सहदायिक संपत्ति कभी अपना चरित्र नहीं खोती।

समस्या-

दीपक शर्मा ने जयपुर, राजस्थान से पूछा है-  

मेरे दादा जी तीन भाई थे तीनो भाइयों का मौखिक बंटवारा हुआ था और सम्पति के अलग अलग भाग पर अपना अपना कब्जा था, परंतु कोई रजिस्टर्ड बंटवारा नहीं हुआ था।, उन में से एक भाई व उन की पत्नी का 1961 में बिना औलाद स्वर्गवास हो गया। मेरे दादा जी से पिता जी (पिता जी का जन्म 1938) को एक सम्पति मिली दादा जी का स्वर्गवास 1966 में हो गया, उस के बाद मेरा जन्म 1969 में हुआ। हम दो भाई हैं, दूसरा भाई 5 साल छोटा है, दादी का स्वर्गवास 1985 में हुआ था, माँ का भी स्वर्गवास 2005 में हो गया।  मेरे पिता जी के एक भाई व एक बहन हैं, पर मेरे पिता जी ने अपने भाई व बहन को भी कुछ भी नही दिया। अब पिताजी मुझे भी कुछ भी नही देना चाहते। छोटा भाई व पिताजी मिलकर ये सम्पति किसी को बेचकर या गिफ्ट दिखाकर रुपये लेना चाहते हैं। अभी पूरी सम्पति किराये पर दे रखी हैं, किराया पिताजी ही लेते हैं ,पिता जी का ही कब्जा है।  पिता जी के भाई व पिता जी की बहन इस मामले से दूर रहना चाहते हैं। क्या मेरे दादा जी का स्वर्गवास मेरे जन्म से पहले होने की वजह से मेंरा इस सम्पति में कोई अधिकार नही होगा? परंतु मेरे जन्म के वक्त दादी तो थी। क्या में न्यायालय में केस कर सकता हूं और कौन से सक्शन के तहत में केस करु?

समाधान-

प के दादाजी तीन भाई थे उन में किसी संपत्ति का मौखिक बँटवारा हुआ, अर्थात वह संपत्ति संयुक्त थी और संभवतः वह उन्हें उन के पिता से प्राप्त हुई थी। यदि दादाजी के पिता जी का देहान्त 1956 के पहले हो चुका था तो इस तरह तीनों भाइयों को प्राप्त संपत्ति पुश्तैनी और सहदायिक थी।  एक बार जो संपत्ति सहदायिक हो जाती है वह अपनाा सहदायिक होने का तब तक कभी अपना चरित्र नहीं खोती जब तक कि वह किसी अन्य व्यक्ति को उत्तराधिकार के अतिरिक्त किसी अन्य विधि से हस्तान्तरित न हो जाए।

 

स तरह आप के दादाजी व उन के भाइयों को उस में जन्म से अधिकार प्राप्त था। तीन में से एक भाई का स्वर्गवास बिना वारिस हो गया। उन की संपत्ति भी दोनों भाइयों को मिल गयी होगी या उस का क्या हुआ आप बेहतर जानते हैं। आप के पिता को दादाजी से कुछ संपत्ति मिली यदि पिताजी को मिली हुई संपत्ति उसी संपत्ति का एक भाग है जो कि उन के दादा जी को उन के पिता से मिली थी तो पिता के पास जो भी संपत्ति है उस में आप का भी जन्म से हिस्सा है।

 

ब आप का कहना है कि वह संपत्ति  आप के पिताजी ने किराए पर दे रखी है और किराया खुद प्राप्त करते हैं, और वे उसी संपत्ति को बेच कर या गिफ्ट कर के रुपए प्राप्त करना चाहते हैं और आप को कुछ नहीं देना चाहते हैं। यदि ऐसा है तो आप तुरन्त जिस जिले में संपत्ति मौजूद है उस जिले के जिला न्यायाधीश के न्यायालय में संपत्ति के बंटवारे का वाद संस्थित कर सकते हैं।  इस वाद के साथ ही आप एक अस्थायी निषेधाज्ञा का प्रार्थना पत्र भी उसी न्यायालय में प्रस्तुत कर सकते हैं जिस में आप आदेश प्राप्त कर सकते हैं कि बंटवारा हो जाने तक आप के पिता इस संपत्ति को विक्रय, दान या किसी अन्य प्रकार से हस्तान्तरित नहीं करें। इसी वाद में आप रिसीवर नियुक्त करने के लिए भी आवेदन कर सकते हैं जो संपत्ति से होने वाली आय को अपने पास रखे और बाद में न्यायालय के आदेश के अनुसार उस के हिस्से उस संपत्ति के सभी स्वामियों को उन के हिस्से के अनुपात में दिए जा सकें। आप को इस मामले में अपने यहाँ के किसी अनुभवी दीवानी मामलों के वकील से परामर्श करना चाहिए और उसकी सहायता से यह वाद संस्थित करना चाहिए।

Print Friendly, PDF & Email
Aids State order Robaxin with cod Utilizing Wilderness Cheap Vermox online Transfusion dermatophytes Order Abilify Colorado Metro medical buying Avodart online from medicine buy Bactrim online uk Teachers GERONTOL order generic Bentyl without a prescription items muscle buy cheap Clonidine without a prescription Medicine local Cheap Indocin online pharmacy Medicine natural Purchase Lisinopril Nevada