मकान और किराया Archive

किराएदार से कोई जबरन मकान खाली नहीं करवा सकता।

October 30, 2018 को वेबसाईट प्रशासक द्वारा लिखित

समस्या-

विकास ने देहरादून (उत्तराखंड) से पूछा है

मैं देहरादून में एक किराए के कमरे में रहता हूं । यह मकान एक विधवा महिला का है जिनकी वर्ष 2016 में मृत्यु हो चुकी है उनके दो पुत्र, दो पुत्रियां हैं सभी विदेशों में सेटल्ड है।  यहां मेरे परिवार के अलावा कोई नहीं रहता है।  मैं इस कमरे में वर्ष 2011 से रह रहा हूं और नियमित रूप से किराया तथा बिजली पानी का बिल का भुगतान करता आ रहा हूं और अभी भी कर रहा हूं।  महिला भवन स्वामी के समय कोई किरायानामा नहीं बनाया गया था। लेकिन उनकी मृत्यु के बाद से उनके बड़े पुत्र ने मेरे साथ एक 11 माह का किराया नामा बनाया 1 जून 2017 से 31 अप्रैल 2018 तक का और फिर दूसरा किरायानामा 1 जून 2018 से 31 अप्रैल 2019 तक बनाया है। जिसमें किराए की दर, संपूर्ण भवन का बिजली- पानी का भुगतान मुझे वहन करना लिखित है। मैं नियमित रूप से किराया, व बिलों का भुगतान करता आया हूं।  परंतु वे अब इस मकान को बेचना चाहते हैं इसलिए मुझे 15 दिसंबर 2018 तक मकान खाली करने के लिए कह रहे हैं।  मेरे लिए मकान किराए पर ले पाना संभव नहीं हो पा रहा है।  वे इस दिसंबर 2018 तक बेच कर जाना चाहते हैं। तो क्या अब मुझे उनके अनुसार कमरा खाली करना होगा या मैं माननीय न्यायालय से कमरा खाली नहीं करने का स्थगन आदेश प्राप्त कर सकता हूं, स्थगन आदेश कितना प्रभावी हो सकता है। मेरे पास किराया भुगतान ,बिजली व पानी के बिलों की पिछले कुछ माह की ऑनलाइन भुगतान मौजूद है। मेरे पास इस पते का वोटर कार्ड भी मौजूद है।  मैं केंद्र सरकार की सेवा में कार्यरत हूं।  मैं और मेरी पत्नी इस कमरे पर रहते हैं।  क्या भवन स्वामी को पूर्ण अधिकार है कि वह जब चाहे तब मात्र एक ईमेल के माध्यम से फॉर्मल नोटिस भेजकर किसी को घर खाली करने के लिए बाध्य कर सकता है?   कृपया उचित मार्गदर्शन करें।

समाधान-

ब से पहले तो आप यह बात गाँठ बांध लें कि कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति से जो किसी अचल संपत्ति पर काबिज है उस संपत्ति को जबरन नहीं छीन सकता, चाहे उसे उस संपत्ति पर कब्जा प्राप्त करने का अधिकार हो या न हो। किसी भी व्यक्ति से किसी भी संपत्ति का कब्जा या तो उस व्यक्ति की सहमति से लिया जा सकता है या फिर न्यायालय के की डिक्री या आदेश के निष्पादन में प्राप्त किया जा सकता है। यदि इस के विपरीत कोई जबरन कब्जा छीनता है तो यह अपराध है इस की तुरन्त पुलिस में रिपोर्ट कराई जानी चाहिए तथा तुरन्त ही उप जिला दंडनायक को धारा 145 दंड प्रक्रिया संहिता में आवेदन किया जाना चाहिए कि फलाँ व्यक्ति ने उस के कब्जे से संपत्ति बलपूर्वक छीन ली है उस संपत्ति का कब्जा दिलाया जाए।

