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कृषि भूमि के अतिरिक्त स्थाई संपत्ति के लिए बंटवारे का वाद प्रस्तुत कर सकती हैं।

समस्या-

अनुराधा ने रायबरेली, उत्तर प्रदेश से उत्तर प्रदेश राज्य की समस्या भेजी है कि-


मेरे पिता जी ने कोई भी संपत्ति खुद नही बनायी उनके पास जो भी कृषिभूमि व मकान हैं वह उन्होने क्रमश अपने पिता व चाचा से प्राप्त किया हैं , पिता जी का देहान्त जनवरी 2017 मे हुआ था,मेरा विवाह 1994 व छोटी बहन का विवाह 2007 मे हुआ था, कृषिभूमि आजादी से पहले से दादा के पास थी व एक मकान 19949-50 व दूसरा 1965-67 के आसपास पिता के चाचा ने बनवाया था क्या दावा कायम करने पर मुझे व मेरे बहन को हिस्सा मिलेगा.


समाधान-

प के अनुसार आप के पिताजी के पास जो भी खेती की जमीन व मकान आदि हैं वे पुश्तैनी संपत्ति थी। लेकिन पिता से प्राप्त संपत्ति तो पुश्तैनी /सहदायिक हो सकती है चाचा से प्राप्त संपत्ति सहदायिक है या नहीं वह तो संपत्ति के स्वामित्व के इतिहास से ही पता लग सकता है। आप ने यह भी नहीं बताया कि अन्य उत्तराधिकारी कौन कौन हैं?

बहरहाल कृषि भूमि के बारे में उत्तर प्रदेश में स्थिति यह है कि विवाहित पुत्रियों को उत्तराधिकार का अधिकार प्राप्त नहीं है। इस कारण उस मामले में आप का दावा चल नहीं सकेगा। जहाँ तक मकान का प्रश्न है उस में आप का अधिकार है चाहे वह मकान पुश्तैनी हो या न हो। आप मकान के लिए बंटवारे और अपने हिस्से पर अलग कब्जे का दावा कर सकती हैं। कृषि भूंमि के मामले में यदि आप किसी स्थानीय वकील से सलाह प्राप्त करें तो बेहतर होगा।

स्त्री के नाम की संपत्ति उस की व्यक्तिगत है उस में किसी का कोई हिस्सा नहीं।

rp_courtroom4.jpgसमस्या-

सर्वेश गुप्ता ने रोहता रोड़, थाना कांकेर खेड़ा, मेरठ, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

मैं एक विधवा हूँ, मेरे पति का देहान्त हुए तीन वर्ष हो चुके हैं। मेरी चार बेटियाँ और 2 बेटे हैं। सभी बेटी की शादी हो चुकी है और एक बेटा विवाहित है जिसकी उमर 34 साल है और दूसरा नाबालिग जिसकी उमर 15 साल है। मेरी समस्या ये है कि मेरा बेटा और बहू मेरे मकान पर अपना कब्जा करना चाहते हैं। हम साथ ही रह रहे थे किन्तु अब उन्हें मेरे लड़के और मुझे रखने में समस्या है। वो मेरे छोटे बेटे पर झूठा मुकदमा चलवा कर उसे जेल भिजवाना चाहते हैं और मुझे घर से बाहर करना चाहते हैं। मकान में अपना आधा हिस्सा मांग रहे हैं। हमारी कमाई का कोई साधन नहीं है। मकान मेरे नाम है। क्या मेरी बहू (बड़े बेटे का मकान में हिस्सा है? क्या मैं उसे बेदखल कर सकती हूँ। अब जब उसने कब्जा कर रखा है तो क्या मैं इस मकान के सात हिस्से कर के बेच सकती हूँ। अगर बड़ा बेटा इस पर राजी नहीं होता और घर खाली नहीं करता है तो मैं मकान बेचने की हकदार हूँ? हम मकान बेचकर उसका 7वां हिस्सा देने को तैयार हैं। पर /2 हिस्सा माँग रहा है। उसके खिलाफ किस धारा के अंतगत केस कर सकती हूँ। मेरी 4 बेटी मेरी ही साइड हैं। मैं और मेरी बेटियाँ मकान बेचने को तैयार हैं क्या मे मकान बेच सकती हूँ।

