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पुश्तैनी संपत्ति में हिस्सेदार को अपने हिस्से की भूमि का विक्रय करने का अधिकार है।

समस्या-

नीरज ने इन्दौर मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे चाचा की पुश्तैनी जमीन है, उनके कोई संतान नहीं थी और उनका देहांत हो गया। उन्होंने अपनी जमीन मेरे नाम से ‍रजिस्ट्री कर दी थी अर्थात रजिस्ट्री में बेचे जाने का उल्लेख किया गया है।‍ मतलब उसको मेरे द्वारा खरीदा गया है जिसे चार साल हो गये हैं।  उस जमीन पर मेरे दूसरे चाचा के लडके ने दावा कर दिया है तो क्या वह जमीन मेरे दूसरे चाचा के लडके भी ले सकते है।

समाधान-

प के चाचा की जमीन पुश्तैनी थी और दूसरे चाचा के लड़के ने उस में हिस्से का दावा किया है। जब कि आप के चाचा अपनी जमीन को अपने जीवन काल में ही आप को विक्रय कर चुके थे।

किसी भी व्यक्ति को पुश्तैनी जमीन में अपने हिस्से को भी बेच देने का अधिकार होता है। चाहे उस जमीन का बँटवारा हो कर वह उस के अलग खाते में आई हो या नहीं आई हो। वह अपने हिस्से की जमीन को बेच कर उस के अधिकार से वंचित हो सकता है। यदि जमीन का बँटवारा हो कर खाता न खुला हो तो अलग खाता खोले जाने के लिए खरीददार बँटवारे का दावा कर सकता है और बँटवारा करवा कर अपना हिस्सा अलग करवा सकता है।

आप के मामले में ऐसा लगता है कि पुश्तैनी जमीन का बंटवारा हो कर वह आप के चाचा के अलग खाते में आ गयी थी। उसे बेचने का उन्हें अधिकार था। उन्हों ने अपने जीवनकाल में ही वह जमीन आप को बेच दी थी। इस प्रकार आप उनके जीवनकाल में ही उक्त जमीन के स्वामी हो चुके थे। आप के दूसरे चाचा के लड़के का दावा सही नहीं है। इस वाद में आप को अच्छा वकील कर के मुस्तैदी से मुकदमा लड़ना चाहिए। आप से उस जमीन को कोई नहीं ले सकेगा।

विक्रेता वही वस्तु विक्रय कर सकता है जो उस के पास है।

agreementसमस्या-

गजेन्द्र कुमार मीना ने ऑफिस नं. 9, प्रथम तल डीडीए मार्केट, जीएच-4 पश्चिम विवाह दिल्ली से राजस्थान राज्य की समस्या भेजी है कि-

मैं ने अभी एक अलवर राजस्थान में एक जमीन खरीदी है 110 वर्ग गज, परन्तु रजिस्ट्री नही हुई है, नोटरी का एग्रीमेंट हुआ है। रजिस्ट्री में लिखा गया है कि ये जमीन मंदिर माफ़ी की आराजी महाराज की है, जिस पर विक्रेता का कब्जा है। क्या आप मुझे बतायेंगे कि मंदिर माफ़ी (नाम) की जमीन की रजिस्ट्री नहीं होती है तो मेरा एग्रीमेंट कानून जायज है या नहीं?

समाधान-

प इतना तो समझते ही होंगे कि जो चीज आप की नहीं है उसे आप बेच नहीं सकते। यदि आप किसी ऐसी वस्तु को मुझे बेचने का करार करते हैं जो आप की नहीं है तो वह करार सही नहीं होगा। लेकिन वह वस्तु आप के कब्जे में है और जब तक वह आप के कब्जे में है आप उस के माध्यम से हर वर्ष कुछ कमाई कर लेते हैं या उस वस्तु का उपयोग कर सकते हैं तो वैसी स्थिति में उस वस्तु का कब्जा भी मूल्यवान हो उठता है। यदि आप यह कहते हुए कि इस वस्तु पर मेरा स्वामित्व तो नहीं है लेकिन इस का कब्जा मेरे पास है और यह वस्तु मैं आप को दे रहा हूँ तो वह वस्तु मेरे स्वामित्व की तो नहीं होगी। लेकिन जब तक वह मेरे कब्जे में रहेगी मैं उस का उपयोग कर सकता हूँ या उस से लाभ कमा सकता हूँ।

ऐसी ही स्थिति आप के इस एग्रीमेंट की है। विक्रेता आप को स्पष्ट रूप से कह रहा है कि उस जमीन पर उस का स्वामित्व नहीं है, केवल कब्जा है जिसे वह आप को बेच रहा है। अब आप के पास जब तक वह जमीन कब्जे में है आप उस का उपयोग कर सकते हैं। इस तरह आप उस जमीन का स्वामित्व नहीं अपितु उस का केवल कब्जा खरीद रहे हैं।

जहाँ तक रजिस्ट्री का प्रश्न है तो आप के इस एग्रीमेंट की रजिस्ट्री हो भी सकती है। क्यों कि इस एग्रीमेंट में कुछ बी नाजायज या गैर कानूनी नहीं है। उस व्यक्ति के पास केवल कब्जा था और वह आप को वही विक्रय कर सकता है। लेकिन एग्रीमेंट या विक्रय पत्र के पंजीयन से भी आप को केवल कब्जा ही मिलेगा न कि उस जमीन का स्वामित्व। उस जमीन का स्वामित्व तो तभी मिल सकता है जब कि उस जमीन का स्वामी उस वस्तु को आप को विक्रय कर दे। जब तक उस जमीन को आप से वापस लेने के लिए उस का स्वामी कोई कानूनी कार्यवाही कर के आप से उस का कब्जा नहीं ले लेता है तब तक आप उस जमीन का उपयोग कर सकते हैं।

