गलत नामान्तरण के विरुद्ध अपील कर भू-विक्रय पर निषेधाज्ञा प्राप्त करें।
|समस्या-
राहुल मिश्रा ने इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश से पूछा है-
मेरे बाबाजी पिताजी के पिता ने और दादी ने अपनी 2 संपत्ति कि एक वसीयत कि है जिसमे बाबाजी ने और मेरी दादी जी ने मुझे अपना वारिस चुना है। बाबाजी ने मेरी माँ के नाम संपत्ति कि कोई वसीयत नहीं कि और न ही उनका नाम ही डाला वसीयत में। वसीयत को उन्होंने पंजीकृत करवाया हुवा है। मेरे बाबाजी की २२ नवम्बर को मृत्यु हो चुकी है। अब जब कि मैंने वसीयत के आधार पर तहसील न्यायालय में नाम कराना चाहता हूँ तो मेरी माताजी ने उस में ऐतराज करके दादी और मेरे साथ लेखपाल को पैसे खिला कर अपने नाम भी करवा ली है। वो उस जमीन को बेच सकती है इसी डर के कारण मेरे बाबाजी ने उनके नाम वसीयत नहीं की। अब क्या यहाँ पर बाबाजी कि वसीयत के आधार पर कुछ हो सकता है या नहीं? मैं क्या करूँ? अभी मैं गाव में नहीं रह रहा हूँ। मुझे क्या करना चाहिए जिससे जमीन बची रहे? क्या मुझे कोर्ट कि सहारा लेना चाहिए? कोर्ट से मुझे क्या मदद मिल सकती है? मेरे पिताजी की भी मृत्यु हो चुकी है। हम अपने माता पिता कि तीन संताने हैं। मैं और मेरी दो बहनें जिन की शादी मैं कर चूका हूँ, अभी मेरी दादी जीवित है और वसीयत जॉइंट है।
समाधान-
आप के दादा दादी ने संयुक्त वसीयत की है। इस का अर्थ यह है कि एक ही दस्तावेज में दोनों ने अपनी वसीयत अंकित कर दी है। वसीयत में क्या लिखा है यह आप ने नहीं बताया। बिना वसीयत को पूरा पढ़े कुछ नहीं कहा जा सकता है। यदि आप के नाम दादा जी ने अपनी संपत्ति देना लिखा है तो दादी का नाम भी नामान्तरण में नहीं चढ़ना चाहिए था। अक्सर संयुक्त वसीयत में यह लिखा होता है कि पति पत्नी में से किसी का देहान्त हो जाए, संपत्ति दूसरे को प्राप्त होगी तथा दोनों की मृत्यु के बाद वसीयती को प्राप्त होगी। यदि ऐसा है और संपत्ति दादा के नाम थी तो अब केवल आप की दादी को मिलनी चाहिए तथा दादी के जीवनकाल के बाद आप को।
यदि नामान्तरण में वसीयत को आधार नहीं बनाया गया है तो फिर यह भी हो सकता है कि आप की माँ ने पहले आवेदन दिया हो और आपका आवेदन प्रस्तुत होने के पहले वसीयत को देखे बिना ही उत्तराधिकार कानून के अन्तर्गत नामान्तरण कर दिया गया हो।
लेकिन यदि वसीयत के विरुद्ध नामान्तरण हो गया है तो आप को तुरन्त उस नामान्तरण आदेश की अपील करनी चाहिए। अपील में वे सारे तर्क रखने चाहिए जो इस मामले में आप रखना चाहते हैं। इसी अपील के साथ आप को अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदन प्रस्तुत करते हुए अपीलीय अधिकारी से यह निवेदन करना चाहिए कि जब तक अपील का निर्णय न हो जाए। जमीन या उस के हिस्से को कोई भी व्यक्ति विक्रय न करे तथा किसी भी रूप में उस का हस्तान्तरण न करे। समय निकल जाने पर आप अपील नहीं कर सकेंगे। इस कारण किसी भी स्थानीय वकील से संपर्क कर तुरन्त अपील प्रस्तुत करें।
राहुल जी, वकील साहब का कथन सही है वास्तव में वगैर वसीयत के यदि तहसील के कागजातों में नामान्तरण हुआ है तो कहीं न कहीं घपला जरूर है। आपकी माँ का नाम तभी इन्द्राज हो सकता था जब आपकी दादी का प्रमाणित मृत्यु प्रमाण-पत्र एक आवेदन के साथ तहसील में दिया जाता अन्यथा ऐसा संभव नहीं है। जहाँ तक आपके नाम का प्रश्न है तो इस संदर्भ में निश्चित रूप से वसीयत में अंकित होगा कि आपकी दादी के मृत्युपरान्त उत्तराधिकारी के रूप में आपका नाम दर्ज कर लिया जाए। कृपया इस बावत आरटीआई कानून के तहत सूचना मांगें कि किन आधारों पर आपकी माँ का नाम कागजों में दर्ज किया गया। इसके बाद आप कानूनी रूप से उचित कदम उठा सकते हैं।
– रवि श्रीवास्तव, इलाहाबाद।