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अचल संपत्ति का दान शपथ पत्र से संभव नहीं, पंजीकृत दान पत्र आवश्यक है।

समस्या-

निशी ने उदयपुर राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

क्या 25 वर्ष पूर्व शपथ पत्र के माध्यम से बक्शीश या दान में दी गई अचल सम्पत्ति जिसे ग्रहिता ने स्वीकार कर निर्माण किया और वर्तमान में भी काबिज है को दानदाता अपने जीवन में किसी अन्य के नाम पंजीकृत कर सकता या सकती है? जिसका पता ग्रहिता को दाता की मौत के बाद चले, तो क्या उससे वह सम्पत्ति पंजीकृत कराये दूसरे व्यक्ति को मिल जायेगी या होगी जबकि दानग्रहिता जीवित है और सम्पत्ति पर काबिज है?

समाधान-

चल संपत्ति का दान या बख्शीश शपथ पत्र के माध्यम से नहीं हो सकता। दान और बख्शीश संपत्ति का अंतरण हैं और संपत्ति का मूल्य 100 रुपए से अधिक होने के कारण उस का पंजीकृत होना आवश्यक है। आप  दान या बख्शीश पंजीकृत विलेख से नहीं होने के कारण अमान्य है। लेकिन यह दस्तावेज बताता है कि दान प्राप्तकर्ता को उक्त संपत्ति का कब्जा खुद उस के मालिक ने दिया था। कब्जे को 25 वर्ष हो चुके हैं। 25 वर्ष का अबाधित कब्जा होने तथा उस पर ग्रहीता द्वारा निर्माण कार्य भी कराया गया है।

यदि उक्त संपत्ति मूल स्वामी के द्वारा किसी को पंजीकृत विलेख से हस्तांतरित कर भी दी गयी हो तब भी उस का कब्जा तो वास्तविक रूप से नहीं दिया गया है। हस्तांतरण से संपत्ति का स्वामित्व प्राप्त करने वाले को ग्रहीता से संपत्ति का कब्जा प्राप्त करने के लिए दीवानी वाद संस्थित करना होगा। यह वाद मियाद के बाहर होने के कारण निरस्त हो सकता है। क्यों कि 25 वर्ष का अबाधित कब्जा होने से ग्रहीता का कब्जा प्रतिकूल हो चुका है और उस से संपत्ति का कब्जा मूल स्वामी या हस्तान्तरण से स्वामित्व प्राप्त व्यक्ति मियाद के बाहर होने से प्राप्त करने में अक्षम रहेगा।

पिता से अपने नाम गिफ्ट डीड निष्पादित करवा कर पंजीकृत कराएँ।

Giftसमस्या-

नन्दकिशोर चांडावत ने किशनगढ़, राजस्थान से पूछा है-

मेरे पिताजी का स्वअर्जित मकान है, हम दो भाई हैं, मैं ने अपने बड़े भाई को पिताजी और परिवार के कहने पर भुगतान कर दिया है, अब मकान मेरे नाम कैसे होगा।

 

 

समाधान-

भी आप के पिताजी मौजूद हैं तो वही मकान के स्वामी हैं। आप ने उन के कहने पर बड़े भाई को धनराशि अदा की है उस का सबूत आप को रखना चाहिए था। यदि पिता और परिवार का वायदा था कि इस पर मकान आप के नाम करवा दिया जाएगा। तो आप पिता से कहिए कि वे आप के नाम गिफ्ट डीड निष्पादित कर पंजीकृत करवा दें।

गिफ्ट डीड पंजीकृत करवाने में केवल मात्र 2.5 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी है। आप को गिफ्ट डीड पंजीकृत करवाने का खर्च उठाने को तैयार रहना चाहिए। संपत्ति हस्तान्तरण का इस से बेहतर तरीका इस मामले में नहीं है।

