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लीज की संपत्ति का पुत्र के नाम हस्तान्तरण कैसे हो?

समस्या-

अमित भारद्वाज ने गणेश चौक, बारघाट रोड, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-


मेरी दादी की एक दुकान इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय  रोगी कल्याण समिति के काम्प्लेक्स के अंतर्गत है । दुकान 2000 सन में रोगी कल्याण समिति से क्रय की गई थी। किरायेदारी पर रोगी कल्याण समिति 500 रुपये किराया हर माह किरायेदारी के रूप में सभी दुकानदार से लेती है। दादी अब यह चाहती है की दुकान पापा जी के नाम से हस्तान्तरित हो जाये । समिति केअध्यक्ष कलेक्टर महोदय होते हैं और सचिव जिला अस्पताल के सर्जन होते है। दादी ने रोगी कल्याण समिति को आवेदन भी दे दिया है, जन सुनवाई में कलेक्टर ने यह बताया था कि यदि दादी दुकान पापा के नाम करना चाहती है और अन्य पुत्रों को कोई आपत्ति नहीं है तो वह कोर्ट जाने में स्वतंत्र है। लेकिन आवेदन देने के बाद समिति के बाबू काम नहीं कर रहे हैं बोलते है कि कोर्ट जाओ। इस पर हम ने उन से कहा कि दादी अभी जीवित है और जीवित अवस्था में दुकान जिसे चाहे उसे दे सकती है। दादी और पिताजी को क्या करना चाहिए।

समाधान-

प के द्वारा प्रेषित तथ्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि दुकान का स्वामित्व रोगी कल्याण समिति का है और दुकान आप की दादी के नाम लीज पर है। लीज पर दी गयी संपत्ति को हस्तान्तरित करने के लिए मूल स्वामी की अनुमति की आवश्यकता है। दादी के नाम जो लीज डीड है उस की शर्तों पर निर्भर करता है कि दादी दुकान कैसे अपने किसी पुत्र या अन्य व्यक्ति के नाम हस्तान्तरित कर सकती है। सब से पहला काम तो यह किया जा सकता है कि दादी एक वसीयत कर के दुकान को आप के पिता के नाम वसीयत कर दे और इस वसीयत को उप पंजीयक के कार्यालय में वसीयत करा दिया जाए। इस से यह सुनिश्चित हो जाएगा कि दादी के देहान्त के तुरंत बाद यह दुकान आप के पिता जी के स्वामित्व में स्वतः ही आ जाएगी। तब आप के पिताजी वसीयत की प्रमाणित प्रति रोगी कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर लीज का नामान्तरण उनके नाम करने का आवेदन कर सकते हैं।

विकल्प में आप यह भी कर सकते हैं कि आप उप पंजीयक कार्यालय में लीज डीड को दिखा कर यह पूछ सकते हैंं कि क्या दादी इस लीज को विक्रय या दानपत्र के माध्यम से आप के पिता जी को हस्तान्तरित कर सकती है। यदि उन्हें कोई आपत्ति न हो तो दान पत्र लिख कर उसे पंजीकृत करवा कर दादी उस दुकान को आप के पिताजी के नाम कर सकती है। पंजीकृत दानपत्र के आधार पर लीज आपके पिताजी के नाम नामांतरित करने के लिए रोगी कल्याण समिति को आवेदन किया जा सकता है। वसीयत और दान पत्र दोनों के आधार पर लीज का नामान्तरण न किए जाने पर न्यायालय के समक्ष व्यादेश जारी करने के लिए समिति के विरुद्ध वाद प्रस्तुत किया  जा सकता है।

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