विक्रय से पहले भूखंड का नामान्तरण और विक्रय की अनुमति प्राप्त कर लें …

real5समस्या-

आलोक शर्मा ने भरतपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी का देहांत होगया है। पिताजी के नाम से एक प्लाट है जो कि नगर विकास न्यास से रूपान्तरित है, जिस पर मकान बना हुआ है। पिताजी की कोई वसीयत नहीं है। मेरी माँ, मैं और मेरा एक भाई मकान को बेचना चाहते हैं। कैसे बेचें बताने का कष्ट करें।

 

समाधान-

किसी भी संपत्ति को उस के स्वामी विक्रय कर सकते हैं। उक्त भूखंड के स्वामी आप के पिता थे। उन के देहान्त के साथ ही उन के उत्तराधिकारी उक्त भूखंड के स्वामी हो चुके हैं।

हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार पत्नी, माता, पुत्र व पुत्रियाँ किसी व्यक्ति के उत्तराधिकारी हैं। आप के पिता के मामले में आप की माता जी और आप के सभी भाई व बहनें पिता जी के उत्तराधिकारी हैं। यदि आप की दादी का देहान्त हो चुका है और आप के व आप के भाई के अतिरिक्त कोई भाई बहन नहीं हैं तो आप की माताजी, आप व भाई संयुक्त रूप से विक्रय पत्र निष्पादित कर उक्त संपत्ति को क्रेता को हस्तान्तरित कर सकते हैं।

प का भूखंड नगर विकास न्यास से रूपान्तरित है। इस का अर्थ यह है कि वह अब नगर विकास न्यास से आप के पिता के नाम लीज पर है। आप को उक्त भूखंड को विक्रय करने के पहले लीज का नामान्तरण आप के पिता के उत्तराधिकारियों के नाम कराएँ। इस के लिए नगर विकास न्यास को आवेदन करें। उत्तराधिकारियों के नाम नामान्तरण होने के उपरान्त नगर विकास न्यास से उक्त भूखंड को विक्रय करने की अनुमति नगर विकास न्यास को आवेदन देकर प्राप्त करें। आप दोनों आवेदन एक साथ कर सकते हैं। नामान्तरण और विक्रय की अनुमति प्राप्त कर लेने से आप को मकान का अच्छा मूल्य मिल जाएगा।

क्रेता सावधान

housing colonyसमस्या-

भूपेन्द्र सिंह ने रुद्रपुर, उत्तराखंड से समस्या भेजी है कि-

हाँ मैं रहता हूँ वहाँ एक रियल एस्टेट डेवलपर कंपनी एक कॉप्लेक्स बना कर सेल कर रही है। मैं ने जब वहाँ जा कर उस प्रोजेक्ट के बारे में पता किया तो पता चला कि जिस ज़मीन पर वो बिल्डिंग बना कर सेल की जा रही है वो ज़मीन उनकी मालिकी की नहीं है बल्कि 99 वर्ष की लीज़ पर मिली है। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या बिल्डर ऐसा कर सकता है कि जिस ज़मीन का वो मालिक नहीं है उस ज़मीन पर फ्लेट बना कर लोगों को विक्रय कर दे? क्योंकि जो लोग फ्लेट ख़रीदेंगे ऐसा समझ रहे हैं कि उन्हें उस फ्लेट की मालिकी मिल रही है। क्या कोई कानूनी कार्यवाही की जा सकती है बिल्डर के खिलाफ?

समाधान-

कृषि भूमि के संबंध में सिद्धान्त यह है कि सारी जमीन सरकार की है और कृषक उस का केवल किराएदार कृषक है जो लगान के रूप में किराया देता है। जब किसी नगर या गाँव का विस्तार होता है तो इसी कृषि भूमि पर होता है। ऐसी कृषि भूमि की किस्म को बदला जाता है वह कृषि भूमि से नगरीय/आबादी भूमि में परिवर्तित हो जाती है और नगर विकास न्यास, नगर पालिका या ग्राम पंचायत को सौंप दी जाती है। उस भूमि का की स्वामी सरकार होती है ये संस्थाएँ केवल उसे रेगुलेट करती हैं। अब ऐसी भूमि को सरकार कभी भी विक्रय नहीं करती। अपितु उसे 99 वर्ष की लीज पर ही स्थानान्तरित करती है। 99 वर्ष के लिए ही लीज पर ही विक्रय की जाती है। बाद में उस पर यदि कोई ऐसा भवन बन जाता है जिस की आयु 99 वर्ष के बाद भी बनी रहती है तो सरकार उस लीज को आगे नवीकरण कर सकती है।

कोई भी ऐसी भूमि पर जो लीज पर प्राप्त की गई है प्रोजेक्ट बना सकता है और नगरीय निकाय से अनुमति प्राप्त कर के फ्लेट बना कर विक्रय कर सकता है। जब फ्लेट विक्रय होता है तो उस भूमि पर बने फ्लेटों के स्वामियों के पास उस इमारत की पूरी जमीन के उतने अंश का स्वामित्व होता है जितने अंश पर उन का फ्लेट बना होता है।