अपनी वसीयत जीवनकाल में कभी भी परिवर्तित की जा सकती है।

वसीयत कब करेंसमस्या-

अंकित वर्मा ने कसारावाड, खरगौन, मध्य प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिता के कुल चार भाई हैं, तीन भाई बाहर शहर में रहते हैं वे तीनों अपने मकान में रहते थे जो चारों भाइयों के द्वारा कमायी गयी पूंजी का है। उस में से एक भाई को उन्होंने मकान से निकाल दिया था अब वे किराये के मकान में रहते हैं। मेरे पिता और हम गांव में रहते हैं। हम जिस मकान में रहते हैं वो मेरी दादी के नाम पर है, मेरी दादी भी हमारे साथ रहती है। उन की उम्र हो चुकी है। अब मेरे पिता और उनका भाई जो किराये के मकान में रहते है वो ये मकान अपने नाम करवाना चाहते हैं। वो ये मकान उनके दोनों भाइयो की बिना सहमति के कैसे करवा सकते हैं?

समाधान-

हर में आप का जो मकान है जिस में दो भाई रहते हैं उस के बारे में तो आप के पिता और चाचा कुछ करना नहीं चाहते। वे चाहते हैं कि गाँव में जो मकान दादी के नाम है वह आप के पिता और शहर में किराए पर रहने वाले चाचा को मिल जाए।

स का सर्वोत्तम तरीका यह है कि आप के पिता और ये वाले चाचा दादी से अपने नाम गाँव वाले मकान का दान पत्र निष्पादित करवा कर उस का पंजीयन उप पंजीयक के कार्यालय में करवा लें। इस से गाँव का मकान उन दोनो के स्वामित्व में तुरन्त आ जाएगा। लेकिन इस में गाँव के मकान की वर्तमान वैल्युएशन के आधार पर स्टाम्प ड्यूटी व पंजीयन खर्च देना होगा। लेकिन यह सब से अधिक सुरक्षित तरीका है।

दि वे दोनों इस खर्च को बचाना चाहते हैं तो दादी से उक्त गाँव के मकान को अपने नाम वसीयत करवा कर उस वसीयत का पंजीयन उप पंजीयक के कार्यालय में करवा लिया जाए। इस से दादी के जीवनकाल के उपरान्त यह गाँव वाले मकान पर दोनों भाइयों का स्वामित्व स्थापित हो जाएगा। लेकिन दादी इस वसीयत को अपने जीवन काल में कभी भी बदल सकती है या निरस्त करवा सकती है। इस कारण यह उतना सुरक्षित तरीका नहीं है।

अचल संपत्ति दान कैसे करें?

gift propertyसमस्या-

सरोज मंडल ने सिमरा, बिहार से पूछा है-

मेरे तो बेटी है, बेटा नहीं है। मैं चाहता हूँ कि अपनी संपत्ति अपने भतीजे के नाम दान कर दूँ। उस के लिए दान पत्र कैसे लिखवाएँ? सादा कागज पर लिख कर दें या फिर रजिस्ट्री कराएँ। क्या दानपत्र की रजिस्ट्री कराना जरूरी है? इस के नियम क्या हैं¿

समाधान-

दि संपत्ति आप की स्वअर्जित संपत्ति है तो आप उसे भतीजे को दान कर सकते हैं। लेकिन यदि संपत्ति पुश्तैनी है तो 2005 से पुश्तैनी संपत्ति में बेटी का अधिकार है। यदि आप की एक ही बेटी है तो जितनी संपत्ति है उस में आधा हिस्सा आप की बेटी का है। आधा हिस्सा आप का है। आप केवल अपना हिस्सा भतीजे को दान कर सकते हैं। बेटी वाला आधा हिस्सा नहीं।

दान पत्र से अचल संपत्ति का हस्तान्तरण ट्रांसफर ऑफ प्रोपर्टी है। इस कारण इस का पंजीयन कराना जरूरी है। इस के पंजीयन में उतना ही शुल्क और स्टाम्प लगेगा। जितना उस जमीन को विक्रय करने में लगता है। इस की जानकारी आप अपने इलाके के उप पंजीयक कार्यालय से कर सकते हैं। सभी राज्यों में अलग अलग स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क की दरें भिन्न हैं।