समाधान-

दि यह मकान आप के नाम है तो यह आप की निजि संपत्ति है इस में किसी का कोई अधिकार नहीं हैं। आप को यह मकान स्वयं विक्रय करने, वसीयत करने, दान आदि करने का पूरा अधिकार है। आप जब चाहें यह मकान बेच सकती हैं।

आप की मूल समस्या यह है कि आप का बड़ा पुत्र और बहू इसी मकान में रह रहे हैं और एक हिस्से पर उन का कब्जा है। इस कारण कोई भी खरीददार मकान को खरीदने में हिचकेगा और मकान की कीमत कम देगा क्यों कि उसे मकान खरीदने के उपरान्त जिस हिस्से पर आप के बड़े बेटे का कब्जा है उसे भी खाली कराना पड़ सकता है।

आप को सब से पहले तो यह करना चाहिए कि सब से बेटियों और बेटों से कहना चाहिए कि मकान मेरे नाम है मेरी इच्छा होगी वैसे करूंगी, यदि ठीक से न रहे तो इस मकान को दान कर के हरिद्वार चली जाउंगी।

आप का बेटा आप की अनुमति से उस मकान में निवास कर रहा है इस का अर्थ यह है कि उस की हैसियत एक लायसेंसी की जैसी है। आप उसे नोटिस दे कर लायसेंस खत्म करें और फिर बेदखली का दावा करें। इस दावे के साथ ही इस आशय की अस्थाई निषेधाज्ञा भी प्राप्त करें कि वह जिस हिस्से में रहता है उस हिस्से के अतिरिक्त हिस्से का उपयोग न करे और अन्य हिस्से का उपयोग करने से आप को व आप के अन्य पुत्र पुत्रियों को न रोके। यदि बेटा और बहू कुछ गलत करते हैं तो आप घरेलू हिंसा अधिनियम के अन्तर्गत भी शिकायत पुलिस को कर सकती हैं।

यदि आप को कोई ऐसा खरीददार मिल जाता है जो कि आप के बड़े बेटे के रहते हुए मकान खरीदने को तैयार हो तो आप मकान बेच सकती हैं। जो धन प्राप्त हो उस का अपने हिसाब से उपयोग कर सकती हैं।

विक्रय के अनुबंध का पंजीयन अनिवार्य नहीं है।

agreementसमस्या-

नितिन ने उत्तर प्रदेश गाजियाबाद से पूछा है-

मेरा एक मित्र गाजियाबाद में एक मकान लेना चाहता है। मकान मालिक से उसकीबातचीत पक्की हो गई है। लेकिन पूरे पैसे इक्टठे नहीं हो पाने के कारण अभीरजिस्ट्री नहीं करा पा रहा है। मकान मालिक को कुछ पैसे देकर विक्रय अनुबंध करवाना चाहता है। सुरक्षा के लिहाज से इस में कितने रुपयेका स्टाम्प पेपर लगेगा और क्या इसका रजिस्ट्रेशन जरूरी है? कृपया मार्गदर्शनकरें।

समाधान-

स्थावर संपत्ति के विक्रय का अनुबंध (Agreement to sale of immovable property) जिस में संपत्ति का कब्जा लेने का कथन नहीं किया गया हो और विक्रय पत्र के पंजीयन से पहले संपत्ति का कब्जा देने का उल्लेख न हो तो जितनी स्टाम्प ड्यूटी विक्रय पत्र पर लगती है उस की आधी स्टाम्प ड्यूटी पर अनुबंध होना चाहिए।