वैसे भी आजकल जो इमारतें बन रही हैं वे कंक्रीट के उपयोग से बनती हैं जिन की उम्र् 99 वर्ष से कम की होती है। कोई भी बहुमंजिली इमारत 90 वर्ष से अधिक उम्र की नहीं होती। इस अवधि के बहुत पहले ही विकास की आवश्यकताओं के अनुरूप उस बिल्डिंग को गिराया जा कर उस के स्थान पर नया निर्माण होने लगता है। वैसी स्थिति में उस बिल्डिंग के फ्लेट स्वामियों को उन के फ्लेट की कीमत से बहुत अधिक मुआवजा प्राप्त हो जाता है। आज कल यह सब सब की जानकारी में हो रहा है। प्रोजेक्ट निर्माता बिल्डर किसी तरह की कोई बेईमानी नहीं कर रहा है उस के दस्तावेजों में यह स्पष्ट है कि भूमि लीज की है। आप ने जानकारी करने का प्रयत्न किया तो आप को पता लग गया कि जमीन लीज की है, फ्री होल्ड की नहीं है। फिर ‘क्रेता सावधान’ का सिद्धान्त तो है ही। क्रेता जब भी कोई संपत्ति क्रय करे तब सब कुछ जाँच परख कर करे। ऐसे बिल्डर के विरुद्ध कोई कानूनी कार्यवाही इस आधार पर किया जाना संभव नहीं है।

हस्तान्तरण विलेख के पंजीयन के बिना आप स्थावर/अचल संपत्ति के स्वामी नहीं हो सकते।

basement constructionसमस्या-

कैथल, हरियाणा से यश ने पूछा है-

मैंने कुछ जमीन लगभग २० वर्ष पहले अनुसूचित जाति के लोगो से खरीदी है, उस जमीन की असली मालिक ग्राम पंचायत है। यह जमीन ग्राम पंचायत द्वाराअनुसूचित जाति के लोगों को दी गयी थी| अनुसूचित जाति की जमीन होने के कारनउसकी रजिस्ट्री नहीं हो रही है। मैंने कुछ लोगों से पंचायत में उसकेखरीदने और उसके कब्जे का साधारण कागज पर लेख लिया है जिस में गवाह के रूप मेंग्राम पंचायत की मुहर भी सरपंच द्वारा लगाई हुई है तो कुछ स्टाम्प पेपर परनोटरी द्वारा अटेस्टेड है। अब मैं उस जमीन पर घर बनाना चाहता हूँ उस जमीन परमेरा कब्ज़ा भी तभी से है जब से वो जमीन मैंने खरीदी है। यदि मैं उस जमीन परघर बना लूँ तो कोई दुविधा तो नहीं होगी।

समाधान-

ह ठीक है कि आप ने जमीन खरीदी है जिस के सबूत के रूप में आप के पास सादे कागज पर विक्रय विलेख है और स्टाम्प पर नोटेरी का अटेस्टेशन भी है। पर ये सब मात्र एग्रीमेंट हैं। इन दस्तावेजों से अचल संपत्ति का हस्तान्तरण नहीं हो सकता। इन दस्तावेजों के आधार पर इतना तो माना जा सकता है कि आप ने उक्त जमीन खरीदने का सौदा किया। उस की कीमत अदा कर दी और कब्जा प्राप्त कर लिया। बीस साल से आप का कब्जा है। लेकिन आप किसी भी तरह उस के स्वामी नहीं हुए हैं। क्यों कि किसी भी स्थावर संपत्ति का स्वामित्व केवल रजिस्टर्ड हस्तान्तरण पत्र के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।

मुझे लगता है कि इस जमीन के विक्रय पत्र का पंजीयन न हो सकने का कारण यह नहीं है कि वह जमीन अनुसूचित जाति के लोगों की है। इस का मूल कारण यह होना चाहिए कि जमीन उन्हें पंचायत ने मकान बना कर रहने को दी। उन्हों ने मकान नहीं बनाया बल्कि उस का कब्जा आप को बेच दिया। पंचायत ने उन्हें कभी उस का स्वामित्व हस्तान्तरित ही नहीं किया था। जिस से वे उस के मालिक नहीं बन सके। जो व्यक्ति खुद किसी संपत्ति के मालिक नहीं हैं वे कैसे आप को स्वामित्व हस्तान्तरण कर सकते हैं। यदि ग्राम पंचायत उन्हें पट्टा जारी करती और वे उस पट्टे का पंजीयन करवा लेते तो वे उस जमीन के स्वामी हो सकते थे। तब वे आप को वह भूमि हस्तान्तरित कर के उस का पंजीयन करवा सकते थे।

ब आप मकान तो बना सकते हैं, हो सकता है उस में कोई भौतिक बाधा खड़ी न हो। लेकिन ग्राम पंचायत जो कि सरकार की प्रतिनिधि है। सरकार के किसी निर्णय के आधार पर उस भूमि पर से उस के अनुसूचित जाति के लोगों का आवंटन रद्द कर सकती है। वैसी स्थिति में आप का उक्त जमीन पर कब्जा भी अवैध हो सकता है। उस पर से आप को हटने के लिए भी कहा जा सकता है। हालांकि ऐसे मामलों में अक्सर यह होता है कि सरकार या ग्राम पंचायत उक्त भूमि का प्रीमियम ले कर कब्जेदार को पट्टा जारी कर देती है और कब्जेदार उस पट्टे का पंजीकरण करवा कर लीज होल्ड स्वामित्व प्राप्त कर लेता है।