क बात ध्यान रखें कि आप ने यदि संपत्ति एक बार दान कर दी तो उस दान को आप रद्द नहीं कर सकते। यदि आप को बाद में लगा कि भतीजा सही नहीं है और आप ने उस के नाम संपत्ति को दान कर के गलती की तो आप उस दान पत्र को रद्द कर के संपत्ति को वापस प्राप्त नहीं कर सकते। भतीजा आप के जीवन में उक्त संपत्ति के सभी लाभ आप को देने से भी इन्कार कर सकता है। इस के स्थान पर यदि आप भतीजे को संपत्ति देना ही चाहते हैं तो उस संपत्ति की वसीयत कर उसे पंजीकृत करा दें। इस से आप के भतीजे को वह संपत्ति आप के जीवनकाल के उपरान्त मिलेगी। आप को यह भी सुविधा रहेगी कि आप के जीवनकाल में आप उक्त संपत्ति के लाभ लेते रहेंगे और स्वामी बने रहेंगे। आप का मन बदले तो अपने जीवनकाल में आप उक्त वसीयत को रद्द भी कर सकते हैं और बदल भी सकते हैं।

दानपत्र की जानकारी नहीं तो बँटवारे का वाद प्रस्तुत करें।

justiceसमस्या-

दीपक मंडल ने शंकरपुर बिहार से पूछा है-

मेरे नाना जी के चार बेटियाँ हैं बेटा कोई नहीं। मेरे नाना जी दो भाई थे। उन के छोटे भाई के तीन बेटे और एक बेटी है। मेरे बड़े मामा (छोटे नाना के बड़े बेटे) कहते हैं कि मेरे नानाजी ने मरने के चार साल पहले सारी संपत्ति का दानपत्र उन के नाम लिख दिया था। जब कि नानाजी के जीवन काल में इस दानपत्र के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं थी। दानपत्र के बारे में भी भी कोई ठीक ठीक जानकारी हमें नहीं है। नानाजी की मृत्यु को 8 वर्ष हो गए हैं। अब हम क्या कर सकते हैं?

समाधान-

दि आप के नानाजी ने कोई दानपत्र नहीं किया था तो वैसी स्थिति में आप की माताजी आप के नानाजी की उत्तराधिकारी हैं। आप की माताजी को चाहिए कि वे अपने पिता की संपत्ति के बंटवारे के लिए दीवानी वाद सिविल न्यायालय में प्रस्तुत करें। इस वाद का सम्मन आप के नानाजी के उत्तराधिकारियों को और आप के छोटे नानाजी को जाएगा। यदि छोटे नानाजी अब नहीं हैं तो उन के उत्तराधिकारियों को जाएगा। उन्हें उस वाद में अपना उत्तर प्रस्तुत करना होगा। तब बड़े मामा यदि कोई दानपत्र अस्तित्व में हुआ तो उस के आधार पर उन का पक्ष रखेंगे और दानपत्र न्यायालय में प्रस्तुत करेंगे।

क बार दानपत्र न्यायालय में सब के सामने आ जाने पर उस की जाँच की जा सकती है और उसे उचित आधारों पर चुनौती दी जा सकती है। यदि दानपत्र उचित नहीं पाया गया तो आप की माता जी को संपत्ति में उन का अधिकार प्राप्त हो सकता है।

दान-पत्र दानकर्ता की इच्छा पर भी निरस्त नहीं हो सकता।

lawसमस्या-

जयन्ती चरण झा ने जहाँगीरपुर, बिहार से पूछा है-

मेरे बुआजी ने मेरे पिताजी को जमीन दी थी जो कि मेरे फूफाजी के नाम है। जमीन मेरे पिताजी के नाम से पंजीकृत नहीं हुई है। इस जमीन पर धान की खेती होती है। क्या इस जमीन को मेरी बुआ जी मेरे पिताजी के नाम पर दान कर सकती हैं? इस पर कितना खर्चा आएगा? क्या वे कभी इस जमीन पर अपना दावा कर सकती हैं?

