Possession Archive

विक्रय निरस्त करने, विभाजन और पृथक हिस्से के कब्जे का वाद

September 6, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

कल्पना ने फरीदाबाद, हरयाणा से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी ने अपनी पैतृक जमींन अपनी पुत्र वधू के नाम 6 वर्ष पूर्व बेच दी। पिताजी को किसी प्रकार की आर्थिक आवश्यकता नहीं थी तथा पुत्र वधू किसी प्रकार की आय नहीं करती थी। अब मेरे पिताजी और मेरा बड़ा भाई मुझे, मेरे बच्चों व मेरे पति का मान सम्मान नहीं करते व हमें गाली-गालोंज भी करते है। .क्या अब मैं अपना हक/ ज़मीन वापस ले सकती हूँ?  समाज में बेटी के मान-सम्मान का भी प्रश्न है। कृपया राह सुझाएँ।

समाधान-

प पहले जाँच लें कि जमीन पैतृक ही है। कौन सी जमीन पैतृक है जिस में संतानों का जन्म से अधिकार होता है इस पर तीसरा खंबा पर पहले पोस्टें लिखी जा चुकी हैं, उन्हें सर्च कर के पढ़ लें। लड़कियों को 2005 से पैतृक संपत्ति में अधिकार मिला है। आप की जमीन की बिक्री बाद में हुई है। इस तरह आप जमीन के विक्रय को चुनौती दे सकती हैं। इस मामले में लिमिटेशन की बाधा भी नहीं आएगी। यदि पिता किसी संतान का का हक किसी और को दे देता है तो वाद 12 वर्ष तक की अवधि में किया जा सकता है। आप को चाहिए कि आप विक्रय पत्र निरस्त करवाने तथा संपत्ति का बँटवारा कर आप का हिस्सा अलग करते हुए उस का पृथक कब्जा आप को देने का वाद दीवानी न्यायालय में संस्थित करें।

 

कब्जा बहुत पुराना है, मकान से बेदखल नहीं किया जा सकता।

August 31, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

छैलूसिंह ने अमरसर, राजस्थान से राजस्थान राज्य की समस्या भेजी है कि-

खातेदारी की जमीन है जिस पर मेरे पिता जी का ४० साल से पूर्णतः कब्जा है यह खातेदारी सामान्य जाति की है हम भी सामान्य से हैं। कब्जे के सुरूआती समय से २० साल तक इस जमीन का उपयोग चारा डालने व अन्य कार्यो के लिए होता था लेकिन अब २० साल से उस जमीन पर हमारा घर बना हुआ है। यह घर व घर में उपस्थित सभी चल, अचल संपति मेरे पिता जी की है। इस जमीन पर सन् २०१० मे गांव की पंचायत दवारा मेरे माता जी के नाम से इंदिरा आवास योजना के अन्तर्गत पक्का मकान बनाने का लाभ मिला था और बिजली कनेक्शन मेरे पिता जी के नाम से है आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर आइडी, आवश्यक सभी दस्तावेज इसी वार्ड व इसी जगह के आधार पर हैँ। आज तक इस जमीन से संबंधित कोर्इ विवाद न्यायालय मे विचाराधीन नहीं है। अब ३ साल से खातेदारी जिन लोगों के नाम है वो लोग हमे बात बात पर बहुत परेशान करते है वह लोग हमे धमकी देते है कि हम तुम्हे हमारी जमीन से बेदखल कर देंगे हमको हर बात मे दबाव मे रखते हैं।

समाधान-

आप को इस मामले में डर कर रहने की जरूरत नहीं है। यदि वे लोग आप को धमकी देते हैं तो उस की रिपोर्ट पुलिस में कराएँ। आप अदालत में दावा पेश कर के विधिविरुद्ध रीति से आप को बेदखल करने के विरुद्ध स्थगन आदेश प्राप्त कर सकते हैं। आप का कब्जा उस मकान पर इतना पुराना है कि आप अपने कब्जे की सुरक्षा एडवर्स पजेशन के आधार पर कर सकते हैं। यह बात वे लोग भी जानते हैं इस कारण कोई कानूनी कार्यवाही नहीं करते हैं। केवल आप को डरा धमका कर अपना मतलब निकालना चाहते हैं। इस का एक मात्र उपाय पहले अपने मन से सभी प्रकार का डर निकालें और परिस्थितियों का ठीक से मुकाबला करें। आप के मकान को कोई आप से नहीं छीन सकता।