जबरन कब्जा करने के प्रयास के विरुद्ध निषेधाज्ञा का वाद कर राहत प्राप्त करने का प्रयत्न करें।

House demolishingसमस्या-

राजेश कुमार ने लखनऊ, उत्तर प्रदेश से पूछा है-

क प्लॉट की रिजिस्ट्री मेने आमने नाम २२ जनवरी 2014 को करवाई थी और उस परतुरंत बाउंड्री बनवाकर कब्जा प्राप्त कर लिया था, यह प्लॉट उत्तर प्रदेशकी राजधानी लखनउ मे स्थित है. अभी कुछ दिन पहले एक दारोगा जी ने आकर एकपंजीकृत एग्रीमेंट दिखाया जो की ७ जनवरी 2013 को किया गया था जिसके मुताबिकविक्रेता ने यह प्लॉट उससे 8 लाख रुपये मे बेचने का इकरारनामा किया था, क्योंकि प्लॉट सीलिंग मे है इस लिए अग्रीमेंट के अनुसार 6 लाख नगद भुगतानकरके कब्जा प्राप्त करने की बात उस अग्रीमेंट मे लिखी है तथा बाकी 2 लाखरुपये रजिस्ट्री के समये देने को कहा गया है
एग्रीमेंट के अनुसारविक्रेता प्लॉट की सीलिंग निरस्त करवाकर क्रेता को सूचित करेगा उसके बाद एकवर्ष के भीतर क्रेता को उसकी रिजिस्ट्री करवानी है अब दारोगा जी का कहनाहै की हमको प्लॉट पर से कब्जा हटा लेना चाहिए और विक्रेता उसके बदले रुपयेलौटानेको सहमत है लेकिन हम ज़मीन पर से कब्जा नहीं हटाना चाहते। दारोगाजी हमारे बाउंड्री को गिराने और अपने बाउंड्री बनवाने का प्रयास कर रहे हैं।ऐसे स्थिति में हमें क्या करना उचित होगा? क्या रुपये लेकर कब्जा त्याग करनाही सही मार्ग है? उनका तर्क है की उनका एग्रीमेंट पुराना है इस लिएक़ानूनी रूप से वही सही है और मुक़दमे मे उन्ही को सफलता मिलेगी? क्या वोहमारी रजिस्ट्री निरस्त करवा सकते हैं? हमारे लिए सही कदम क्या होगा समझोताया मुक़दमा?अभी तक उस प्लॉट पर दारोगा जी ने कोई बाउंड्री नहीं बनवाई है।

समाधान-

प का मामला अधिक मजबूत है। आप एक सद्भाविक खरीददार हैं। आप की गलती सिर्फ इतनी है कि आप ने खरीद के पूर्व उप रजिस्ट्रार के कार्यालय में सर्च करवा कर यह नहीं देखा कि क्या उस जमीन के संबंध में कोई दस्तावेज पंजीकृत तो नहीं हो रहा है। वैसे मुझे संदेह है कि दारोगा जी का एग्रीमेंट पंजीकृत भी है या नहीं। क्यों कि आम तौर पर ऐसे एग्रीमेंट पंजीकृत नहीं कराए जाते हैं।

ग्रीमेंट में यह अंकित है कि सीलिंग का निर्णय होने पर वह क्रेता को सूचित करेगा। फिर उस निर्णय में जमीन का कब्जा नहीं दिया गया था। इस कारण से कब्जा तो आप का ही है। दरोगा ने केवल खरीदने का एग्रीमेंट किया था उस जमीन को खऱीदा नहीं था जब कि आप उस जमीन को खरीद कर उस पर कब्जा प्राप्त कर चुके हैं और अतिरिक्त धन खर्च कर के उस पर बाउंड्री भी बनवा चुके हैं। दरोगा अधिक से अधिक उन के द्वारा दिया गया धन उन के हर्जाने सहित विक्रेता से वापस प्राप्त कर सकती है। बेहतर है कि आप उस जमीन पर निर्माण की इजाजत ले कर निर्माण आरंभ कर दें।

दि इस में दरोगा कोई बाधा उत्पन्न करता है या उस के द्वारा बाधा उत्पन्न करने या जबरन जमीन पर कब्जा करने की आशंका है तो आपको तुरन्त दीवानी न्यायालय में निषेधाज्ञा का वाद प्रस्तुत कर अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त करनी चाहिए कि वह भूखंड आप का है और कब्जा भी आप का है, विक्रेता और दरोगा उस में कोई हस्तक्षेप न करे। यदि दरोगा का कोई अधिकार बनता भी है तो वह न्यायालय में विशिष्ठ अनुतोष का वाद प्रस्तुत कर भूखंड की रजिस्ट्री कराने व उस का कब्जा प्राप्त करने की राहत प्राप्त कर सकता है। लेकिन आप के कब्जे में जबरन व गैर कानूनी तरीके से दखल नहीं दे सकता।

स तरह आप दरोगा के गैरकानूनी तरीके से उस भूखंड पर दखल करने के प्रयासों को रोक सकते हैं। यह तो आप को खुद ही तय करना होगा कि विक्रेता से अपना पैसा व हर्जाना लेकर जमीन वापस देने में लाभ है या उस पर कब्जा बनाए रख कर सालों तक मुकदमेबाजी करते रहने में लाभ है।