आप किसी संपत्ति पर एक किराएदार की हैसियत से काबिज हैं। उस संपत्ति के स्वामी की मृत्यु हो गयी है। पुत्र ने आप से 11 माह का किरायानामा लिखा है, फिर दोबारा 11 माह का किरायानामा लिखा है। 11 महा का किराया नामा लिखने का कारण मात्र इतना है कि इस से अधिक अवधि का लिखा जाता ह तो दस्तावेज पर स्टाम्प ड्यूटी अधिक देनी होती। यह किरायानामा की अवधि समाप्त हो जाने पर भी किराएदारी तब तक विधिक रूप से जारी रहती है जब तक कि स्वयं किराएदार परिसर खाली न कर दे या फिर मकान मालिक किसी न्यायालय से मकान खाली कराने की डिक्री प्राप्त न कर ले। अब पुत्र संपत्ति को बेचना चाहता है। लेकिन यदि कोई अपनी संपत्ति को बेचना चाहता है तो उस कारण से संपत्ति पर से किराएदार से मकान खाली कराने का अधिकार उत्पन्न नहीं हो जाता।  यदि आप के मकान मालिक ने आप को ई-मेल से सूचना दी है कि वह मकान बेचना चाहता है और मकान खाली करें। तो इस ई-मेल संदेश को संभाल कर रखें तथा मोबाइल या कम्पयूटर में भी सुरक्षित रखें। यह एक सबूत है जो यह साबित करेगा कि यही वास्तविक कारण है जिस से भू-स्वामी मकान खाली कराना चाहता है। यदि भू-स्वामी इसी आधार पर आप के विरुद्ध मकान खाली कराने का मुकदमा करे तो वह अदालत से भी खाली कराने की डिक्री प्राप्त नहीं कर सकेगा। उसे अदालत में किसी और आधार का सहारा लेना पड़ेगा। तब उक्त ई-मेल यह सबित करने के लिए आप के काम आएगा कि मकान मालिक का मकान खाली कराने का उद्देश्य तो मकान बेचना है।

यदि आप को लगता है कि आप का भू-स्वामी जबरन गुंडागर्दी कर के मकान खाली करवा सकता है तो आप दीवानी न्यायालय में दीवानी वाद दायर कर के इस आशय की अस्थायी और स्थायी निषेधाज्ञा प्राप्त कर सकते हैं कि आप का भू-स्वामी बिना किसी विधिक प्रक्रिया अपनाए आप से जबरन मकान खाली न कराए। यदि ऐसी निषेधाज्ञा आप प्राप्त करते हैं तो आप के साथ जबरदस्ती होने पर आप तुरन्त पुलिस को संपर्क कर सकते हैं।

समस्या-

मेरे दादाजी तीन भाई है और उन सभी ने क़ानूनी रूप से कोई बँटवारा किए बगैर आपसी सहमती से अपनी सुविधानुसार संपत्ति का बँटवारा कर लिया था और अभी तक खसरा नंबर मे भी दादाजी समेत उनके दोनो भाइयो का भी नाम है, दादाजी की दो संतान है एक पिताजी और दूसरी बुआजी, पिताजी ने दो शादियाँ की थी, पहली पत्नी से तीन लड़कियाँ और एक लड़का है सभी लड़कियो की शादियाँ हो चुकी है और मेरा सौतेला भाई और सौतेली माँ दादी और दादाजी के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने चार कमरो के मकान मे रहते है, पिताजी ने पाँच कमरो का मकान  बनवाया था जिसमे से दो कमरे पिताजी ने किराए से दुकान चलाने हेतु गाँव के ही एक व्यक्ति को सन २००५ मे दे दिए थे जिसका किराया दादाजी ही लेते रहे है और आज तक ऐसा ही चल रहा है और बाकी बचे तीन कमरो मे माँ, मैं और मेरा भाई रहते है| पिताजी के देहांत (२०११) के बाद जब हमने किराए से दी हुई दुकान को खाली कराना चाहा तो दादाजी ने आपत्ति करते हुए कहा की ये मेरा मकान है और जब हम चाहेंगे तभी खाली होगा, इसी तरह से जब हमने मकान का विस्तार करना चाहा तब भी उन्होने आपत्ति करते हुए कहा की तुम लोगो का कोई हिस्सा नही है, और अपने जीते जी मै बँटवारा भी नही करूँगा, क़ानूनी रूप से बँटवारा करने के लिए जब हम सरपंच के पास खानदानी सजरा बनवाने के लिए गये तो वहाँ से भी नकारात्मक जवाब मिला, दरअसल दादाजी हम लोगो को ज़मीन – जायदाद मे से कोई हिस्सा ही नही देना चाहते और लोगो के बहकावे मे आकर दादाजी संपत्ति को बिक्री करने की तथा मेरे सौतेले भाई के नाम करने की योजना बना रहे है अगर ऐसा हुआ तो हम लोग सड़्क पर आ जाएँगे, कृपया सलाह दें कि –
 (१) संपत्ति का बँटवारा कैसे होगा|
 (२) क्या हमारे दादाजी की संपत्ति मे उनके दोनो भाइयो का भी हिस्सा है|
 (३) हम किरायेदार से किराए की दुकान को कैसे खाली करवा सकते है |