पुश्तैनी जमीन में आप का हक है, बँटवारे का वाद संस्थित करें।

August 30, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

वर्षा देवी ने रानीवाड़ा, जालोर राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मैं विवाहित हूँ, हम दो बहन और तीन भाई हैं। पिता भी जीवित हैं। हाल में मेरे पिता के यहाँ रहती हूँ और पिताजी ने मुझे उनकी जमीन पर मकान बंनाने की इजाजत दी थी तो मैं ने उनकी ही जमीन पर मकान बना दिया है और लाइट भी उनके नाम से ही ली थी। मेरे पास में कोई दस्तावेज भी नहीं है। अब मेरे पिताजी और मेरे भाइयो से अनबन चल रही है। मेरे पिता और भाई सब मिल कर मकान खाली करने को बोल रहे हैं और कई बार तो बवाल भी कर् चुके हैँ। अभी मेरी बेटी की 29/6/2017 को शादी थी तो गणेश पूजा के दिन ही सब मेहमानों के सामने घर बुला के मार पीट भी की है, मेरे पति के साथ और पुलिस भी बुलवाई थी फ़ँसाने को। उनकी ये साजिश थी वो नाकाम हो गई। फिर मैंने शादी के बाद पुलिस में रिपोर्ट की मगर कोई कार्यवाही नहीं हुई पैसो के बल पर। मुझे और मेरे परिवार को जान से मारने की भी धमकी देते हैँ।  अब मुझे क्या और कैसे करना होगा जो मेरा परिवार शान्ति से रह पाये। रही बात जमीन की मेरे पिताजी के पिताजी के पिताजी से मिली थी अब मेरे साथ इतना सब कुछ हो गया है सब रिश्तों की हत्या हुई है तब मैंने अपना हक माँगा तो मेरे पिता ने सारी सम्पति मेरे तीन भाइयों को दान पत्र कर दी है और रजिस्ट्री और नामांतरण भी कुछ दिन पहले हो गया है। अब मुझे मेरा हक कैसे मिलेगा कैसे ले सकती हूँ अब मुझे क्या करना होगा कृपिया उचित सलाह दें।

समाधान-

प के पिता की समूची जमीन पुश्तैनी है और उस जमीन में आप का भी हक 2005 से कानून के माध्यम से बन गया है। आप उक्त दानपत्र को चुनौती दे कर निरस्त करवाने की कार्यवाही कर सकती हैं तथा समूची जमीन और उस पर निर्मित संपत्ति के बंटवारे का वाद संस्थित कर सकती हैं। यह वाद संस्थित करने साथ ही आप जिस जमीन पर कब्जे में हैं, मकान बना रखा है उस जमीन पर अपने पिता, तीनों भाई और उन के बच्चों के विरुद्ध आप के कब्जें में दखल देने, धमकाने मारपीट का प्रयास करने आदि के विरुद्ध स्टे प्राप्त कर सकती हैं।

इस के बाद भी पिता या भाई वगैरह धमकी या मारपीट करने जैसी अपराधिक कार्यवाही होने पर पुलिस को रिपोर्ट कर सकती हैं। पुलिस कार्यवाही न करे तो एस पी को शिकायत करें और उस के एक दो दिन में ही न्यायालय में अपना परिवाद प्रस्तुत करें।

 

समस्या-

कपिल शर्मा ने रुद्रप्रयाग, भीरी, टेमरिया वल्ला, बसुकेदा, उत्तराखंड की समस्या भेजी है कि-