किसी भी स्त्री की संपत्ति उस की स्वयं की है, वह उसे दान, विक्रय तथा वसीयत आदि कर सकती है …

DCF 1.0समस्या-

आगरा, उत्तर प्रदेश से विकास गुप्ता ने पूछा है-

मैं एक शादी शुदा और एक प्राइवेट नौकरी करने वाला लड़का हूँ।  मेरी शादी अभी हाल में ही हुई है। मेरी समस्या यह है कि मैं जिस मकान मैं रहता हूँ वह मेरे पिताजी का है और मेरी माँ के नाम पर है। मेरे घर में मेरे अलावा मेरे दो और शादी शुदा भाई हैं जो अलग रहते हैं। मेरे सबसे बड़े भाई को मेरे पिताजी ने अपना बिज़्नेस शुरू करने के लिए 5,00,000 रुपये दिए थे जिसके बदले मेरे बड़े भाई मेरे पिताजी को हर महीने 9,000 रुपये देते हैं।  मेरे बड़े भाई ने सारा बिज़नेस अपने नाम करवा लिया है और उसी बिज़नेस से उन्होने एक अच्छा मकान भी ले लिया है और वो अपने परिवार के साथ आराम से रहते हैं। लेकिन वो अब हमारे मकान के पीछे भी पड़े हुए हैं। पिताजी को बार बार बटवारे के लिए मनाते रहते हैं। इसीलिए वो पिताजी के लिए कुछ ना कुछ करते रहते हैं। लेकिन मेरे पिताजी ने मेरे लिए कभी भी कुछ नहीं किया। सिर्फ़ 12वीं तक पढ़ाया और छोड़ दिया और कहा अब हमारे पास तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं है। मैं और मेरी पत्नी उसी मकान के ऊपर बने एक स्टोर रूम में रहते हैं। मई पूरे दिन भर बाहर नौकरी करता हूँ और मेरे माँ-बाप मेरी पत्नी से पूरे दिन भर घर का सारा काम कराते रहते हैं। जब कि वह गर्भवती है। मैं कुछ बोलता हूँ तो घर से निकाल देने की धमकी देते रहते हैं।  मेरे पास अभी इतनी व्यवस्था भी नहीं है कि मैं अभी अलग जा कर रहूँ।  मुझे डर लगता है कि मेरे पिताजी मेरी माँ को धमका कर सारी संपत्ति बड़े भाई को दे दें और मुझे मेरी पत्नी के साथ निकाल दिया जाए। कई बार मेरे और पिताजी के बीच इसी बात को ले के बहस बी हो चुकी है। लेकिन मेरे पिताजी उसी वक्त पुलिस को बुला लेते हैं और कहते है कि एक बदमाश हमारे घर में जबरन घुसा हुआ है और निकल नहीं रहा है। साथ ही साथ मैं आपको यह भी बताना चाहता हूँ कि मेरी माँ पढ़ी लिखी नहीं है इसी लिए मेरे पिताजी और भाई मेरी मम्मी को धमका कर किसी ना किसी पेपर पर अंगूठा लगवाते रहते हैं। मेरे पिताजी पूरी तरह से मेरे बड़े भाई का साथ दे रहे हैं। मेरा बीच वाला भाई गुड़गाँव में अपनी पत्नी के साथ नौकरी करता है। मैं सिर्फ़ इतना जानना चाहता हूँ कि क्या मेरे बड़े भाई के पास सारी संपत्ति आ जाने के बाद मेरा कुछ भी हक नहीं रह जाएगा? मैं कानूनी रुप से क्या कर सकता हूँ जिस से मेरे 75 वर्षीय पिताजी सारी संपत्ति मेरे बड़े भाई के नाम नहीं करें।

समाधान-

प के माता-पिता की उम्र बहुत अधिक है। ऐसी अवस्था में हर माता पिता सदैव उसी संतान की तरफदारी करने लगता है जिस से उन्हें सेवा कराने और जरूरत पड़ने पर इलाज वगैरह का खर्च करने की प्रत्याशा होती है। आप अभी खुद को अलग जा कर रहने में सक्षम नहीं पाते हैं  तो वे आप से कैसे प्रत्याशा कर सकते हैं। यही कारण है कि वे आप के भाई की तरफदारी करते हैं और आप को नालायक समझ कर व्यवहार करते हैं। लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे मकान को आप के भाई को हस्तान्तरित कर देंगे। वे आप के साथ अच्छा व्यवहार भले ही न करें। लेकिन आप को अपनी संपत्ति से पूरी तरह वंचित कर दें कर पाना उन के लिए बहुत कष्टकारी होगा।

प के पिताजी ने मकान आप की माता जी के नाम से खरीदा है। लेकिन कानून यह है कि मकान जिस के नाम से खरीदा गया है उसी का माना जाएगा। ऐसा कोई दावा कि मकान पिताजी के पैसे से खरीदा गया था और उन का है कानून द्वारा नहीं माना जाएगा। इस कारण से आप को यह मान कर चलना चाहिए कि मकान आप की माता जी का है।

