पिताजी की संयुक्त संपत्ति हो चुकी है तथा आप में से प्रत्येक 1/6 हिस्से का अधिकारी है।

ब जिस संपत्ति में जो व्यक्ति अपना हिस्सा छोड़ना चाहे तथा जिस के हक में छोड़ना चाहे एक हक-त्याग विलेख (Release Deed) उपपंजीयक के यहाँ पंजीकृत करवा कर छोड़ सकता है।

दि दोनों दुकानें दोनों भाइयों के नाम करवानी हैं और किसी को कोई आपत्ति नहीं है तो आप की तीनों बहिनों व पिता जी को आप दोनों भाइयों के नाम से हक-त्याग विलेख (Release Deed) निष्पादित करवानी होगी। इस से दोनों दुकानों पर दोनों भाइयों का सम्मिलित स्वामित्व स्थापित हो जाएगा।

लेकिन यदि आप चाहते हैं कि एक दुकान आप के व दूसरी आप के भाई के नाम हो जाए तो जिस दुकान को आप रखना चाहते हैं उस में आप की तीनों बहिनें, पिताजी और आप के भाई को हक-त्याग विलेख (Release Deed) निष्पादित कर आप के हक में अपना अपना हिस्सा का हक-त्याग करना होगा। इस से आप को उस दुकान पर एकल स्वामित्व का हक प्राप्त हो जाएगा।  इसी तरह जिस दुकान को आप का भाई रखना चाहता है उस दुकान में  तीनों बहिनें, पिताजी और आप को अपना-अपना हिस्सा भाई के हक में त्याग करने के लिए हक-त्याग विलेख (Release Deed) निष्पादित कराने से आप के भाई का एकल स्वामित्व उस दुकान पर प्राप्त हो जाएगा।

हक-त्याग केवल पंजीकृत हक-त्याग विलेख से ही मान्य . . .

Release Deed
समस्या-
शाजापुर, मध्य प्रदेश से नवीन चंद्र कुम्भकार ने पूछा है –

क्या पैतृक संपत्ति में महिलाएँ अपना हक अन्य उत्तराधिकारियों के पक्ष में तहसीलदार के न्यायालय में केवल बयान के आधार पर त्याग सकती हैं? जब कि मृत्यु  के उपरान्त नामांतरण के लिए वाद वैध उत्तराधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किया गया है।

समाधान-

किसी भी संपत्ति में यदि किसी स्त्री या पुरुष को स्वामित्व का या खातेदारी का अधिकार प्राप्त है तो यह अधिकार त्यागना एक तरह से संपत्ति का हस्तान्तरण है जो केवल हकत्याग विलेख (रिलीज डीड) को उप पंजीयक के कार्यालय में पंजीकृत करवा कर ही त्यागा जा सकता है। इस के अतिरिक्त किसी भी प्रकार से नहीं। संविधान और कानून के समक्ष स्त्रियाँ और पुरुष दोनों समान हैं। अक्सर तहसीलदार ही उस इलाके का उप पंजीयक भी होता है। लेकिन वह किसी के बयान के आधार पर हकत्याग को स्वीकार नहीं कर सकता। उस के लिए अलग से हकत्याग विलेख लिखा जाएगा, निर्धारित स्टाम्प ड्यूटी भी देनी होगी और पंजीकरण शुल्क भी देना होगा और उसे पंजीकृत भी किया जाएगा।

कत्याग विलेख आवश्यक रूप से पंजीकरणीय प्रलेख है। यदि किसी भी कार्यवाही में यह कहा जाता है कि किसी ने किसी के हक में या शेष स्वामियों के हक में हक त्याग कर दिया है तो हकत्याग का पंजीकृत विलेख ही उस का प्रमाण होगा। अपंजीकृत प्रमाण को कोई भी न्यायालय साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता। यदि नामांतरण के लिए आवेदन किया गया है तो यह भी एक न्यायिक कार्यवाही है तथा हक त्याग का आधार केवल हकत्याग विलेख ही हो सकता है।

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