मेरे दादाजी के भाई ने अपनी 21 नाली जमीन हरिजन समाज कल्याण को बेच दी और उसके बाद वह लापता हो गए। उसके बाद हम ने उस पर विभाग का कब्जा होने नहीं दिया। जिस कारण वह कब्जा हमारे पास ही है, पिछले 30 साल से। तो क्या यह जमीन हमारी ही हो गयी है। अगर नहीं है, तो हमारे नाम पे करवाने के लिए इसमें क्या कार्यवाही की जा सकती है? इस जमीन के पट्टे हमारे यहाँ के हरिजनों को मिले हुए है पर इनका भी कब्जा नहीं है, तो इसमें क्या इन हरिजनों का हक़ बनता है? क्योंकि अब वह 30 साल बाद हमें अपने कब्ज़े के लिए परेशान कर रहे हैं। महोदय मैं बहुत परेशान हूँ ये लोग मुझे बहुत परेशान कर रहे हैं। मुझे क्या करना चाहिए।

समाधान-

प के दादाजी के भाई ने जमीन बेच दी, अब उस पर आप का या आप के परिवार के किसी व्यक्ति का कोई हक नहीं रहा है। वह जमीन हरिजनों को आवंटित कर दी गयी है और उस पर उन का हक हो गया। आप ने हरिजनों का कब्जा नहीं होने दिया लेकिन आप का जो कब्जा था वह भी अवैध था। आप अपने बल से कब्जें में थे। अब आप का बल क्षीण हो गया है और हरिजन उन के हक की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं तो आप को परेशानी हो रही है। यही परेशानी पिछले तीस साल से हरिजनों को थी, लेकिन आप को उस से कोई फर्क नहीं पड़ा। तो कब्जा तो बल का मामला है जिस के पास बल है, पुलिस और अफसरों को अपने हक में इस्तेमाल करने की ताकत है उसी का कब्जा है। यदि आप जमीन को अपने नाम करा लेंगे तब भी हरिजनों में ताकत और बल हुआ तो वे जमीन का कब्जा आप से ले लेंगे।

जमीन एक बार अनुसूचित जाति के व्यक्ति के नाम स्वामित्व में आ गयी तो वह अब गैर अनुसूचित जाति के खाते में नहीं आ सकती। आप के खाते में किसी प्रकार नहीं आएगी। आप इस जमीन को अपने नाम कराने की बात को भूल ही जाएँ तो बेहतर है। गनीमत है कि हरिजनों ने आप को अनु.जाति अनु.जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में कोई फौजदारी मुकदमा नहीं किया वर्ना आप को लेने के देने पड़ सकते थे। आप ने तीस सालों से अपने हक की न होते हुए भी इस जमीन से जितनी कमाई की है उस में आप अपने लिए इस से कई गुना जमीन खरीद सकते हैं। यह सोच कर तसल्ली कर लीजिए। जिन का हक है वह तो आप को आगे पीछे देना होगा। उस से बचा नहीं जा सकता।

बँटवारा कैसे किया जाए?

August 13, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

नटवर साहनी ने गोबरा नवापारा, छत्तीसगढ़ से समस्या भेजी है कि-

क्या पैतृक सम्पति का बँटवारा करवाने पर बटवारा करने वाला जीवित न रहने पर मान्य रहता है?  क्या बटवारा नामा बिना पंजीकृत मान्य रहता है? क्योंकि वह पंजीकृत करवाने में असहाय है।

समाधान-

किसी भी साझी संपत्ति का बँटवारा आपसी सहमति से हो सकता है। यदि साझीदार या परिवार किसी एक व्यक्ति के द्वारा सुझाए गए बंटवारे पर सहमत हों तो वैसे भी किया जा सकता है। पर सभी साझीदारों की सहमति जरूरी है। एक बार बँटवारा हो जाने पर और सब के अपने अपने हिस्से पर काबिज हो जाने पर एक लंबे समय तक स्थिति वैसे ही बने रहने पर उस बँटवारे को चुनौती देना संभव नहीं होता है।