– प्रदीप कुमार ज़ायसवाल, गाँव – सिहावल, पोस्ट- सिहावल, तहसील – सिहावल, थाना – अमिलिया, जिला- सीधी (मध्य प्रदेश)

समाधान-

प के दादाजी और उन के भाइयों के बीच बँटवारा कानूनी तौर पर नहीं हुआ था। बल्कि उन्होंने परिवार के अंदर एक अन्दरूनी व्यवस्था बना रखी थी। उस के अंतर्गत कुछ लगो कहीं काम करते थे और कहीं रहते थे। बँटवारा आज तक नहीं हुआ आप को बँटवारा कराने के लिए बँटवारे का दीवानी/ राजस्व वाद संस्थित करना होगा।  चूंकि दादाजी व उन के भाइयों के बीच बंटवारा नहीं हुआ था इस कारण संपूर्ण संपत्ति जो तीनों भाइयों की संयुक्त रूप से थी उस का बंटवारा इस बंटवारे में होगा। इस में आप के दादा जी के अतिरिक्त शेष दो दादाजी को जो संपत्ति अलग कर के दी गयी थी उस का भी बंटवारा होगा। यह वाद संस्थित करने के साथ ही संपत्ति का कोई भी हिस्सेदार किसी संपत्ति को बेच कर खुर्दबुर्द न करे इस के लिए अदालत से स्टे प्राप्त किया जा सकता है।

आप के  दादाजी की अलग से कोई संपत्ति नहीं है बल्कि तीनों दादाओँ की संयुक्त संपत्ति है इस कारण तीनों  भाइयों की संपत्ति में तीनों का हिस्सा है।

यदि किराएदार को आप के पिताजी ने दुकान किराए पर दी है तो उस के संबंध में आप के पिता ही लैंडलॉर्ड माने जाएँगे और वे दुकान खाली कराने के लिए दीवानी न्यायालय में दावा संस्थित कर सकते हैं।

आप को किसी स्थानीय वकील को सभी दस्तावेज दिखा कर परामर्श प्राप्त कर के तुरन्त कार्यवाहियाँ करनी चाहिए।

 

 

अपनी संपत्ति की सुरक्षा नहीं करेंगे तो उसे खो बैठेंगे।

August 12, 2018 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

मैंने अपना मकान किराए पर दुकान चलाने के लिए दिया था।  आपसी सहमति के कारण कोई एग्रीमेंट नहीं लिखा गया था।  किराएदार लगभग 8 साल से रह रहा है।  4 साल का किराया नहीं दिया है। किराया मांगने पर किराया नहीं दे रहा है।  कहने पर दुकान खाली नहीं कर रहा है।  उसके पास कोई भी कागजी तौर पर सबूत नहीं है। उल्टा फर्जी जाकर कोर्ट में मुकदमा कर दिया है कहता है मकान मैंने बनवाया है। किराएदार के पास कोई भी लिखित प्रमाण नहीं है कि मैंने यह रूम किराए पर लिया है।  जबकि मकान मालिक के नाम (बिजली ,मकान नक्शा ,खतौनी, नगर पालिका टैक्स रसीद) है।  किरायादार जो किराया देता था वह भी रसीद काट कर नहीं  देता था। किराएदार पूर्ण रूप से इन लीगल तरीके से रह रहा है। क्या इसे पुलिस की मदद से हटाया जा सकता है ?  कृपया इस समस्या का हल बताए।

