Marriage Archive

समस्या-

मोहित ने सहारनपुर उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी उम्र २७ वर्ष है।. मेरा एक बड़ा भाई है जो मुझसे १ या दो साल बड़ा होगा, उसकी शादी हो चुकी है। वो पिताजी के साथ रहता है ओर मैं माता जी के साथ। मेरी माता जी मेरे जन्म के वर्ष से ही ससुराल पक्ष द्वारा मारपीट किए जाने के कारण अपने मायके आ गई थी। सुलह की तमाम कोशिशों के बाद पिता जी पर मारपीट ओर भरण-पोषण का मुक़दमा दर्ज किया गया। आज २७ साल बाद भी वो मुक़दमा चल रहा है। वो थोड़ा बहुत खर्च देते है कोर्ट के द्वारा। पर इसी बीच उन्होने (वर्ष २००० के लगभग) दूसरी शादी कर ली और दूसरी पत्नी से उनको एक पुत्र, एक पुत्री है। दूसरी पत्नी, दोनो बच्चे और मेरा बड़ा भाई पिताजी के साथ ही हरियाणा के गाँव में रहते हैं जहा पिता जी का बाकी परिवार भी रहता है। ज़मीन जयदाद के नाम पर कुछ नहीं हैं केवल मकान हैं (मेरे संज्ञान मे) जिसपर मैं दावा कर सकूँ। मैंने अपना घर सहारनपुर में बना लिया है जो की मेरी मम्मी के नाम है। मैं उनपर कार्यवाही चाहता हूँ कि उन्होंने अपनी पत्नी और पुत्र के लिए कुछ नहीं किया और बिना तलाक़ लिए दूसरी शादी कर ली है। इसके लिए मुझे क्या करना होगा और क्या सबूत पेश करने होंगे।

समाधान-

प ने जिस तरह तथ्य सामने रखे हैं उस से पता लगता है कि आप अपने पिता पर कोई मुकदमा करते हैं तो भी आप को कुछ हासिल नहीं होगा। लगता है आप के मन में पिता से बदला लेने की भावना है, यह होना स्वाभाविक भी है। आखिर आप का भी हक था पिता पर। पर किसी भी तरह से बदले की भावना तो उचित नहीं है।

पहला अपराध आप के पिता ने आप की माताजी के प्रति किया था। माताजी उन के विरुद्ध दूसरी शादी के लिए पुलिस में जा सकती थीं और उन्हें सजा हो सकती थी। पर या तो माताजी ने ऐसा करना ठीक नहीं समझा या फिर पुलिस ही यह साबित करने में असमर्थ रही कि आप के पिताजी की दूसरी शादी शादी न हो कर केवल लव इन रिलेशन है। और कोई अपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती।

संपत्ति के नाम पर आप के पिता के पास मकान हैं। हो सकता है वे संयुक्त संपत्ति हों। यह भी हो सकता है कि आप की माताजी के भय से उन संपत्तियों में से पिता ने अपना अधिकार अलग कर लिया हो जिस से आप की माताजी या आप हक न जता सकें।

आप ने अपनी और अपनी माँ के लिए एक अलग दुनिया बना ली है। वह बेहतर है। पिता से बदले के चक्कर में न पड़ें। इस से आप अपने लिए बेवजह परेशानियाँ मोल लेंगे, मिलेगा कुछ नहीं। एक सलाह बिना मांगे दे रहे हैं कि आप ने अपना पैसा लगा कर सहारनपुर में जो मकान बनाया है वह माताजी के नाम से है। उसे अपने नाम हस्तांतरित करवा लें या फिर उस की पंजीकृत वसीयत अपने नाम करवा लें। आप की माताजी अभी भी आप के पिता की पत्नी हैं जिस के कारण पिता उन के उत्तराधिकारी हो सकते हैं। आप का बड़ा भाई तो उत्तराधिकारी है ही। ऐसी कोई व्यवस्था न होने पर माताजी के देहान्त के बाद आप का बड़ा भाई और पिता दोनों इस मकान में आप से हिस्सा मांग सकते हैं। इसे गंभीरता से लें।

हिन्दू विवाह में झगड़े तलाक का कारण नहीं हो सकते।

July 4, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

रविकान्त ने अलीगढ़, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मै एक केन्द्रीय कमर्चारी हू और मेरी पत्नी एक राज्य कमर्चारी है। हमारी शादी को ८ साल हो गया है और हमारे २ लड़के पहला ५ साल दूसरा ३ साल भी है। आपसी झगड़े की बजह से साथ रहना मुश्किल हो गया है।  *क्या तलाक हो सकता है, मुझे क्या हर्जाना देना होगा?  बच्चे किसके पास रहेंगे? *मेरी पत्नी मुझ पर क्या-क्या इल्जाम लगा सकती है?