किसी भी स्त्री की संपत्ति उस की अपनी संपत्ति होती है। इस कारण से वह मकान उन की संपत्ति है और वे अपने जीवनकाल में किसी को भी हस्तान्तरित कर सकती हैं। उसे बेच सकती हैं, दान कर सकती हैं। लेकिन यह विक्रय या दान केवल रजिस्टर्ड विलेख के द्वारा ही हो सकता है। यह विलेख जब तक उप पंजीयक के यहाँ उचित स्टाम्प ड्यूटी पर ही पंजीकृत हो सकता है। उत्तर प्रदेश में स्टाम्प ड्यूटी लगभग दस प्रतिशत है। इस तरह यदि आप की माता जी का यह मकान 10 लाख रुपयों की कीमत का है तो उस पर एक लाख रुपया स्टाम्प ड्यूटी देनी पड़ेगी। इस तरह यह मुमकिन नहीं लगता कि आप के भाई और पिताजी माता जी को उपपंजीयक के कार्यालय में ले जा कर मकान आप के भाई के नाम कराने के लिए कोई दानपत्र या विक्रय पत्र लिखा पाएंगे।

दूसरी सूरत यह है कि आप के भाई माता जी की कोई वसीयत करवा लें। यदि वसीयत उप पंजीयक के यहाँ पंजीकृत करवाई जाती है तो उसे चुनौती देना कठिन है। लेकिन यदि वे कोई अपंजीकृत वसीयत लिखाते हैं तो उसे चुनौती दी जा सकती है। वसीयत से आप की माताजी के जीवन काल में संपत्ति माता जी की ही रहेगी। उन के देहान्त के उपरान्त ही वह उस की होगी जिस के नाम की वसीयत की जाती है। आप की माता जी के देहान्त के बाद यदि कोई वसीयत सामने आए तो उसे इस आधार पर चुनौती दी जा सकती है कि वह उन की स्वतंत्र इच्छा से की गई नहीं है। किसी भी वसीयत को वसीयत करने वाला अपने जीवन काल में निरस्त कर सकता है और अंतिम वसीयत ही मान्य होती है।

दि आप की माता जी उक्त मकान को अपने जीवन काल में विक्रयपत्र या दान पत्र द्वारा हस्तान्तरित नहीं करती हैं और कोई वसीयत भी नहीं करती हैं तो उत्तराधिकार के नियम के अनुसार आपके पिताजी और आप तीनों भाई और यदि आपकी कोई बहिन हो तो वे सब बराबर के हिस्से के अधिकारी होंगे। तब आप अपने हिस्से के लिए बंटवारे का दावा कर सकते हैं। उन के जीते जी तो बँटवारा संभव नहीं है।

प उस मकान में अभी रह रहे हैं। एक तरह से आप अपनी माता जी की अनुमति से वहाँ निवास कर रहे हैं। इस तरह आप एक लायसेंसी हैं। आप को माता जी के जीते जी निकालने का वैधानिक मार्ग यही है कि माता जी एक कानूनी नोटिस दे कर आप का लायसेंस रद्द करें और फिर भी आप के द्वारा मकान खाली न करने पर आप के विरुद्ध मकान खाली करने का दावा करें। इस दावे में भी उनहें कोर्ट फीस देनी पड़ेगी। और दावे का निर्णय होने में भी कम से कम चार पाँच बरस और उस की अपील में भी इतना ही समय लग जाएगा। तब तक वे आप को उस मकान से नहीं निकाल सकते। पुलिस को बुलाने का जो नाटक आप के पिताजी करते हैं वह केवल आप को धमकाना मात्र है। पुलिस आप को वहाँ से निकाल नहीं सकती। आप निर्भीक हो कर अपने भाई और पिता से कह सकते हैं कि आप परिवार के सदस्य की हैसियत से वहाँ रहते हैं आप को भी अपने माता पिता के मकान में रहने का अधिकार है। यदि उन्हें आप को निकालना ही है तो वे आप के विरुद्द मुकदमा कर दें। आप बिना अदालत के आदेश के मकान को खाली नहीं करेंगे। यदि आप के माता-पिता आप की गर्भवती पत्नी के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते तो आप उन्हें स्पष्ट कहें कि यह उचित नहीं है। यदि आप की पत्नी उन के विरुद्ध घरेलू हिंसा की शिकायत करेगी तो उन्हें फिजूल में परेशानी होगी। इस तरह आप अपनी पत्नी को उत्पीड़न से भी बचा सकते हैं।

विक्रय मूल्य का चैक अनादरित होने पर क्या विक्रय को निरस्त कराया जा सकता है?

agricultural-landरय समस्या-

इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश से रवि श्रीवास्तव ने पूछा है –

मेरी समस्या ये है कि मेरी एक कृषि योग्य जमीन उ.प्र. के देवरिया जिले में है जिसे मैं पिछले माह मर्इ, 2013 में बेच चुका हूँ यानि रजिस्ट्री कर दी। कुछ पैसा मुझे नकद मिल गया और कुछ का पोस्ट डेटेड चेक मिला लेकिन रजिस्ट्री पर पूरा भुगतान प्राप्त हो गया ही लिखा है। रजिस्ट्री एक स्कूल के नाम प्रबन्धक को की गई है। स्कूल या संस्था मान्यता प्राप्त नहीं है। दाखिल-खारिज भी हो चुका है। क्या अब मैं रजिस्ट्री को किसी विधि से कैंसिल करा सकता हूँ अथवा आपत्ति दाखिल कर सकता हूँ अथवा नहीं क्योंकि पूरा भुगतान अप्राप्त है, तय राशि रजिस्ट्री पेपर पर लिखी धनराशि से अधिक है।