-वासदेव चौधरी, गाँव – बिहरा पोस्ट – ऊँचगाव  जिला – बस्ती  उत्तर प्रदेश

समाधान-

प जिस मुसीबत में फँसे हैं वह आप की खुद की मूर्खता और काहिली का सबूत है। पहले जब मकान किराए पर दिया तब आप को कम से कम उस से यह लिखाना चाहिए था कि वह मकान किराए पर ले रहा है। किरायानामा लिखने का प्राथमिक उद्देश्य यही होता है कि किराएदार की स्वीकृति मकान मालिक के पास रहे कि वह उस मकान पर बहैसियत किराएदार ही काबिज है। यदि यह होता तो आप को परेशानी नहीं होती।

आप ने किरायानामा नहीं लिखवाया और चार साल तक किराया लेते रहे तब उसे चार साल के किराए की रसीद देनी चाहिए थी और उस की काउंटर प्रति पर किराएदार के हस्ताक्षर होने चाहिए थे जिस से आप के पास यह सबूत हो जाता कि वह किराएदार है। आप ने यह भी नहीं किया।

जब चार साल पहले किराएदार ने किराया देना बंंद कर दिया तब आप को उस पर बकाया किराया वसूली का मुकदमा करना चाहिए था। आप ने चार साल तक वह मुकदमा भी नहीं किया।

अब जब वह खुद यह कहते हुए अदालत चला गया है कि मकान उस का खुद का है आप परेशान हो रहे हैं तो गलत क्या है? जो व्यक्ति समय रहते अपने अधिकारों की सुरक्षा नहीं करता वह ऐसे ही अपने अधिकार खो देता है।

आप को सब से पहले यह करना चाहिए कि कोई ऐसा सबूत तलाशना चाहिए जिस से यह साबित कर दें कि किराएदार आप के मकान में किराएदार है। यदि ऐसा कोई सबूत मिल जाता है तो आप किराएदार द्वारा किए गए मुकदमे में अपना बचाव कर सकेंगे। इस के साथ ही आप को पिछले 3 वर्ष के बकाया किराए और डिफाल्ट व व्यक्तिगत जरूरत के आधार पर मकान खाली करने हेतु बेदखली के लिए दीवानी वाद दाखिल करना चाहिए। यह काम आप से साक्षात्कार कर के वकील कर सकता है। इस कारण बेहतर है कि आप अपने यहाँ के बेहतर से बेहतर वकील करें, जो आप को इस मुसीबत से निजात दिला दे। हम ने अपने जीवन में अनेक मामले देखे हैं जिन में मकान मालिक की काहिली के कारण लोग कब्जा कर के खुद मालिक बन बैठे हैं। इस कारण शीघ्रता कीजिए और अच्छा वकील तलाश कर बचाव के साथ साथ बेदखली की कार्यवाही भी कराइए।

न्याय के लिए जल्दी से जल्दी न्यायालय का द्वार खटखटाएँ।

September 9, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

कृष्ण ने नोएडा उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैंने 25 साल पहले 40000 रू. पगड़ी पर दुकान दी थी। अब मुझे दोबारा मकान बनाना है। दुकान खाली करने के लिए उसको 5 लाख का ऑफर दिया लेकिन वो 20 लाख मांग रहा है। 10 साल से किराया भी नहीं देता। उसने यहाँ के लोगों से 20 लाख रुपए उधार ले रखे थे। पैसे ना होने की वजह से उसकी दूकान 7 महीनो से बंद है। उसका भी कोई पता नहीं। क्या में उसकी दुकान खाली करवा सकता हूँ?

समाधान-

प बड़े सुस्त व्यक्ति हैं। आप के किराएदार ने दस साल से किराया नहीं दिया है और आप अब पूछ रहे हैं कि क्या मैं दुकान खाली करवा सकता हूँ। यदि किराया छह माह का भी बकाया हो जाए तो तुरन्त किराएदार को नोटिस दे कर वसूली के वाद के साथ दुकान खाली करने का वाद संस्थित करना चाहिए। लेकिन आप ने यह सब नहीं किया। यदि एक संपत्ति का स्वामी इतना सुस्त होगा तो उस की संपत्ति ही संकट में पड़ जाएगी। न्याय का सिद्धान्त यह है कि पीड़ित को शीघ्र से शीघ्र न्यायालय के पास फरियाद ले कर जाना चाहिए। वह जितनी देरी करेगा उतना ही न्याय उस से दूर चला जाएगा।