यह बँटवारा मौखिक हो कर बँटवारे के अनुसार संपत्ति का कब्जा सब को मिल जाने पर उस का निष्पादन हो जाता है। बँटवारे के कुछ समय बाद चाहेँ तो सारे साझीदार बँटवारे का स्मरण पत्र लिख कर उस पर सभी के हस्ताक्षर और गवाहों के हस्ताक्षर करवा कर उसे नौटेरी से प्रमाणित करा कर रख सकते हैं इसे भविष्य में किसी भी  मामले में साक्ष्य में प्रस्तुत किया जा सकता है।

बँटवारा यदि लिखित में होता है तो उस का पंजीकृत होना आवश्यक है, यदि वह पंजीकृत न हुआ तो भविष्य में साक्ष्य में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में उस दस्तावेज का कोई महत्व नहीं रह जाता है।

बेहतर यह है कि बँटवारा पंजीकृत हो। यदि नहीं होता है तो बँटवारा मौखिक हो और बँटवारे के मुताबिक संपत्ति पर पृथक पृथक कब्जे दे दिए जाएँ और उस के बाद बँटवारे का स्मरण पत्र नौटेरी से निष्पादित करा लिया जाए तो वह पर्याप्त है।

समस्या-

मोहम्मद जीशान ने सीतापुर, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

क घर का बैनामा है, उस पर ६ लोगो के नाम अंकित हैं। परन्तु ५ लोग उस मकान में १३ सालों से नहीं रह रहे हैं। अब वो ५ लोग अपना हिस्सा बेचना चाहते हैं। जिसका छठा हिस्सा है वो जबरदस्ती कब्ज़ा किये है, कृपया बेचने के लिए कानूनी हल बताएँ।

समाधान-

किसी भी संयुक्त संपत्ति के सारे साझेदार मिल कर आपसी सहमति से ही पूरी संपत्ति को विक्रय कर सकते हैं या फिर एक या एक से अधिक साझेदार उस संपत्ति में अपना हिस्सा विक्रय कर सकते हैं। यदि उन के पास कब्जे में संपत्ति का कोई भाग हो तो उस का कब्जा दे सकते हैं। इस तरह करने पर खरीददार को उस संपत्ति के एक भाग पर कब्जा मिल जाता है तथा पूरी संपत्ति के उतने हिस्से का वह साझीदार हो जाता है जितने हिस्से उसने खरीदे हैं। यहाँ समस्या यह आती है कि इस तरह के विक्रय में खरीददार नहीं मिलता। खरीददार को अपने हिस्सा अलग करने के लिए बंटवारे का मुकदमा करना पड़ता है।

आप के मामले में जिस के पास कब्जा है वह मकान बेचना नहीं चाहता। जो बेचना चाहते हैं उन के पास कब्जा नहीं है। बिना कब्जे के कोई हिस्सा खरीदने को तैयार नहीं होगा। वैसी स्थिति में बेचने के इच्छुक साझीदारों को बंटवारे का दावा करने तथा अपने हिस्से का कब्जा दिलाने के लिए दावा करना होगा और बंटवारा कराना होगा। एक बार बंटवारे की प्राथमिक डिक्री पारित होने पर अंतिम डिक्री पारित करने के दौरान वे चाहें तो छठे व्यक्ति का हिस्सा खरीद सकते हैं और पूरी संपत्ति के स्वामी हो जाने पर संपत्ति विक्रय कर सकते हैं।

समस्या-

संध्या कश्यप ने रेलवे पाड़ा, अडावल, जगदलपुर, छत्तीसगढ़ से समस्या भेजी है कि-

35 वर्ष से हमारे ससुर ने घर के समीप एक जमीन पर कब्जा कर रका था। उस समय पर वहाँ कोई मकान नहीं था। अब सरपंच पंचायत की जमीन बता कर दूसरो को बेच रहे हैं और हमें क्या तुम्हारे पास पट्टा है कह कर डरा रहे हैं। क्या यह जमीन हमें मिल सकती है? क्या हम लोग कोई कानूनी कार्यवाही कर सकते हैं? सरपंच का काम पंचायत के लोगों को सुरक्षित करना है कि उन्हें लूटें।