समाधान-

प ने कृषि भूमि विक्रय कर दी और उस का विक्रय पत्र पंजीकृत करा दिया तभी भूमि का विक्रय संपन्न हो चुका है। उस के आधार पर राजस्व विभाग ने अपने यहाँ खातों में दाखिल-खारिज कर संशोधन भी कर लिया है। लेकिन आप को जो भुगतान किया गया था वह पोस्ट डेटेड चैक के द्वारा किया गया था। यदि आप को आगे की तिथि का चैक दिया जाता है तो उसे भुगतान ही कहा जाएगा और आप का यह लिखना गलत नहीं था कि आप को भुगतान प्राप्त हो चुका है। लेकिन यदि चैक का अनादरण हो जाता है और आप को उस का धन नहीं मिलता है तो यह भुगतान अप्राप्त हो जाएगा। उस स्थिति में आप के पास निम्न उपाय हैं।

हला उपाय तो यह है कि आप चैक का अनादरण होते ही चैकदाता पदाधिकारी और उस पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्तियों को चैक अनादरण की सूचना रजिस्टर्ड ए.डी. डाक के माध्यम से लिखित में देते हुए चैक राशि का भुगतान करने की चेतावनी दे दें। यदि सूचना मिलने पर भी चैक का धन नहीं मिलता है तो आप चैक अनादरण के लिए अपराधिक मुकदमा धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम के अंतर्गत चला सकते हैं। इस मुकदमे में न्यायालय आप को आप के चैक की राशि दिला सकता है उस पर कुछ दंड दिला सकता है और चैकदाता को कारावास की सजा हो सकती है। लेकिन इस उपाय से आप को आप का धन मिल जाए यह जरूरी नहीं है।

दूसरा उपाय यह है कि आप चैक दाता को नोटिस दें कि उस के द्वारा दिया गया चैक अनादरित हो चुका है इस कारण से आप विक्रय रद्द करते हैं, नकद भुगतान की गई राशि को क्षतिपूर्ति के रूप में जब्त करते हुए मांग करते हैं कि वह व्यक्ति उक्त भूमि के विक्रय को रद्द कराने के लिए विलेख निष्पादित कर उस का पंजीयन कराए। अन्यथा आप विक्रय को रद्द कराने के लिए उस के विरुद्ध दीवानी वाद प्रस्तुत करेंगे। आप ऐसा वाद प्रस्तुत कर सकते हैं तथा विक्रय को रद्द करा सकते हैं लेकिन जिस मूल्य पर आपने भूमि विक्रय की थी उस मूल्य पर आप को निर्धारित न्यायालय शुल्क दावे के साथ अदा करना होगा।

तीसरा उपाय यह है कि जितनी राशि का चैक अनादरित हुआ है उतनी राशि और उस पर ब्याज राशि की प्राप्ति के लिए आप क्रेता के विरुद्ध दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकते हैं। दोनों में से किसी भी वाद के न्यायालय में प्रस्तुत करने के साथ ही उक्त कृषिभूमि को क्रेता द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को हस्तान्तरित करने पर रोक लगाने के लिए अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर ऐसी अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त की जा सकती है। हम ने आप के दस्तावेजों का अध्ययन नहीं किया है जिस के कारण यह सलाह आप दवारा बताए गए तथ्यों पर आधारित है। आप उक्त में से कोई भी उपाय करें लेकिन अनुभवी स्थानीय वकील से सलाह अवश्य लें।

पावर ऑफ अटार्नी से विक्रय को मूल स्वामी चुनौती दे सकता है

समस्या-

मेरठ, उत्तर प्रदेश से किशनकुमार ने पूछा है –

मेरे माता-पिता ने अपने मकान की संयुक्त वसीयत बनाई जिस के अनुसार एक की मृत्यु हो जाने पर मृतक की संपत्ति का दूसरा स्वामी हो जाएगा। दोनों की मृत्यु हो जाने पर मैं उस संपत्ति का स्वामी हो जाउंगा। मेरी दो विवाहित बहनें हैं। एक बहिन ने पिता जी की मृत्यु के बाद माता जी से पावर ऑफ अटॉर्नी प्राप्त कर एक कमरा दूसरी बहिन को विक्रय कर दिया जिस का पता मुझ बाद में चला। अब मुझे क्या करना चाहिए कि वह किसी और को विक्रय नहीं कर सके और मेरा कमरा मुझे मिल जाए?

समाधान-

वसीयतमाता-पिता ने संयुक्त वसीयत की कि उन में से जिस की भी मृत्यु पहले हो जाएगी उस की संपत्ति का स्वामी दूसरा हो जाएगा। दोनों की मृत्यु हो जाने के उपरान्त वह संपत्ति आप को प्राप्त होगी। इस तरह यह वसीयत एक दोहरी वसीयत है। कोई भी वसीयत तभी प्रभावी होती है जब कि वसीयत कर्ता की मृत्यु हो जाती है। कोई भी वसीयत कर्ता अपने जीवन काल में अपनी वसीयत को परिवर्तित कर सकता है या उसे रद्द कर सकता है।

