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Tag: अदालत

शुल्क देने पर भी पत्रिका न भेजने पर उपभोक्ता अदालत में कार्यवाही करें और पुलिस में धारा 420 आईपीसी की रिपोर्ट दर्ज कराएँ

 प्रिया शर्मा ने पूछा है- मैं इस समय बहुत ही बड़ी समस्या से गुजर रही हूँ। मैं ने पिछले साल दिसम्बर में एक मैगजीन के लिए फॉर्म भर
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अखबारों द्वारा अश्लील और धोखे वाले विज्ञापन प्रकाशित करना अपराध है

 अरुण कुमार झा ने पूछा है –  1. आए दिनों कई प्रकार के विज्ञापन दैनिक अखबारों में छपते हैं जैसे सेक्स शक्ति बढ़ाने का नुस्खा, इन विज्ञापनों में
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एक अभियुक्त की जमानत देने पर आप के क्या दायित्व होंगे?

 श्री नरेश सिह राठौड़  तीसरा खंबा के स्थाई पाठक हैं। पिछली पोस्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्हों ने पूछा है-  जब हम किसी व्यक्ति के न्यायिक हिरासत
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जनता की किस को पड़ी है?

पिछले तीन दिन से कोटा में रहने के बावजूद व्यस्तता रही और ‘तीसरा खंबा’ पर कोई पोस्ट नहीं जा सकी। इस बीच कानूनी सलाह चाहने वालों के अनेक
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विधि मंत्री सपने दिखाने का थिएटर चला रहे हैं?

अब केन्द्रीय विधि मंत्री कह रहे हैं कि केन्द्र सरकार एक ऐसे कानून को बनाने पर विचार कर रही है जिस से न्याय प्राप्त करना नागरिकों का मौलिक
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प्रतिवादी या अभियुक्त के पते की जानकारी के बिना उस के विरुद्ध मुकदमा चलाया जाना संभव नहीं है

 मैजिक विंग्स ने पूछा है – – – मैं भीलवाड़ा का रहने वाला हूं। मैं जयपुर के एक आदमी से 11 हजार रुपए मांगता था, उसने मुझे आईसीआईसीआई
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अदालतों की भाषा वही होनी चाहिए जो उस के अधिकांश न्यायार्थियों की भाषा है

आज भी यह एक प्रश्न हमारे माथे पर चिपका हुआ है कि अदालतों का काम किस भाषा में होना चाहिए? सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों का काम अंग्रेजी
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पर्याप्त संख्या में अदालतें स्थापित करने को धन की आवश्यकता है, इस बात को सरकार औऱ संसद के सामने रखने से कानून मंत्रालय को कौन रोक रहा है।

अदालतों की कमी अब सर चढ़ कर बोलने लगी है और कानून मंत्रालय सीधे-सीधे नहीं तो गर्दन के पीछे से हाथ निकाल कर कान पकड़ने की कोशिश कर
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संशोधित अंक-सूची के लिए उपभोक्ता अदालत में आवेदन किया जा सकता है

राज ने पूछा है —  सर जी,मैने देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में अपनी बी.ए. की अंक-सूची की मूल प्रति पिताजी का नाम सुधार करने हेतु दी थी।  लेकिन 3
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वकील के मुंशी से सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तक

सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश सरोश होमी कपाड़िया 12 मई को देश के 38वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ले चुके हैं।  वे 28.09.2012 तक इस
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