समाधान-

पसी झगड़े के कारण साथ रहना मुश्किल हो गया है, तो यह दुतरफा समस्या है यह आपसी बातचीत, समझदारी और सहमति से सुलझने वाला मामला है। यदि आप दोनों द्विपक्षीय रूप से बात न कर सकते हों तो कम से कम किसी एक मित्र या संबंधी जिस पर दोनों विश्वास कर सकें उसे बीच में डाल कर आपसी समस्याएँ हल करें। किसी काउन्सलर की मदद भी ली जा सकती है। यदि समस्या हल न हो और अन्तिम विकल्प विवाह विच्छेद ही हो तो दोनों सारी शर्तें कि कितना हर्जाना देना होगा, बच्चे किस के पास रहेंगे और कौन किस को कितना खर्चा देगा आदि आदि आपस में तय कर के सहमति से विवाह विच्छेद का आवेदन लगाएँ और सात-आठ माह में इस आवेदन पर विवाह  विच्छेद हो सकता है।

हिन्दू विवाह अधिनियम में विवाह विच्छेद इतना आसान नहीं है कि आप पत्नी के लिए किसी हर्जाने, पर सहमत हो जाएँ तो हो जाए। वह कानून में वर्णित आधारों पर ही आवेदन कर्ता को प्राप्त हो सकता है। वह भी अपने आधार को प्रमाणित कर देने पर। आप ने अपनी समस्या में ऐसे कोई तथ्य नहीं रखे हैं जिस से कोई आधार विवाह विच्छेद हेतु बनता हो।

पति पत्नी के अलग होने पर बच्चों की अभिरक्षा का प्रश्न इस बात से तय होता है कि बच्चों का हित कहाँ अधिक सुरक्षित है। इस की जाँच दोनों पक्षों द्वारा न्यायालय के समक्ष रखे गए तथ्यों और सबूतों के आधार पर किया जा कर निर्णय होता है। आम तौर पर बच्चों की अभिरक्षा पत्नी को ही मिलती है और पति को उन के भरण पोषण के लिए हर माह नियमित राशि देनी होती है। यह राशियाँ इस बात से तय होती हैं कि दोनों की आमदनी कैसी है, सामाजिक और आर्थिक स्थिति कैसी है।

यदि आप वास्तव में तलाक लेने जैसे कदम उठाने जा रहे हैं तो आप को वकील से रूबरू मिल कर परामर्श करना चाहिए। उसी से आप को ठीक राह मिलेगी।

 

पत्नी से किसी तरह संपर्क साधने का प्रयत्न करें।

June 29, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

सूरज सिंह ने फ़ैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मैं ने 16 फरवरी 2017 को रजिस्ट्री ऑफीस और आर्य समाज मंदिर में बिना फॅमिली को बताए शादी की। उसी दिन वाइफ अपने घर गई और फिर आने से मना कर दिया। उस के घर वाले किसी कीमत पर नहीं चाहते कि हम साथ रहें।  वो उन की बात मान रही है। उस के घऱ वाले मुझे गाली देते हैं। मैं ने डिप्रेशन में आ कर शराब पी ली। और गालियाँ दे ली और उल्टा पुल्टा बोल दिया और शादी के फोटो उस के घर वालों की फेसबुक आईडी पर पोस्ट कर दिए। जब मुझे लगा कि उसे कहीं कुछ न हो जाए तो 100 नंबर पर फोन कर दिया और पुलिस को वहाँ भेज दिया। उस के घर वालों ने मेरा गाली  गलौच वाला फोन उसे सुना दिया। अब वो भड़क गयी। ना कोई बात करती है ना उस के घऱ वाले बात करते हैं। मैं अब क्या करूँ उस के बिना नहीं रह सकता। हमारे घरों में 700 किलोमीटर की दूरी है। और उस के घर के पास मेरा कोई नहीं। क्या वह उस रिकार्डिंग से डाइवोर्स ले सकती है? कुछ भी हो जाए पर मैं डाइवोर्स नहीं देना चाहता।

समाधान-

प बेकार घबरा रहे हैं। एक फोन काल रिकार्डिंग के आधार पर कोई तलाक नहीं हो सकता। यदि आप की शादी का पंजीकरण हो गया है तो या तो आप की पत्नी को अपना विवाह किसी तरह से अकृत कराना होगा या फिर आप से तलाक लेना होगा। दोनों काम अदालत में आवेदन किए बिना संभव नहीं हैं। उस का आप को नोटिस आएगा। आप चाहें तो प्रतीक्षा कर सकते हैं।