स्थावर संपत्ति के विक्रय पर उत्तर प्रदेश में संपत्ति के बाजार मूल्य के 12.5 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी है। उदाहरणार्थ यदि किसी संपत्ति का मूल्य 1,00,000/- रुपया है तो उस के विक्य पत्र पर 12500/- रुपया स्टाम्प ड्यूटी देनी होगी और विक्रय के अनुबंध पर 6.25 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी देनी होगी। हम यह स्टाम्प ड्य़ूटी हमारे रिकार्ड के अनुसार बता रहे हैं। फिर भी आप को स्थानीय उप पंजीयक कार्यालय से स्टाम्प ड्यूटी की दर के बारे में जानकारी ले लेनी चाहिए।

नुबंध पर जितनी स्टाम्प ड्यूटी अदा की जाएगी उतनी स्टाम्प ड्यूटी विक्रय पत्र के पंजीयन के समय कम हो जाएगी।

विक्रय के अनुबंध का पंजीयन अनिवार्य नहीं है। लेकिन यदि आप उस का पंजीयन करवा लेते हैं तो आप सुरक्षित रहेंगे।

पिता की संपत्ति में पुत्र का अधिकार …

ऊसरसमस्या-

पंकज ठाकुर ने कोलकाता, प. बंगाल से पूछा है-

मेरे पिता के मरने के बाद मेरी माँ ने जमीन बेच दी है। क्या मेरा उस में मेरा हिस्सा है?

 

समाधान-

प के पिता की मृत्यु के साथ ही उत्तराधिकार के अनुसार संपत्ति में समस्त उत्तराधिकारियों का हिस्सा निहित हो चुका है। आप के पिता की संपत्ति में आप का हिस्सा है।

दि माँ ने जमीन को बेचने का सिर्फ सौदा किया है तो आप दीवानी वाद दाखिल कर के इस जमीन के विक्रय पर अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त कर विक्रय पत्र का पंजीयन रुकवा सकते हैं।

दि आप की माताजी ने विक्रय पत्र का पंजीयन करवा दिया है तो आप अपने हिस्से के विक्रय का पंजीयन निरस्त करवाने के लिए वाद दाखिल कर सकते हैं। यदि जमीन राजस्व विभाग की है तो उस का नामांतरण न होने देने के लिए अपनी आपत्ति राजस्व अधिकारियों को प्रस्तुत कर के उसे रुकवा सकते हैं।

चल-अचल संपत्ति के बँटवारे के लिए एक ही दीवानी वाद प्रस्तुत करना होगा।

समस्या-

लखनऊ उत्तर प्रदेश से वंश बहादुर ने पूछा है –

मेरे पिताजी सरकारी कर्मचारी थे। उनका 80 वर्ष की उम्र में नवम्बर 2002  में देहान्त हो गया।  पिताजी ने कोई भी वसीयत नहीं छोड़ी थी। हम 3 भाई 3 बहन हैं और सभी विवाहित हैं। मैं घर के 1/4 हिस्से में निचले भाग में रहता हूँ और मेरा मझला भाई मेरे वाले भाग के ऊपर के भाग में रहता है।  छोटा भाई पिताजी के साथ रहता था।  उनके देहान्त के बाद घर के 3/4 भाग में कब्जा कर के रहने लगा, बँटवारे के लिए राजी नही था है। इस कारण से मैं ने जनवरी 2013 में घर के बँटवारे हेतु सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया। जिसकी अलग अलग माह में तारीखें पड़ चुकी हैं। किन्तु कोर्ट ने अभी तक समन नहीं भेजा है।  9 अप्रैल 2013 को मैं ने समन का शुल्क भी कोर्ट में जमा कर दिया फिर भी कोर्ट से समन नहीं भेजा जा रहा है। अब मुझे प्रतिवादी को समन जारी कराने के लिए क्या करना चाहिए? कितने  समन जारी होने के बाद उसे हाजिर होना पड़ेगा? मेरे पिताजी द्वारा पोस्टआफिस तथा बैंक में मेरे छोटे भाई को नामित किया है उस ने समस्त पैसा आहरित कर लिया है। क्या मुझे और मेरे मझले भाई को इसमें हिस्सा मिल सकता है? पिताजी का घरेलू सामान एवं जेवर आदि छोटे भाई के कब्जे में हैं उन में अपना हिस्सा लेने के लिए हमें क्या करना होगा?

