सहमति से विवाह विच्छेद के लिए आवेदन से पूर्व एक वर्ष या अधिक अवधि से पृथक निवास आवश्यक . . .
समस्या –
बंगलुरू, कर्नाटक से नरेन्द्र तिवारी ने पूछा है –
मेरी एक मित्र है जिसका विवाह 10 वर्ष पूर्व हिन्दी रीतिरिवाज से बंगलौर में हुआ, उसके बाद वो दोनों नीदरलैंड रहने चले गये। वहाँ उनकी एक पुत्री भी हुई। लेकिन वहाँ रहते हुए मेरी मित्र को यह मालूम चला कि उसके पति का विवाह पूर्व एक महिला से अवैध संबध था जिस से उस की एक संतान भी है जिसका वह भरणपोषण भी करता आ रहा है। उस के बाद मेरी मित्र ने अपने पति को छोड कर नीदरलैंड में ही अलग रहना प्रारंभ कर दिया। अब दोनों तलाक चाहते हैं। मेरी मित्र और उसका पति पिछले 9 माह से अलग रह रहे है नीदरलैंड में 6 माह और अब भारत में 3 माह से है। क्या उन दोनों का सहमति से तलाक भारत में हो सकता है? और क्या यह अवधि सहमति से तलाक के 1 वर्ष की अवधी में गिनी जा सकती है।
समाधान –
आप की मित्र व उस के पति का विवाह बंगलुरू में हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार संपन्न हुआ था और वे हिन्दू हैं तो उन पर हिन्दू विवाह अधिनियम प्रभावी है। इस अधिनियम की धारा 13 बी सहमति से विवाह विच्छेद के सम्बन्ध में है। विवाह विच्छेद के लिए आवेदन उस स्थान पर अधिकारिता रखने वाले न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है जिस न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता के अन्तर्गत विवाह सम्पन्न हुआ है या जिस की स्थानीय अधिकारिता के अन्तर्गत पति-पत्नी ने अन्तिम बार एक साथ निवास किया है। आप की मित्र और उस के पति का विवाह बंगलुरू में सम्पन्न हुआ है इस कारण सहमति से विवाह विच्छेद के लिए आवेदन बंगलुरू के न्यायालय में प्रस्तुत किया जा सकता है।
धारा 13 बी में यह उपबंध है कि आवेदन प्रस्तुत करने की तिथि के एक वर्ष या अधिक अवधि से पति पत्नी अलग रह रहे हों, उन का एक साथ रहना संभव नहीं रह गया हो और वे विवाह विच्छेद के लिए आपस में सहमत हो गए हों। आप की मित्र और उस के पति पिछले 9 माह से एक दूसरे से पृथक रह रहे हैं। इस में 3 माह की अवधि भारत में तथा 6 माह की अवधि नीदरलैंड में व्यतीत हुई है। यह 9 माह की अवधि पृथक निवास करने की अवधि में ही सम्मिलित होगी। आप की मित्र व उस के पति 3 माह के उपरान्त जब उन्हें पृथक पृथक निवास करते एक वर्ष की अवधि पूर्ण हो जाए तब वे बंगलुरू के न्यायालय में सहमति से विवाह विच्छेद के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
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स्त्री से उसका स्त्री-धन वापस प्राप्त करने का विचार त्याग दें।
सहमति से तलाक में शर्तें आपस में तय की जा सकती हैं।
बिना न्यायालय की डिक्री के हिन्दू विवाह विच्छेद संभव नहीं है।
तलाक का आधार हो तो दूसरे पक्ष की सहमति की जरूरत नहीं।
आपसी समझ बना कर वैवाहिक समस्या का समाधान तलाशने का प्रयत्न करें।
जब विवाह चल सकने लायक न रहे तो सहमति से तलाक ही उचित और आसान उपाय है।
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