समाधान-

प का घर के पास की किसी जमीन पर इतना पुराना कब्जा है इस का अर्थ ये तो नहीं कि आप उस जमीन के स्वामी हो गए हैं। यदि जमीन पंचायत की है तो वह सार्वजनिक है और उस पर कब्जा हटाने की कार्यवाही पंचायत को करने का अधिकार है। वे आप का कब्जा हटाने की कार्यवाही कर सकते हैं और किसी जरूरतमंद को जमीन मकान बनाने के लिए बेच सकते हैं। आखिर गाँव में जमीन सीमित होती है और लगातार आबादी बढ़ने से मकानों के लिए जमीन की जरूरत होती है।

लेकिन किसी भी व्यक्ति का कब्जा यदि 30 वर्ष से अधिक का है तो उसे हटाया जाना संभव नहीं है। यदि आप को आशंका है कि आप का कब्जा जबरन हटा दिया जाएगा तो आप दीवानी न्यायालय में जा कर कब्जा हटाए जाने के विरुद्ध पंचायत तथा उस के द्वारा जिस को विक्रय की जाए दोनों के विरुद्ध स्थगन आदेश प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन फिर भी उस जमीन पर आप का स्वामित्व स्थापित नहीं होगा।   उस के लिए जमीन पंचायत से खरीदनी होगी या पट्टा बनवाना पड़ेगा।

 

आप ने मकान का स्वामित्व नहीं बल्कि केवल कब्जा खरीदा है।

June 12, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

राधेश्याम ने इंदौर, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी ने २०१२ में इंदौर में एक मकान ३०० वर्गफुट जिस पर चद्दर का शेड है, 1,25,000/- रूपये में ख़रीदा था, जिसकी १०० रूपये के स्टाम्प पर नोटरी करायी गयी थी! उस वक़्त पिताजी के पास रजिस्ट्री कराने के पैसे उपलब्ध नहीं थे इसलिए उस वक़्त सिर्फ नोटरी कराकर कब्ज़ा हासिल कर लिया था, बाद में पैसे आने पर जब पुराने मकान मालिक से रजिस्ट्री कराने के लिए कहा तो उसने साफ़ इनकार कर दिया और कहा कि मकान का अब न तो हमारे पास पट्टा है और न हॉं कोई लिखा पढ़ी है ! जबकि पुराना मकान मालिक उस मकान में पिछले बीस वर्षों से रह रहा था! और नगर पालिका में संपत्ति कर भी भर रहा था, जो की अब हम भर रहे हैं, लेकिन मकान मालिक के नाम से (हस्ते में पिताजी का नाम)। एक नयी बात पता चली कि उस मकान सम्बन्धी और आसपास के मकान पर जमीन विवादित कोर्ट में केस चल रहा है। लेकिन अभी तक हमारे पास उक्त सम्बन्ध में कोई भी नोटिस या कानूनी तौर पर किसी ने कुछ भी नहीं कहा। सिर्फ आसपास वाले ही हमें भयभीत करते है कि आपने यह मकान क्यों लिया यह तो कभी भी टूट सकता है। मेरे पिताजी मकान में दूसरी मंजिल बनाना चाहते हैं परन्तु अनचाहे डर से भयभीत हैं! मेरे पिताजी की उम्र ७५ वर्ष है, और इस विषय को लेकर वो बहुत चिंतित रहते हैं! इस स्थिति में हमें क्या कदम उठाना चाहिए?

