श्रद्धांजलि!!! दिनेशराय द्विवेदी | 08/04/2010 | System, व्यवस्था | 5 Comments दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ में शहीद सभी जवानों को ‘तीसरा खंबा’ की विनम्र श्रद्धाँजलि More from my siteन्यायालय के समक्ष आवेदन या साक्ष्य में सूचना छुपाना या मिथ्या सूचना देना गंभीर अपराध हैं।बेदखली से बचने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा का वाद संस्थित करें और अस्थाई निषेधाज्ञा प्राप्त करें।बिना न्यायालय की डिक्री के हिन्दू विवाह विच्छेद संभव नहीं है।डिप्रेशन से निकल कर नया जीवन आरम्भ करें, जो हुआ उसे भूलेंवे न्याय नहीं करते, केवल नौकरियाँ करते हैं और पदोन्नतियों के लिए काम करते हैंकिसी हरे वृक्ष के जन-धन के लिए क्षतिकारक हो जाने पर उसे हटाने के लिए धारा 133 दं.प्र.संहिता के अंतर्गत आवेदन करें Related Posts कल की टिप्पणियाँ 3 Comments | Feb 11, 2008 कम न्यायालयों के कारण निर्णयों की गति और गुणवत्ता पर बुरे प्रभाव No Comments | Jan 6, 2012 कीडों का कनस्तर खुलता है तो उसे खुलने दो! 5 Comments | Jan 15, 2011 सुस्त न्यायिक व्यवस्था का इलाज तो राजनीति से ही संभव है। 1 Comment | May 16, 2015 About The Author DineshRai Dwivedi 5 Comments नरेश सिह राठौङ 08/04/2010 सच्ची श्रद्धांजलि तो उस दिन होगी जब इसका बदला लिया जाएगा | संजय भास्कर 08/04/2010 हमारी भी श्रृद्धांजलि! Udan Tashtari 08/04/2010 हमारी भी श्रृद्धांजलि! M VERMA 08/04/2010 श्रद्धांजलि Sanjeet Tripathi 08/04/2010 mujh akinchan ki bhi shraddhanjali.
सच्ची श्रद्धांजलि तो उस दिन होगी जब इसका बदला लिया जाएगा |
हमारी भी श्रृद्धांजलि!
हमारी भी श्रृद्धांजलि!
श्रद्धांजलि
mujh akinchan ki bhi shraddhanjali.