देरी का नतीजा यह है कि आप कभी भी तीन वर्ष से अधिक का किराया वसूल करने के लिए न्यायालय में कोई वाद संस्थित नहीं कर सकते। अब भी देरी न करें। तुरन्त दुकान खाली करने का वाद संस्थित करें। दुकान खाली कराने के आधारों में व्यक्तिगत आवश्यकता के लिए मकान का पुनर्निर्माण, किराया अदायगी में कानूनी चूक तथा छह माह से अधिक समय से दुकान का उपयोग न करने को शामिल करें।

याद रखे कि पगड़ी पर दुकान देना और दुकान खाली करने के लिए धनराशि मांगना अपराध हैं। इन्हें स्वीकार करने वाले को दंडित कराने के लिए अभिजोजन पक्ष को अधिक समस्या नहीं होती।

समस्या-

आलम ने दिल्ली से समस्या भेजी है कि-

मैं दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहता हूँ हमारा यहाँ पर अपना मकान है।  हमारे मकान मे एक किरायेदार फेमिली रहती है। हम उस किरायेदार से मकान खाली करवाना चाहते हैं। लेकिन वो किरायेदार मकान खाली नहीं करता और उल्टा उसकी पत्नी और बेटी हमें झूठे केस मे फँसाने की धमकी देती है,  कहती है कि अपने कपडे़ फाड़कर थानें जाकर बलात्कार का केस कर दूंगी। कृपया मेरी मदद कीजिये।

समाधान-

प के पास धमकी देने का कोई सबूत और गवाही होना चाहिए। यदि नहीं है तो आप कोशिश करें कि अब की बार इस तरह की कोई भी बातचीत होती है तो उसे रिकार्ड कर लिया जाए और एक दो प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी हों। तब आप पुलिस को सूचित करें। कार्यवाही न करने पर एस पी को सूचित करें। फिर भी कार्यवाही न होने पर न्यायालय में परिवाद करें।

एक बार पुलिस आप की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर ले या आप न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत कर दें उस के बाद आप मकान को आप की या परिवार की जरूरत के आधार पर खाली कराने के लिए दावा प्र्स्तुत करें। अदालत के आदेश के अतिरिक्त मकान खाली कराने का दूसरा कोई उपाय नहीं है।

 

समस्या-

देवेन्द्र कुमार ने जयपुर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

व्यवसायिक दुकान को तीन वर्षीय एग्रीमेंट रजिस्टर्ड करवा कर देने के क्या लाभ हैं? या 100 रुपए के स्टाम्प पर 11 माह के किराए का एग्रीमेंट नोटेरी से अटेस्ट करा कर देना सही है? समय आने पर दोनों में से किस एग्रीमेंट में दुकान खाली कराना आसान रहेगा?

समाधान-

प राजस्थान से हैं, और राजस्थान में किराया नियंत्रण अधिनियम 2001 अन्य सब राज्यों के किराएदारी कानून से भिन्न है। जिला मुख्यालय वाले नगरों में प्रभावी है। इन नगरों में किराएदारी इस कानून के अनुसार ही हो सकती है। इस अधिनियम के अनुसार निश्चित अवधि  के लिए कोई भी परिसर 5 वर्ष से कम की निर्धारित अवधि के लिए दिया जाता है तो भी उस अवधि की समाप्ति पर परिसर इस आधार पर खाली नहीं कराया जा सकता।  केवल 5 वर्ष से अधिक की निश्चित अवधि के लिए ही परिसर कांट्रेक्ट पर दिया जा सकता है तब अवधि की समाप्ति पर भूस्वामी किराएदार से परिसर खाली कर सकता है।  इस तरह तीन वर्षीय किसी भी रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के माध्यम से किराये पर परिसर देने से कोई लाभ नहीं होगा।

इस कारण 11 माह या उस से कम का एग्रीमेंट किया जा सकता है। दुकान तो दोनों ही मामलों में कानून के मुताबिक ही हो सकेगी। एग्रीमेंट से किसी प्रकार का अतिरिक्त या कानून से भिन्न अधिकार भूस्वामी को नहीं मिलता।