समाधान-

प के पिताजी ने 300 वर्गफुट जमीन और उस पर बने मकान को खरीदा नहीं है बल्कि केवल खरीदने का सौदा किया है। किसी भी अचल संपत्ति का जिस का मूल्य 100 रुपये या उस से अधिक का हो खऱीदना तभी पूर्ण हो सकता है जब कि उस का विक्रय पत्र पंजीकृत करवा दिया हो। इस कारण जो नोटेरी से प्रमाणित दस्तावेज है वह केवल मकान खरीदने का एग्रीमेंट या अनुबंध है।

किसी भी वस्तु को वही विक्रय कर सकता है जिस का वह स्वामी हो या स्वामी से उसे उस वस्तु को विक्रय करने का लिखित अधिकार मुख्तार नामे से प्राप्त हो। आप बता रहे हैं कि विक्रेता के पास न तो पट्टा है और न ही कोई लिखा पढ़ी है। इस से पता लगता है कि उक्त विक्रेता के पास भी उस मकान का कब्जा ही है हो सकता है यह कब्जा बीस वर्ष से बना हुआ हो। इस प्रकार आप के पिताजी ने उस व्यक्ति से केवल उस मकान का कब्जा खरीदा है जो उस व्यक्ति के पास था।

अब आप को यह पता करना चाहिए कि वह जमीन किस की है और उस पर कैसा मुकदमा चल रहा है। यह तो स्थानीय रूप से पता करने पर ही पता चल सकता है। नगर निगम आदि से यह पता किया जा सकता है कि वह जमीन किस की है। उसी से यह भी पता लग सकता है कि यदि कोई मुकदमा चल रहा है तो वह किस का किस के विरुद्ध हो सकता है। आम तौर पर यदि वह जमीन किसी की निजी हुई तो उस पर से आप को कोई हटा नहीं सकेगा। बस आप को प्रमाणित करना पड़ेगा कि जिस व्यक्ति ने आप को कब्जा बेचा है वह उस पर बीस वर्ष से काबिज था। और उस जमीन या मकान से संबंधित मुकदमे से बेचने वाले का कोई लेना देना नहीं था। वैसे भी जिस मूल्य में आप के पिताजी ने मकान लिया है उस में इसी तरह का विवादित भूखंड मिल पाना इंदौर नगर में  मुमकिन था। हो सकता है कभी उस मामले में निर्णय हो जाए और बाद में नगर निगम या न्यास आदि वहाँ काबिज लोगों को पट्टे जारी कर दे। तब आप के पिताजी उस संपत्ति के स्वामी हो जाएँ। पर इस सब के लिए सतर्क रहना होगा और पट्टा जारी करने की कार्यवाही करते रहना होगा। तब तक यदि आप दूसरी मंजिल बनाना चाहते हैं तो बना कर रह सकते हैं। जितना रिस्क इस संपत्ति के छिनने का है उतना ही दूसरी मंजिल का भी होगा। पर कब्जा बना कर उसी मकान में रहते रहेंगे तब ही इस संपत्ति को आप बचा सकेंगे।

बंटवारे का वाद प्रस्तुत कर न्यायालय से बंटवारा कराएँ।

June 10, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

उमाकान्त ने देवी तहसील सौसर, जिला छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

दादाजी ने अपने जीवनकाल में कोई बंटवारा नहीं किया और न ही नाप के हिसाब से जोतने के लिए दिया। लेकिन उन की मृत्यु के बाद जिन्हें जोतने को ज्यादा मिला वे बंटवारा नहीं चाहते लेकिन बाकी हिस्सेदार बंटवारा चाहते हैं। हमन कुछ कानूनी कार्यवाही की लेकिन उन्हों ने जानपहचान से रद्द करवा दी। बताए हमें क्या करना चाहिए।

समाधान-

प ने क्या कानूनी कार्यवाही की यह नहीं बताया। हमें लगता है कि आप ने कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की बल्कि आप राजस्व अधिकारियों को फिजूल मैं आवेदन देते रहे। अब आप की समस्या का हल न्यायालय द्वारा बंटवारे में है। आप ने यह भी नहीं बताया है कि दादाजी के देहान्त के बाद नामान्तरण भी हुआ है या नहीं। यदि नहीं हुआ है तो नामान्तरण कराना चाहिए।