स मामले में आप के पिता का देहान्त हो गया। उन के देहान्त के साथ ही उन की संपत्ति की स्वामी आप की माता जी हो गई। अब आप की माता जी और पिता की छोड़ी हुई संपत्ति दोनों की स्वामिनी आप की माता जी हैं। माता जी अभी जीवित हैं इस कारण से इस वसीयत का वह भाग जो कि आप की माता जी की इच्छा को प्रकट करता है अभी प्रभावी नहीं है। आप की माता जी अपने हिस्से के वसीयत के भाग को अपने जीवन काल में परिवर्तित कर सकती हैं या रद्द कर सकती हैं। वर्तमान में जो भी संपत्ति है, उन की है। वह आप की नहीं हुई है। इस कारण वे उस संपत्ति को किसी को भी विक्रय या हस्तांतरित कर सकती हैं।

प की माता जी ने एक पावर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित कर आप की एक बहिन को अपना मुख्तार नियुक्त किया और उस मुख्तार बहिन ने आप की दूसरी बहिन को एक कमरा विक्रय कर दिया। इस में कोई त्रुटि नहीं है, यदि वह विक्रय आप की माता जी के निर्देशानुसार हुआ है। यदि वह आप की माता जी के निर्देशानुसार नहीं हुआ है और किसी धोखे से हुआ है तो आप की माता जी इस हस्तांतरण को चुनौती दे सकती हैं। लेकिन आप को तो इस मामले में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है क्यों कि आप का अभी तक उस संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है।

हाँ, यदि आप की माता जी यह कहती हैं कि आप की मुख्तार बहिन ने उन के निर्देशों के विपरीत यह विक्रय किया है तो आप की माता जी उस विक्रय पत्र को निरस्त कराने के लिए दीवानी वाद प्रस्तुत कर सकती हैं और आप की दूसरी बहिन जिसे वह कमरा विक्रय किया गया है उसे आगे विक्रय करने पर रोक लगाने के लिए इसी वाद में अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत कर अस्थाई निषेधाज्ञा जारी करा सकती हैं। जिस से आप की कमरे को खरीदने वाली बहिन उसे आगे विक्रय नहीं कर सकेगी।

जमीन और मकान के बँटवारे तथा अपने हिस्से पर कब्जे के लिए क्षेत्राधिकार वाले न्यायालयों को वाद प्रस्तुत करें

समस्या-

भोपाल, मध्यप्रदेश से राजबीर आर्य ने पूछा है –

मेरे पिताजी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से 1959 में मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग में नौकरी करने आ गये थे।  उनकी म्रत्यु 1986 में हो गयी थी।  हम तीन भाई हैं जो अब मध्यप्रदेश के मूल निवासी हैं। हमारी पैतृक जमीन अभी भी उत्तर प्रदेश में है जिस पर चाचा अभी ठेके पर खेती करते हैं। जिस पर कुछ समय से उन्होंने ठेके की राशी देना बंद कर दिया है।  अब हम तीनों भाई जमीन बेचना चाहते हैं।  लेकिन जमीन अभी चाचा के कब्जे में है। जमीन के खाते संयुक्त हैं बंटवारा नहीं हुआ है दादाजी ने घर बनवाया था। उनकी मौत के बाद घर पर भी चाचा का कब्जा है। जमीन किसी अन्य को ठेके पर देने की बात करने पर चाचा झगड़े पर उतारू हो जाते हैं।  हम मध्यप्रदेश में ही रहकर जमीन पर या तो लोन लेना चाहते हैं, या बेचना चाहते हैं या खाते अलग करना चाहते हैं और घर जमीन इत्यादि का बंटवारा न्यायालय के माध्यम से चाहते हैं हमें क्या और कैसे करना होगा?

समाधान-

Farm & houseप चाहें तो कृषि भूमि में अपना हिस्सा बिना बँटवारा किए विक्रय कर सकते हैं। इस से जो व्यक्ति इसे खरीदेगा उसे आप के स्थान पर कृषि भूमि में हिस्सा मिल जाएगा। वह अपने हिस्से को अलग कराने के लिए न्यायालय में बँटवारे का वाद प्रस्तुत कर आप के चाचा से बँटवारा करवा सकता है। लेकिन इस तरह आप को जमीन की कीमत कम, लगभग आधी मिलेगी।

दूसरा मार्ग यह है कि कृषि भूमि के बँटवारे के लिए आप राजस्व न्यायालय में बँटवारे तथा अलग हिस्से पर कब्जे का दावा करें। निर्णय होने पर न्यायालय की डिक्री के अनुसार तहसीलदार आप के हिस्से को नपवा कर आप को कब्जा दिलवा देगा। तब आप जमीन को बेच सकते हैं। वैसी स्थिति में आप को जमीन के अच्छे दाम मिल जाएंगे। यह भी हो सकता है कि आप खरीददार को तैयार रखें और जिस दिन आप को कब्जा मिले उसी दिन एग्रीमेंट कर के विक्रय की पूरी राशि प्राप्त कर कब्जा तुरंत खरीददार को संभला दें। बाद में वह विक्रय पत्र की रजिस्ट्री जब चाहे करवा लेगा।

कान में बँटवारे और पृथक हिस्से के कब्जे के लिए आप को दीवानी न्यायालय में वाद प्रस्तुत करना होगा। उस के मामले में भी आप वही सब कर सकते हैं जो आप खेती की जमीन के मामले में कर सकते हैं। ये दोनों वाद आप को सहारनपुर जिले के उन न्यायालयों में करने होंगे जिन्हें आप की जमीन और मकान के स्थिति के क्षेत्र पर क्षेत्राधिकार प्राप्त है।

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