बिना रसीद के किराया अदा करना पैसे को पानी में फैंकना है।

June 13, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

विकास सिंह ने आजादपुर, दिल्ली से समस्या भेजी है कि-

म 3० दुकादार पिछले 9 सालों से एक कॉम्पलेक्स में शॉप चला रहे हैं। जिसका किराया 5000 है और एग्रीमेंट 36 महीने का (बिना रजिस्टर्ड वाला) होता था। किराया हर एग्रीमेंट के ख़त्म होने के बाद 10% बढ़ता था। हमारा वो एग्रीमेंट ख़तम हो गया, लेकिन नया नहीं बना रहा। मकान मालिक सबको बहुत परेशान करता था और अब हम सबको दुकाने खाली करने की धमकी दे रहा है। किराया लेना भी बंद कर दिया। उसने किसी को भी पिछले 3 सालो में किराये की रसीद नहीं दी, न कभी चेक से किराया लिया। हमेशा बहाने बनाता था। अब हम क्या करें। क्या कोर्ट में किराया जमा करवायें? या उसके नोटिस का इंतज़ार करे। क्या वो हम सबसे दुकानें खली करवा सकते हैं।

समाधान-

प लोगों की सब से बड़ी गलती है कि आप ने मकान मालिक को बिना रसीद के किराया दिया है। बिना रसीद के दिया हुआ किराया भुगतान किया हुआ नहीं माना जा सकता। बिना रसीद के किराया अदा करना पैसे को पानी में फैंकना है। मकान मालिक 3 साल से अधिक के किराए की मांग नहीं कर सकता।  लेकिन वह 3 साल का किराया बकाया बता कर किराया अदायगी में कानूनी चूक के आधार पर दुकान खाली कराने का दावा कर सकता है। इस तरह आप को 3 साल का किराया जो आप दे चुके हैं वह दुबारा देना पड़ सकता है।

हमारी राय यह है कि आप सभी दुकानदार न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर चालू किराया यह कह कर अदालत में जमा करवा दें कि दुकानदार किराया ले कर रसीद नहीं देता। पहले हम उस के विश्वास पर थे पर अब जब उस से रसीद मांगी तो उस ने मना कर दिया इस कारण बकाया किराया जमा करवा रहे हैं।

हो सकता है मकान मालिक नोटिस दे कर पिछला किराया बकाया बताए। बाद में दुकान खाली करने का दावा करे। उस स्थिति में न्यायालय दावे में बकाया किराए का निर्धारण करे। तब यदि न्यायालय आदेश देता है तो आप को पिछले तीन वर्ष के किराए में से उतना किराया दुबारा देना पड़ेगा जितना न्यायालय निर्धारित करती है। यदि कोर्ट द्वारा निर्धारित किराया  आदेश से एक माह में जमा नहीं करवाएंगे तो दुकान किराया अदायगी में चूक के आधार पर खाली करने का निर्णय हो सकता है।

समस्या-

राहुल मेहरा ने गाजियाबाद, उत्तर प्रदेस से समस्या भेजी है कि-

मने लगभग 1 साल पहले ग़ाज़ियाबाद उत्तर प्रदेश में अपना घर किराये पर दिया। कुछ महीनो के पश्चात वहां रहने वाले पड़ोसियों ने शिकायत की कि हमारे किरायेदार घर में अवैध शराब का कारोबार करता है। हमने किरायेदार को मकान खाली करने को बोला तो वह खाली नहीं कर रहा है। अब न तो वह मकान खाली कर रहा और पिछले 4 महीनो से न तो वह किराया दे रहा न बिजली का बिल जमा कर रहा। क्या उपाय संभव है कृपया सहायता कीजिये।

समाधान-

दि किरायेदार बिजली का बिल नहीं जमा कर रहा है तो सब से पहले बिजली कंपनी को आवेदन प्रस्तुत कर बिजली का कनेक्शन कटवा दें।

यदि यह शिकायत सच है कि किराएदार शराब के अवैध कारोबार में लिप्त है तो सीधे पुलिस और प्रशासन के उच्चाधिकारियों को शिकायत करें। क्यों कि इस तरह के कारोबारियों की स्थानीय पुलिस से सैटिंग होती है और कोई कार्यवाही नहीं होती। पुलिस को की गयी शिकायत की प्रति अवश्य रखें।