प्यार में मिलन ही नहीं होता, विछोह भी होता है। आप  ने प्यार किया और विवाह कर लिया। अब कुछ दिन विछोह के भी गुजारें। दो चार सप्ताह में बात पुरानी होने पर अपनी पत्नी से किसी तरह संपर्क साधने का प्रयत्न करें और हो सके तो बातचीत आरंभ करिए। उस का जो भी थोड़ा बहुत विश्वास टूटा है उसे फिर से जोड़िए। आप को लगे कि पत्नी में आप के प्रति थोड़ी भी सकारात्मकता है तो अदालत में धारा 9 का आवेदन लगाएँ, दाम्पत्य की पुनर्स्थापना के लिए।

जारता का आरोप तभी लगाएँ जब आप उसे साबित कर सकते हों।

June 27, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

श्रीमती कृष्णा नाथ ने जगदलपुर, जिला बस्तर, छत्तीसगढ़ से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी 21 जून 2010 को मध्यप्रदेश के बीनागज जिला गुना के रहने वाले प्रदीप नाथ से हुई थी और मेरी 5 साल की बेटी है। मेरे पति ने मेरा विश्वास तोड़ा है किसी और लड़की के साथ उनका रिलेशनशिप है। मुझे वो खर्चा पानी भी नहीं देते, वो कुछ काम नहीं करते हैं। अगर मैं उन पे भरण पोषण के लिए केस करूँ तो मुझे कितने पैसे मिलेंगे? मैं ये भी बता दू मैं मेरे पति से बड़ी हूँ, इससे मेरे केस में परेशानी होगी क्या? मुझे मेरी बेटी को पालने में परेशानी हो रही इसलिए मुझे कुछ मागदर्शन देने की कृपा करें।

समाधान-

प अपने पति पर जारता और उपेक्षा का आरोप लगा रही हैं। यदिआप यह आरोप अपने आवेदन में भी लगाती हैं तो आप को यह आरोप साबित करना होगा। यदि आप यह आरोप साबित नहीं कर पाती हैं तो आप के पति भविष्प में मिथ्या आरोप लगा कर बदनाम करने की क्रूरता करने का आधार बना कर आप के विरुद्ध विवाह विच्छेद का मुकदमा कर सकते हैं और जीत भी सकते हैं।

आप के पति कुछ नहीं कमाते। इस कारण यह नहीं कहा जा सकता कि आप को मुकदमा कर देने पर कितनी भरण पोषण राशि प्राप्त हो सकती है। लेकिन कानून बहुत स्पष्ट है यदि किसी व्यक्ति ने विवाह किया है और उस विवाह से किसी संतान का जन्म भी हो चुका है तो पति यह नहीं कह सकता कि उस की कमाई कुछ भी नहीं है। यदि उस ने विवाह किया है और संतान को जन्म दिया है तो उसे भरण पोषण की राशि तो देनी होगी। यह राशि आप दोनों के परिवारों के जीवन यापन के स्तर से तय होगा।

आप भघरण पोषण का मुकदमा जहाँ आप निवास कर रही हैं वहाँ के न्यायालय में धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत प्रस्तुत कर सकती हैं।

 