समाधान-

Partition of propertyमुख्य रूप से आप का मामला पिता जी की संपत्ति के बँटवारे का है। पिताजी का मकान, उन के द्वारा बैंक व पोस्ट ऑफिस में छोड़ा गया धन, जेवर और घरेलू सामान सभी आप के पिता जी की चल-अचल संपत्ति का हिस्सा हैं। इन का बँटवारा या तो आपसी सहमति से हो सकता है या फिर बँटवारे का दीवानी वाद प्रस्तुत कर न्यायालय के निर्णय से।

प के पिता जी का जो धन पोस्टऑफिस और बैंक में था उस के लिए उन्हों ने अपना नामिती भले ही आप के छोटे भाई को बना दिया हो। लेकिन वह नामितिकरण केवल उस धन को बैंक से प्राप्त करने के लिए ही था। नामिति की जिम्मेदारी एक ट्रस्टी की तरह होती है। वह जो धन प्राप्त कर लिया गया है उस का ट्रस्टी होता है उसे उस धन को उस के हकदार जो कि आप के पिता जी के उत्तराधिकारी हैं में कानुन के अनुसार बाँट देना चाहिए। इसी तरह पिताजी के घरेलू सामान और जेवर आदि का बँटवारा भी उत्तराधिकार के कानून के अनुसार होना चाहिए।

स बँटवारे के लिए भी वही तरीका है जो आपने मकान के बँटवारे के लिए अपनाया है। अर्थात आप ने जो दीवानी वाद प्रस्तुत किया है उसी में मकान के साथ ही बैंक व पोस्टऑफिस से प्राप्त धन, घरेलू सामान और जेवर आदि का भी विवरण अंकित करते हुए उन सब का बँटवारा करने की प्रार्थना की जानी चाहिए थी। मेरे विचार में यदि आप का वकील समझदार हुआ तो उस ने ऐसा अवश्य किया होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया है तो आप को चाहिए कि आप अपने दीवानी वादपत्र में संशोधन करवा कर इस सारी चल संपत्ति को भी उसी में सम्मिलित करवाएँ। आप 3 भाई और 3 बहनें हैं इस प्रकार कुल 6 हिस्से होंगे जिन में एक हिस्से अर्थात पिता जी की कुल संपत्ति का 1/6 हिस्सा आप प्राप्त करने के अधिकारी हैं।

क बार वाद पंजीकृत हो जाने और वादी द्वारा समन का खर्च दाखिल कर देने के उपरान्त न्यायालय समन स्वयं ही जारी करती है। आप ने खर्च अदा कर दिया है तो समन जारी हो चुका होगा। यदि समन जारी नहीं हुआ है तो आप अगली पेशी पर न्यायालय के न्यायाधीश से निवेदन कर सकते हैं कि समन जारी किया जाए। न्यायाधीश तुरंत समन जारी करने की हिदायत अपने कार्यालय को कर देंगे जिस से समन जारी हो जाएगा। जब तक सभी प्रतिवादियों पर समन की तामील नहीं हो जाती है समन जारी होते रहेंगे। एक बार सभी प्रतिवादियों को समन मिल जाने पर फिर समन जारी करने की जरूरत नहीं है। यदि प्रतिवादी उपस्थित नहीं होंगे तो उन के विरुद्ध एक तरफा कार्यवाही की जा कर मुकदमे की सुनवाई की जाएगी।

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