समाधान-

प ने बताया कि आप की बुआ ने जो जमीन पिताजी को दी है वह फूफाजी के नाम है। यदि फूफाजी जीवित हैं तो केवल फूफाजी ही अपनी जमीन को किसी को हस्तान्तरित कर सकते या दान कर सकते हैं आप की बुआ जी नहीं कर सकतीं। यदि अब फूफाजी नहीं हैं और उन की एक मात्र उत्तराधिकारी आप की बुआ जी हैं तो जमीन उत्तराधिकार में आप की बुआ जी को मिल चुकी है और वे आप के पिताजी के नाम दान पत्र पंजीकृत करवा सकती हैं। एक बार किसी संपत्ति का दान पत्र पंजीकृत हो जाने के बाद उस दान पत्र को निरस्त नहीं किया जा सकता।

लेकिन आप के फूफाजी जीवित हैं तो केवल वे ही उस जमीन को विक्रय या दान कर सकते हैं जो केवल पंजीकृत विलेख के माध्यम से ही हो सकता है।

क दान पत्र के पंजीकरण में उतना ही खर्च आता है जितना कि उस जमीन को बेचने पर बेचान की रजिस्ट्री कराने में आता है। बिहार में यदि दान पत्र पर स्टाम्प ड्यूटी कम हो तो आप को उप रजिस्ट्रार के कार्यालय जा कर इस का पता करना चाहिए।

भूखंड पुत्रवधुओं को हस्तान्तरित करने के लिए दान पत्र या वसीयत निष्पादित व पंजीकृत कराएँ

समस्या-

बिहार से राजेश कुमार वर्मा ने पूछा है –

मेरी माता जी के नाम नगरीय क्षेत्र में एक आवासीय भूखंड है। माताजी विधवा हैं। मरे दो भाई और और एक विवाहित बहिन है। मेरी बहिन अपने पति के साथ निवास करती है। मैं चाहता हूँ कि उक्त भूखंड मेरी और और मेरे छोटे भाई की पत्नियों के नाम पंजीकृत हो जाए। मेरी माता जी सहमत हैं। प्रक्रिया क्या होगी?

समाधान-

House demolishingकिसी भी हिन्दू स्त्री की संपत्ति उस की निजि संपत्ति होती है वह उसे किसी को भी विक्रय कर सकती है, दान (Gift) कर सकती है और वसीयत कर सकती है। यदि वे ऐसा नहीं करेंगी तो वह संपत्ति उन के देहान्त के उपरान्त उन के उत्तराधिकारियों को, आप की माताजी के मामले में आप और आप के भाईर बहिनों को समान रूप से प्राप्त हो जाएगी। यदि आप की माता जी चाहती हैं कि उन का यह भूखंड उन के जीवनकाल में ही उन की पुत्रवधुओं के नाम हस्तान्तरित हो जाए तो उन्हें इस का दान पत्र  (Gift Deed) निष्पादन करना होगा। इसे उप पंजीयक के कार्यालय में पंजीकृत कराना होगा। इस पर लगभग उतना ही खर्च आएगा जितना किसी संपत्ति को खरीदने पर उस का विक्रय पत्र पंजीकृत कराने पर आता है। खर्चे की इस राशि का मूल्यांकन आप अपने क्षेत्र के उप पंजीयक कार्यालय में पता कर सकते हैं। यह खर्च संपत्ति के बाजार मूल्य का 8 से 12 प्रतिशत तक का हो सकता है।