आप घरेलू हिंसा अधिनियम में कार्यवाही कर सकती हैं।

June 22, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

नेहा सक्सेना ने बरेली, उत्तर प्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी 14 एप्रिल 2015 में हुई है और मेरी 14 माह की एक बेटी है।  मेरे पति बरेली के अच्छे सीबीएसई पैटर्न स्कूल में टीचर हैं और मैं भी टीचिंग जॉब में ही हूँ। मेरी शादी के दूसरे माह से ही प्रॉब्लम्स स्टार्ट हो गई थी। मेरे पति मेरी मदर-इन-लॉ की हर बात मानते हैं, यहाँ तक कि हमारे पर्सनल रिलेशन्स कैसे रहेंगे ये भी वही डिसाइड करती है। शादी के पहले से ही मेरी ननद जो कि शादीशुदा है और उस के दो बच्चे हैं रोज़ सुबह मेरे घर आ जाती है और शाम को 8-9 बजे तक वापस जाती है। बेटी होने वाली थी तब भी मेरी सास ननद और पति ने मुझे बहुत टॉर्चर किया इतना कि मैं अपने मायके वापस आ गयी। लगभग 3-4 माह मैं मायके रही तब भी मेरे पति ने मुझे ले जाने की कोई कोशिश नहीं की तब मेरे पक्ष के लोगों ने पंचायत बैठा कर मुझे ससुराल भेजा। अब फिर वही परिस्थिति है और अब मेरी सास सभी से ये कह रही है कि मैं इस को किसी भी कीमत पर अपने बेटे के साथ नहीं रहने दूँगी क्यूंकि मैंने अपनी ननद के रोज़ आने पर आपत्ति  उठाई थी। मेरे पति हमेशा की तरह अपने घरवालों के साथ हैं। मैं अपनी बेटी के साथ मायके में हूँ और पति से किसी तरह का कोई सम्पर्क नहीं है। मैं अपने पति के साथ ही रहना चाहती हूँ लेकिन सास ननद और पति के टोर्चर के साथ नहीं। इसकी वजह से ही पुलिस में अभी तक कोई कंप्लेंट  नहीं की है। मैं जानना चाहती हूँ कि मुझे क्या करना चाहिए।. क्या मैं पति से क़ानूनी तौर पर पेरेंट्स से अलग होने की माँग कर सकती हूँ? क्या मैं अपने ससुराल मे ननद के रोज़ रोज़ आने पर रोक लगाने के लिए कोई कानूनी कार्यवाही कर सकती हूँ? साथ ही मेरे पति मुझे खर्च के लिए कुछ नहीं देते तो साथ रहते हुए क्या क़ानूनी तौर पर पति से अपने और बेटी के खर्च के लिए डिमांड कर सकती हूँ? मैं परेशानी में हूँ, मुझे सही रास्ता सुझाएँ। मायके से कोई भी सपोर्ट नहीं है, पिता की मृत्यु हो चुकी है बस मम्मी और छोटी बहिन है।

समाधान-

ति पत्नी का रिश्ता ऐसा है कि वह दोनों के चलाने से चलता है। कानून के हस्तक्षेप से उस में बहुत मामूली सुधार संभव है, अधिक नहीं। मामला अधिक गंभीर होने पर तलाक के सिवा कोई चारा नहीं रहता है।  पूरी कहानी में आप के पति आप के साथ खड़े कभी नहीं दिखाई देते हैं। जब कि ननद का अपना घर है और माताजी के सिवा कोई अन्य दायित्व उन पर नहीं है। लेकिन जैसी उन का स्वभाव है वे अपनी माँ और बहिन के विरुद्ध कुछ नहीं बोलेंगे और आप को अभी भी वे अपना नहीं पराये परिवार का प्राणी समझते हैं। जब तक पति स्वयं आप के साथ माँ और बहिन के सामने नहीं खड़े होते आप का ससुराल जा कर रहना मुनासिब नहीं वर्ना वही पुरानी स्थितियाँ झेलनी पड़ेगी।

आप के साथ जो व्यवहार हुआ है वह घरेलू हिंसा है और आप घरेलू हिंसा अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही कर सकती हैं। आप इस अधिनियम में अलग आवास की सुविधा की मांग कर सकती हैं, आप अपने लिए और अपनी बेटी के लिए खर्चे की मांग कर सकती हैं। हमारा सुझाव है कि पहले आप इस अधिनियम के अंतर्गत इन दोनों राहतों के लिए आवेदन करें। आप खुद कमाती हैं, हो सकता है आप की कमाई बहुत कम हो लेकिन फिर भी मितव्ययता बरतते हुए माँ और बहिन के साथ रहते हुए अपने आत्मसम्मान को बनाए रख सकती हैं। इस अधिनियम में न्यायालय अंतरिम राहत भी प्रदान कर सकता है। जिस से आप को एक राशि हर माह मिलना आरंभ हो सकती है। जब तक खुद आप के पति अपने साथ रहने को नहीं बोलें और माँ, बहिन की क्रूरता के विरुद्ध आप के साथ खड़े होने तथा खुद क्रूरता करने का वादा न करें तब तक आप को उन के साथ जा कर नहीं रहना चाहिए। जरूरी होने पर पुलिस में 498ए के अंतर्गत रिपोर्ट करायी जा सकती है। अभी इतना करें। फिर प्रतिक्रिया देखें और आगे की कार्यवाही तय करें।

आप क्रूरता के आधार पर विवाह विच्छेद के लिए आवेदन कर सकती हैं।

June 20, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

सुशीला ने पोकरण, जैसलमेर, राजस्थान से समस्या भेजी है कि-

मेरे पति का व्यवहार मेरे और मेरे पैतृक परिवार के प्रति अच्छा नहीं है। जिस के कारण अब मैं मैं मानसिक रूप से बीमार हूँ। मेरे पति मेरे इलाज के लिए कुछ नहीं करते। मैं इस से परेशान हो कर अपने मायके आ गयी हूँ। अब मेरा पति मुझे और मेरे मायके के परिजनों को फोन कर के धमकियाँ दे रहा है वह मेरे रिश्तेदारों और जाति के लोगों को मेरे बारे में गलत बातें लिख कर मैसेज कर रहा है। जिस से मैं  वापस उस के पास जा कर रहने लगूँ। लेकिन मैं वापस नहीं जाना चाहती और तलाक लेना चाहती हूँ। मुझे बताएँ मैं तलाक कैसे ले सकती हूँ।