यदि नामान्तरण हो गया है तो ठीक वर्ना नामान्तरण की कार्यवाही के साथ साथ आप को चाहिए कि आप राजस्व न्यायालय में अपनी जमीन के बंटवारे, खाते अलग अलग करने और अपने हिस्से पर पृथक कब्जा दिलाए जाने के लिए वाद प्रस्तुत करें। बाकी सभी हिस्सेदार और राज्य सरकार जरिए तहसीलदार पक्षकार बनेंगे। यह वाद तब तक चलेगा जब तक कि बंटवारा हो कर सब को अपने अपने हिस्से पर अलग कब्जा न मिल जाए।

समस्या-

रोहन ने लुधियाना, पंजाब से उत्तर प्रदेश राज्य की समस्या भेजी है कि-

मेरे नाना का देहान्त2015 में हुआ। वो हमारे साथ लुधियाना ही रहते थे। सारी संपत्ति हरदोई उत्तर प्रदेश में है। मृत्यु के पहले उन्हों ने वसीयत की इच्छा की थी, वो हमने करवाई। उन्हों ने 4 हिस्सों में अपनी सम्पति वसीयत की क्यों कि उनके 3 लड़के थे। चौथा हिस्सा उन्हों ने हमारी मां को वसीयत किया। उत्तराधिकार में उस सम्पति का नामान्तरण नायब की कोर्ट से 3 लोगो के हक़ में था। बाद में वसीयत दाखिल की हमने और तहसीलदार ने पंजीकृत वसीयत के आधार पर मेरी माँ का नाम भी नामान्तरण करवा दिया। समस्या ये है कि आर्डर के 70 दिन बाद एक मामा ने आर्डर के खिलाफ अपील की है। क्या अपील अवधि बाधित नहीं है?  क्या नामान्तरण हो जाने से भी हमें कोई लाभ नहीं मिलेगा? नाना ने चौथा हिस्सा हमारे नाम किया है क्या उस पे हम कब्जा नहीं ले सकते।  वसीयत के समय छोटे मामा साथ थे, उन्होंने हमारे हक़ में एफिडेविट भी लगाया था । क्या एसडीएम ऑर्डर बदल सकते हैं। हम को कब्जा कैसे मिलेगा एग्रीकल्चर लैंड का,वो 14 बीघा का है? उसका पार्टीशन कैसे करवाए? उसका अलग खाता कैसे करवाएँ?

समाधान-

दि  किसी नामान्तरण के मामले में वसीयत प्रस्तुत हो और  उसे चुनौती दी जाए तो तहसलीदार या नायब उस मामले में नामान्तरण नहीं कर सकता। वैसी स्थिति में नामान्तरण कराने के लिए न्यायालय ही जाना होगा। इस  मामले में आप ने जब वसीयत पेश की तो तहसलीदार ने अन्य पक्षकारों को बुलाया या नहीं या आपत्तियाँ ली या नहीं उस पर बहुत कुछ निर्भर करता है। अपील तो व्यथित पक्षकार का अधिकार है, इस कारण उस पर सुनवाई होगी और तभी उस का निर्णय होगा। अपील यदि अवधि बाधित है तो आप अपील में यह आपत्ति ले सकते हैं। यदि वसीयत में कोई खेोट नहीं है तो अपील भी आप की माँ के पक्ष में निर्णीत हो जाएगी। लेकिन अपील आप के हक में निर्णीत हो जाने मात्र से आप को जमीन का कब्जा नहीं मिल जाएगा। .

नामान्तरण से किसी भी कृषि भूमि में उस के हिस्सेदारो का हिस्सा निर्धारित हो जाता है लेकिन भूमि संयुक्त बनी रहती है उस पर सभी हिस्सेदारों का संयुक्त स्वामित्व बना रहता है। अलग अलग खाता करने के लिए और अपने खाते की भूमि पर अलग कब्जा प्राप्त करने के लिए आप की माता जी को संयुक्त स्वामित्व की भूमि के बंटवारे और अपने हिस्से पर कब्जा दिलाए जाने का दावा करना पड़ेगा। चूँकि नामान्तरण आज भी आप के पक्ष में है इस कारण आप यह दावा तुरन्त कर सकते हैं। आप को अपील का निर्णय होने का इन्तजार किए बिना बंटवारे का दावा कर देना चाहिए।

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