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बड़े भाई के नाम से खरीदा गया मकान खुद के नाम से कैसे होगा?

समस्या-

इन्दौर, मध्यप्रदेश से सुश्री रेखा ने पूछा है-

मेरी माताजी द्वारा एक मकान वर्ष 1970 में इन्दौर में लिया गया था। चूंकि उस समय संपत्ति घर के बडों के नाम से ली जाती थी।  इसलिए मेरे पापा द्वारा उक्त मकान अपने बडे भाई के नाम से रजिस्टर कराया गया था।  बडे पापा जबलपुर में रहते हैं, वहीं उनकी नौकरी भी पूरी हुई है।  घर खरीदने के सारे धन की व्यवस्था मेरे पापा द्वारा ही की गई थी।  वह मकान खरीदने के बाद से ही हमारे कब्जे में है।  इस मकान के बारे में मेरे बडे पापा को कोई ज्ञान नहीं है।  मैं यह जानना चाहती हूँ कि क्या बड़े पापा की जानकारी में लाए बिना, कब्जे के आधार पर/ जल एवं विद्युत कनेक्शन के अपने नाम होने / नगर पालिका में जमा कराये जा रहे संपत्ति कर की रसीदों के आधार पर मकान को अपने नाम कराया जा सकता है अथवा नहीं।  क्या कोर्ट के द्वारा उक्त मकान को हासिल किया जा सकता है?

समाधान-

प का यह तर्क बेमानी है कि 1970 में संपत्ति बड़ों के नाम से खरीदी जाती थी।  केवल संयुक्त परिवार होने पर ही संपत्ति परिवार के मुखिया के नाम से खरीदी जा सकती थी।  संपत्ति भी परिवार की संयुक्त संपत्ति होती थी।  आप का यह तर्क यदि तथ्यों के आधार पर साबित भी कर दिया जाए तो भी संपत्ति संयुक्त परिवार की मानी जाएगी। ऐसे संयुक्त परिवार में आप के दादा के सभी पुरुष वंशज और उन के परिवार सम्मिलित हो जाएंगे।  मकान फिर भी आप की माता जी को प्राप्त नहीं हो सकेगा।

प ने यह नहीं बताया कि आप के पिताजी मौजूद हैं अथवा नहीं।  क्यों कि इस मामले में यह तथ्य बहुत महत्व रखता है।  आप ने यह नहीं बताया कि आप की माता जी क्यों चाहती हैं कि मकान अब उन के नाम हो जाए?  मकान पर उन का अबाधित कब्जा वर्ष 1970 से चला आ रहा है।  उस में रह रही हैं।  मकान के टैक्स की रसीदें उन के नाम से हैं और नल-बिजली के कनेक्शन भी उन्हीं के नाम से हैं तो 1970 से उन का कब्जा तो है ही।  बात का कोई भी दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध नहीं है कि कब्जा आप के पिता जी और माता जी के पास कैसे आया? ऐसी स्थिति में आप की माता जी को क्या आवश्यकता है कि वे इसे अपने नाम कराना चाहती हैं?  वे उस का उपभोग करती रहें।  यदि कभी आप के पिता के बड़े भाई या उन के उत्तराधिकारी आपत्ति करें और कोई कानूनी कार्यवाही करें तो यह तर्क रखा जा सकता है कि यह मकान वास्तव में आप के माता पिता ने अपनी स्वयं की आय से अपने लिए बड़े भाई के नाम से खरीदा था।   इस तथ्य से बड़े भाई भी परिचित थे और उन्हों ने इसीलिए आप के कब्जे में आज तक कोई दखल नहीं किया।  वैसे भी बयालीस वर्ष से आप की माताजी के कब्जे में होने से इस पर आप की माता जी का प्रतिकूल कब्जा (Adverse Possession) हो चुका है।   तर्कों के आधार पर कोई भी आप की माता जी का कब्जा उन से नहीं ले सकता।

हाँ, यदि आप की माता जी चाहें और आप के पिता के बड़े भाई मान जाएँ तो उन से आप की माता जी के नाम वसीयत लिखवा सकती हैं जिस में उन की यह स्वीकारोक्ति हो कि उक्त मकान आप के पिता ने ही अपनी स्वयं की आय से खरीदा था आप के पिता का ही था और अब आप के पिता के उत्तराधिकारियों का ही है।  केवल बड़े भाई को सम्मान प्रदान करने मात्र के लिए उन के नाम से खरीदा गया था। इसी कारण से अब वे उस मकान की वसीयत आप की माता जी के नाम कर रहे हैं।  इस के अतिरिक्त कोई अन्य उपाय नहीं है।  फिर भी आप को समस्त दस्तावेज दिखा कर किसी अच्छे और विश्वसनीय स्थानीय वकील से इस मामले में विधिक राय प्राप्त कर लेनी चाहिए।

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