मुकदमा जीतने के लिए वकील अनुभवी और जानकार हो

समस्या-

पंडित रानूकुमार ने महावीरपुरा झाँसी से पूछा है-

मेरे पिताजी के चाचा के नाम रजिस्टर्ड मकान पर लगभग 50 वर्षों से मेरे पिताजी का कब्जा है। मेरे पिताजी का निधन 2018 में हाल ही में हो गया। लेकिन सन 2017 में मेरे दादा जी के वारिसान ने मेरे पिताजी पर एक सिविल सूट फाइल कर दिया, जिसके नोटिस मेरे पिताजी ने तामील हो गए थे, लेकिन उसका जवाबदावा नहीं दिया था। अब उनकी मृत्यु के पश्चात हम लोगों ने अपना नाम नगर पालिका परिषद के अभिलेखों में दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया है।  क्या नामांतरण किया जा सकता है, या नहीं? मेरे पिताजी का नाम नगर पालिका में अभिलेखों में दर्ज है, और नल, बिजली, गैस कनेक्शन इसी पते पर दर्ज हैं।  मेरे पास मकान से संबंधित किसी प्रकार के कागजात उपलब्ध नहीं हैं। मुकदमा में जीतने के लिए हमें क्या करना चाहिए? मेरे पिताजी के चाचा की वारिसान गुजरात में निवास करते हैं, हम लोगों के पास मकान से संबंधित कागजात नहीं है। आगे की कार्रवाई के लिए उचित मार्गदर्शन करें।

समाधान-

आप ने यह नहीं बताया कि आप के दादाजी के वारिसान ने किस आधार पर किस राहत के लिए सिविल सूट फाइल किया है। जब तक यह पता न हो तब तक क्या कुछ कहा जाए।  आप जानना चाहते हैं कि मुकदमे को जीतने के लिए क्या करना चाहिए तो इस सवाल का जवाब तब दिया जा सकता है जब पता है को मुकदमा किस बात का है।

यदि नगरपालिका के अभिलेख में आप के पिता का नाम उस के कब्जेदार/स्वामी के रूप में लिखा है तो नामांतरण हो जाएगा। बशर्ते कि कोई अन्य उस पर आपत्ति नहीं करे। वैसे नामान्तरण किसी संपत्ति के स्वामित्व का सबूत नहीं होता। इस कारण उस पर ज्यादा कंसंट्रेट करने की जरूरत नहीं है। बस इतना ध्यान दें कि किसी और के नाम से नामान्तरण न हो।

यदि मकान पिताजी के चाचाजी का है तो वे त आप के चाचाजी के वारिस तो नहीं थे। आप के पिता के पास कब्जा किसी खास रूप में नहीं था तो आप के पिताजी कह सकते हैं कि यह मकान चाचाजी ने  उन्हें देदिया था और अब आप के पिताजी का एडवर्स पजेशन है। केवल इसी आधार पर  ही उस संपत्ति के संबंध में आप के पिताजी के खिलाफ किया गया कोई भी मुकदमा खारिज हो सकता है। पिताजी का नाम नगर पालिका में अभिलेखों में दर्ज होना और नल, बिजली, गैस कनेक्शन इसी पते पर दर्ज होने से आप के पिताजी का उस संपत्ति पर  50 वर्षों का कब्जा  साबित हो ही जाएगा। जो मुकदमा आप के पिताजी के खिलाफ किया गया था उस में भी विधिक प्रतिनिधि /कायम मुकाम रिकार्ड पर लाने की जिम्मेदारी दावा करने वाले पक्ष की है। आप को उस की भी चिन्ता करने की कोई जरूरत नहीं है। जब समन मिलें तब अदालत मे हाजिर हों और अपना पक्ष रखें। सब से बड़ी बात यह कि आप अपना वकील अनुभवी और दीवानी मामलों का अच्छा जानकार रखें।

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2 टिप्पणियाँ

  1. Comment by पं रानू कुमार:

    यदि मकान पिताजी के चाचाजी का है तो वे आप के चाचाजी के वारिस तो नहीं थे …….. हां मेरे कजिन दादाजी जी के ही बारिस हैा और मुकदमा वेदखल करने का है.

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