किसी वकील से मिल कर किराएदार को बकाया किराया जमा कराने, मकान खाली कराने का नोटिस दिलवाएँ। वकील को कहें कि मकान खाली कराने के जितने आधार हो सकते हैं उन मे से जितने आधार काम में लिए जा सकते हैं उन का नोटिस में उल्लेख करें। नोटिस की अवधि समाप्त हो जाने पर तुरन्त मकान खाली कराने तथा बकाया किराया प्राप्त करने का दावा न्यायालय में प्रस्तत करें।

किराएदार को परिसर खरीदने का कोई अधिकार उत्पन्न नहीं होता।

May 31, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

राधेश्याम सिंह ने सीरमपुर, पश्चिम बंगाल से समस्या भेजी है कि-

मेरे पिताजी करीब 50 साल से किराएदार हैं, घर के मालिक का निधन के बाद किराया नियंत्रण न्यायालय में जमा कराते हैं। अब हम लोगों का प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नम्बर आया है। हम ये घर खरीदना चाहते हैं लेकिन दिवंगत मकान मालिक के छह बेटों में से कोई राजी नहीं हो रहा है। कृपया बताएँ कि क्या कानूनी तरीके से हम इस घर को खऱीद सकते हैं कि नहीं?

समाधान-

संपत्ति का अधिकार एक मूल अधिकार है। इसे बाधित किया जाना संभव नहीं है। यदि कोई मकान मालिक अपना मकान बेचना नहीं चाहता है तो उसे बाध्य नहीं किया जा सकता है।  मैं यहाँ अनेक बार लिख चुका हूँ कि किराएदार हमेशा किराएदार ही रहेगा चाहे वह पूरे सौ साल तक किराये पर उस संपत्ति में रह ले। उसे किराए वाले मकान का मालिक बनने का कोई अधिकार नहीं है। एक लंबे समय तक किसी परिसर में किराए से रह लेने से कोई अधिकार उत्पन्न नहीं होता है।

इस तरह जब तक स्वयं मकान मालिक ही अपना मकान बेचने को तैयार न हो तो किराएदार को यह अधिकार भी नहीं कि वे किसी भी प्रकार से मकान मालिक पर घर बेचने के लिए कोई दबाव  बना सकें। इस तरह का कोई कानून नहीं है। हमारी राय है कि आप को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत घर खरीदने की सुविधा मिल रही  है तो उस का उपयोग कर कैसा भी घऱ जो कहीं भी हो खऱीद लें और इस मकान में जिस में आप लोग रह रहे हैं उस के मोह में न पड़ें।

किराएदार की बेदखली के लिए मुकदमा करने में विलम्ब न करें।

May 30, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

सत्येन्द्र कुमार ने लखनऊ, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरा मकान जो मिट्टी के गारे से बना हुआ पुराना मकान है, बरसात में सीलन दीवारों पर उपर तक पहुँच जाती है।  बाहर से अच्च्छा दिखाई देता है। मेरे मकान में दुकानदार दुकान किराए पर चलाते हैं। दीवारे गारे से बनी होने के कारण दो मंज़िल बनवाया नहीं जा सकता। मेरी दो संतानें हैं मैं मकान तोड़कर दो भागो में बनवाना चाहता हूँ। किरायेदार खाली नहीं करना चाह रहे हैं।  मैं बहुत परेशान हूँ, मुझे अच्छी सलाह दें जिससे मैं इस समस्या से झुटकारा पा सकूँ।

समाधान-

कुल मिला कर आप की समस्या ये है कि वर्तमान मकान का विस्तार बिना मकान गिराए संभव नहीं है। चूंकि आप का परिवार बढ़ गया है इस कारण आप दोनों बच्चों और परिवार के निवास की जरूरत के लिए मकान गिरा कर मकान बनाना चाहते हैं। यह आप की सद्भाविक एवं युक्तियुक्त आवश्यकता है। आप इस आधार पर मकान किराएदार से खाली करवा सकते हैं।

आप को तुरन्त बिना किसी देरी के मकान खाली कराने का मुकदमा किराएदार के विरुद्ध कर देना चाहिए। तुरन्त तो नहीं लेकिन मकान खाली कराने की डिक्री आप के पक्ष में हो जाएगी। इस के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। इस कारण जितनी देर आप मुकदमा करने में करेंगे उतनी ही देरी से आप अपनी योजना को मूर्तरूप दे पाएंगे।

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