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बीमारी से लौटने पर ड्यूटी न लेना अवैधानिक छँटनी है, तुरन्त श्रम विभाग को शिकायत प्रस्तुत करें।

समस्या-

राहुल ने ट्रांजिट कैंप रुद्रपुर (उत्तराखंड) से समस्या भेजी है कि-

मैं रूद्रपुर में दिनांक 01-06-2015 से एक निजी आटो पार्ट्स कंपनी में पे रोल पर डिप्लोमा मैकेनिकल इंजिनियर की हैसियत से कार्यरत था। लेकिन तबीयत खराब होने की वजह से मैं पूरा महीने (जनवरी 2017) अनुपस्थित रहा। मैंने अपने सुपरवाइजरों को फोन द्वारा सूचित किया तो उन्होंने कोई दिक्कत न होने की बात कही। परन्तु मेरे मेडिकल लेकर वापस आने के बाद एचआर विभाग द्वारा यह कह कर कि तुम्हारा नाम कट गया है। एक महीने बाद रीजोइनिंग करानी पड़ेगी। धोखे से कैजुअल ट्रेनिंग में डाल दिया है और सैलरी के नाम पर छह महीने से स्टाईपेंड दे रही है। अब कम्पनी बार बार कहने पर भी रीजोइनिंग नही करा रही है। अब एक्जिट क्लियरिंग फार्म में रिजाइन दिखा कर साइन करने के लिये दबाव बना रही है, ऐसा न करने पर कम्पनी नो एंट्री लगाने की धमकी दे रही है। कृपा करके मुझे बतायें कि क्या मैं स्थानीय श्रम न्यायालय में शिकायत दर्ज करा सकता हूं? कम्पनी ने एक साल पूरे होने पर मुझे इंक्रीमेंट दे रखा है।

समाधान-

आप 01.06.2015 से पे-रोल पर डिप्लोमा मैकेनिकल इंजिनियर की हैसियत से नियोजित थे। आप का काम जिस तरह का है आप एक श्रमिक हैं। दिसम्बर 2016 तक आप ने काम किया, इस तरह आप एक वर्ष सात माह काम कर चुके थे। आप इन्क्रीमेंट भी प्राप्त कर चुके थे। इस तरह आप स्थाई कर्मचारी हो चुके थे। इस के बाद आप बीमारी के कारण उपस्थित नहीं हो सके और फोन पर सुपरवाइजरों को सूचित किया। फिर आप फरवरी में ड्यूटी पर उपस्थित हुए। लेकिन आप को ड्यूटी पर नहीं लिया गया, बल्कि कहा गया कि आप का नाम पे-रोल से कट गया है। इस तरह आप की सेवा समाप्त हो गयी। पे रोल से नाम काट देने को सुप्रीम कोर्ट ने कई मुकदमों में छंटनी माना है। इस तरह आप की यह सेवा समाप्ति आप की छंटनी है। इस सेवा समाप्ति के पहले आप को एक माह का नोटिस दिया जाना चाहिए था या उस की एवज में एक माह का वेतन सेवा समाप्ति के दिन दिया जाना चाहिए था। इस के साथ ही छंटनी का मुआवजा भी दिया जाना चाहिए था। इस छँटनी के पहले नियोजक को एक वरिष्ठता सूची भी प्रकाशित करनी चाहिए थी। यह भी कि छंटनी केवल सब से नए कर्मचारी की की जा सकती है। किसी सीनियर की नहीं।

अब छंटनी के इन मानदंडों पर आप की छंटनी को परखेंगे तो वह अवैधानिक है। आप इस के विरुद्ध श्रम विभाग में शिकायत कर सकते हैं। शिकायत प्रस्तुत करने की रसीद शिकायत की दूसरी प्रति पर प्राप्त कर अपने पास अवश्य रखें जिस पर प्राप्त करने की तिथि और प्राप्त करने वाले कर्मचारी के हस्ताक्षर व विभाग की सील जरूर लगी हो। विभाग उस में समझौते के लिए प्रयास करेगा या फिर नहीं करेगा। दोनों ही स्थितियों में यदि 45 दिन में कोई परिणाम नहीं मिलता है तो आप श्रम विभाग से शिकायत प्रस्तुत होने के 45 दिन पूरे हो जाने का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर प्राप्त कर लें। तब आप सीधे श्रम न्यायालय के समक्ष अपना अवैधानिक छंटनी का मुकदमा पेश कर सकते हैं। इस मुकदमे में आपकी जीत होगी। अदालत से आप को नौकरी पर वापस लेने, सेवा की निरन्तरता बनाए रखने और पिछला पूरा वेतन या उस का कोई अंश दिए जाने का अधिनिर्णय पारित किया जाएगा।

कंपनी भी जानती है कि आप मुकदमा कर सकते हैं और कंपनी को उस में नुकसान उठाना पड़ेगा। पर वे आप की अनभिज्ञता और मजबूरी का लाभ उठा रहे हैं। आप को किसी रिजाइन या त्याग पत्र पर अपने हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए। वैसे भी कंपनियों की नौकरियों का कोई भरोसा तो है नहीं। इस कारण आप को तुरन्त श्रम विभाग में शिकायत करें। किसी स्थानीय वकील से मदद लें। आप नौजवान हैं, डिप्लोमा इंजिनियर हैं, आप को कहीं भी काम मिल जाएगा। घबराएँ नहीं और अपने अधिकारों के लिए लड़ें।

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