दि आप इस खर्चे से बचना चाहें तो आप की माता जी उक्त भूखंड की वसीयत निष्पादित कर उसे उपपंजीयक के कार्यालय में पंजीकृत करवा सकती हैं। इस में मात्र एक-दो हजार रुपयों का खर्च आएगा। लेकिन उस स्थिति में दोनों पुत्र वधुएँ आप के माता जी के देहान्त पर ही उक्त भूखंड की स्वामी बन सकेंगी। माता जी के जीवन काल में वह भूखंड उन की संपत्ति बना रहेगा। वसीयत को आप की माता जी अपने जीवन काल में दूसरी वसीयत निष्पादित कर कभी भी परिवर्तित कर सकेंगी। किसी भी व्यक्ति की किसी संपत्ति के संबंध में की गई अंतिम वसीयत ही मान्य होगी। आप की माताजी के दृष्टिकोण से वसीयत निष्पादित कर पंजीकृत करवाना बेहतर है इस से उन में अपने जीवनकाल में आत्मविश्वास बना रहेगा। इस के निष्पादन में कोई विशेष खर्च भी नहीं होगा।

वसीयत से संपत्ति जीवनकाल के बाद ही हस्तांतरित होगी तथा वसीयतकर्ता अपने जीवन काल में वसीयत बदल सकता है

समस्या-

जिला भीलवाड़ा, राजस्थान से छीतरलाल गाडरी ने पूछा है-

मेरे काकाजी ने मुझे बचपन से गोद लिया था तथा उनके एक बेटी भी है! मैं बचपन से उनके घर पर रह रहा हूँ तथा उन की जमीन-जायदाद काम में ले रहा हूँ।  २१ साल पहले मेरे काकाजी की मृत्यु हो चुकी है।  इसके बाद मेरे बडे भाई ने धोखे से सारी जायदाद काकाजी की बेटी के नाम करवा दी तथा मुझे कुछ भी हिस्सा नहीं मिला।  मेरी बहन (काकाजी की बेटी) ऐसा नही चाहती है तथा वह सारी जायदाद मेरे नाम करवाना चाहती है इसलिए उसने सारी जायदाद मुझे दे दी।  १२ साल पहले उसने ३ बीघा ३ बिस्वा जमीन मेरे नाम करवा दी।  शेष ५ बीघा जमीन उसके नाम पर ही है।  शेष जमीन को भी वो मेरे नाम करवाना चाहती है।  मेरे पास ऐसा कोई लिखित प्रमाण नहीं है जिससे मैं बता सकूँ कि मुझे गोद लिया गया है सिवाय बहन (काकाजी की बेटी) के मौखिक कथन के।  क्या शेष जमीन की रजिस्ट्री कराने के अलावा कोई और विकल्प है जिससे बहन (काकाजी की बेटी) की मृत्यु के बाद या पहले जमीन मेरे नाम आ जावे?

समाधान

प की समस्या का समाधान आसान है। आप अपनी बहिन से उस कृषि भूमि को अपने नाम तथा उस का जीवन काल में ही आप की मृत्यु हो जाने पर आप के उत्तराधिकारियों के नाम वसीयत करवा लें और इस वसीयत को उपपंजीयक के कार्यालय में पंजीकृत करवा लें।  इस वसीयत में यह भी लिखाएँ कि उस के पिता  जी ने आप को गोद ले लिया था लेकिन उस का कोई लिखित सबूत नहीं होने के कारण सारी सम्पत्ति उसे मिल गई थी। इस वसीयत के कारण आप की बहिन के जीवन काल में यह कृषि भूमि उसी के स्वामित्व की रहेगी।  बहिन के जीवनकाल के बाद इस कृषि भूमि का नामान्तरण अपने नाम करवा सकते हैं। यदि बहिन के जीवनकाल में ही आप का देहान्त हो जाए तो आप के उत्तराधिकारी इस वसीयत के आधार पर उन के नाम कृषि भूमि का नामान्तरण करवा सकेंगे।

स में केवल यही एक दुविधा आप को बनी रहेगी कि बहिन अपने जीवन काल में इस वसीयत को बदल न दे।  क्यों कि आप के बड़े भाई का यह उद्देश्य रहा हो सकता है कि अभी जमीन बहिन के नाम करवा दी जाए।  बाद में उस से  अपने नाम वसीयत करायी जा सकती है।  यदि बहिन वसीयत न करे तो वह जमीन आप दोनों भाइयों को आधी आधी मिल सकती है।  लेकिन आप को बहिन पर पूरा विश्वास है तो आप वसीयत से आप का यह काम हो जाएगा।   सभी बुरी संभावनाओं  से बचने के लिए आप चाहते हैं कि अभी यह कृषि भूमि आप के नाम हो जाए तो आप को अपने नाम बहिन से दान-पत्र पंजीकृत करवा कर उक्त भूमि अपने नाम हस्तांतरित करानी होगी। इस से आप तुरंत अपने नाम नामांतरण खुलवा सकते हैं। बस इस में आप को भूमि की कीमत पर स्टाम्प ड्यूटी अदा करनी होगी।

यदि अविभाजित संपत्ति दान कर दी जाए तो माना जाएगा कि दानकर्ता ने केवल अपना हिस्सा दान किया है

समस्या –

शुकुल बाजार, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश से आशुतोष तिवारी ने पूछा है –

मेरी नानी की 5 बेटियाँ है, अभी वह जीवित है!  उन्होंने अपनी सबसे छोटी बेटी को अपनी सारी संपत्ति हिबानामा (दानपत्र) करके दे दी है। नाना जी जीवित नहीँ है।  संपत्ति नानी को नाना जी से उत्तराधिकार में मिली हुई है।  बाकी 4 बेटियों ने जिन्हें नाना जी से उत्तराधिकार में कुछ नहीं मिला कोर्ट में दावा कर रखा है,  क्या ये चारों भी उस संपत्ति की हक़दार हैं?

समाधान-

प का प्रश्न बहुत स्पष्ट नहीं है। संपत्ति नाना जी की थी।  यदि नाना जी ने उक्त संपत्ति की वसीयत नानी के नाम कर दी होती तो फिर वह संपत्ति नानी की व्यक्तिगत संपत्ति होती और वे किसी को भी दानपत्र, विक्रय या अन्य किसी रीति से हस्तांतरित कर सकती थीं।   लेकिन आप के अनुसार उन्हें वह संपत्ति उत्तराधिकार में प्राप्त हुई है।  यदि नाना जी ने कोई वसीयत नहीं की थी तो उन की संपत्ति उन के सभी उत्तराधिकारियों अर्थात नानी और नाना की सभी बेटियों और बेटा है तो उस को भी समान अधिकार प्राप्त हुआ है।  यदि नानी ने नाना जी की समूची संपत्ति को अपना समझ कर हिबानामा (दानपत्र) कर दिया है तो वह गलत है।  नानी अधिक से अधिक अपने हिस्से को दान कर सकती हैं, उस से अधिक कुछ भी नहीं।   बेटियों को उक्त संपत्ति में उसी दिन अधिकार प्राप्त हो गया था जिस दिन नाना जी का देहान्त हो गया था।  यदि नाना की बेटियों ने उस संपत्ति के विभाजन और हिबानामा को निरस्त करने का वाद प्रस्तुत किया है तो वे अवश्य सफल होंगी।

स प्रकरण में  नानी ने अपने हिस्से को छोटी बेटी को दान कर दिया है। छोटी बेटी का उक्त संपत्ति में अपना स्वयं का हिस्सा भी था।  इस तरह छोटी बेटी को अपने हिस्से के साथ अपनी माँ का हिस्सा भी प्राप्त हो जाएगा।  छोटी बेटी को अन्य बहनों की अपेक्षा संपत्ति का दुगना हिस्सा प्राप्त हो सकता है।

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