समाधान-

प के पति का व्यवहार आप के प्रति क्रूरता पूर्ण है, बीमार पत्नी का इलाज नहीं कराना और उसे बुरा भला कहना क्रूरता है। इस कारण आप का मायके आना पूरी तरह जायज था। उस के बाद उस का धमकियाँ देना और लोगों को आप को बदनाम करने वाले फोन मैसेज भेजना क्रूरता की इन्तेहा है। आप क्रूरता के इस आधार पर तलाक के लिए अर्जी उस जिले के परिवार न्यायालय मे प्रस्तुत कर सकती हैं जिस जिले में आप के विवाह की रस्म संपन्न हुई थी अथवा जिस जिले में आप अपने पति के साथ अन्तिम बार निवास कर रही थी।

इस के अतिरिक्त आप अपने स्त्री-धन की मांग अपने पति से कर सकती हैं नहीं देने पर यह धारा 406 आईपीसी का अपराध होगा। क्रूरता कर के और आप का इलाज न करा के वह धारा 498ए आईपीसी का अपराध कर ही चुका है। आप इन दोनों धाराओँ के अन्तर्गत पुलिस में रिपोर्ट कराएँ, यदि पुलिस कार्यवाही न करे तो एसपी को शिकायत करें और फिर भी कार्यवाही न होने पर मजिस्ट्रेट के न्यायालय में इस संबंध में परिवाद प्रस्तुत करें। इस के अलावा आप अपने लिए भऱण पोषण का खर्चा प्राप्त करने के लिए धारा 125 दं.प्र.संहिता और महिलओँ के प्रति घरेलू हिंसा का प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही कर सकती हैं।

परित्याग व अन्य आधारों पर विवाह विच्छेद के लिए आवेदन करें।

June 19, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

मनोज ने भोपाल, मध्यप्रदेश से समस्या भेजी है कि-

मेरे मित्र का विवाह 30 अप्रेल 2005 को चित्तौड़गढ़ राजस्थान में हुआ था। मित्र मध्य प्रदेश का है, बारात राजस्थान गई थी। उसकी पत्नी 2006 में बिना कारण उसे छोड़ के अपने मायके चली गई। मेरे मित्र ने वहाँ जाकर उसे समझाने का बहुत प्रयास किया, पर वह अपनी ज़िद्द पर अड़ी रही। उसकी ज़िद्द थी कि वह घर दामाद बनकर रहे। पर मेरा मित्र ये बात नही माना, क्योंकि वह सेना में सेवारत है और उसके भी मां, बाप, बहन है जिसकी जिम्मेदारी उस पर है। इसी बीच 2007 में मेरे मित्र का एक बेबी हो गया अब बच्चा होने के बाद मेरे मित्र के सास, ससुर, साला बच्चे से मिलने नहीँ देते थे। पर उसने बार बार मिलने का प्रयास किया पर उसे  मिलने नही दिया जाता, जब वह छुट्टियां खत्म होने के बाद वह सेना में बापिस आ जाता। इसी बीच उसकी पत्नी ने 2010 में भाग कर रायपुर छत्तीसगढ़ में एक युवक से विवाह कर लिया। पर मेरे मित्र को मालूम नहीं चला। जब वह 6 माह में छुट्टी ले के जाता तो उसे ये कहा कर लौटा देते कि वह नही मिलना चाहती और वह जॉब करने लगी है। ये सिलसिला चलता रहा जब मित्र ने वहाँ के थाने में रिपोर्ट दर्ज करने गया तो वहाँ के एसएचओ ने रिपोर्ट दर्ज नही की। वह बोला वह जॉब करती है उसे परेशान मत करो नहीं उसकी कंप्लेन में बंद हो जाओगे और कोई छुड़ाने नहीं आएगा, और army की नौकरी चली जायेगी। वह वापिस गया अभी मई 2017 में उसे मालूम पड़ा कि उसने दूसरा विवाह कर लिया है। रायपुर में किसी अजय नाम के व्यक्ति से और मित्र के बच्चे के बर्थ सर्टिफिकेट में दूसरे पति अजय का नाम डलवा दिया है। मित्र का लड़का 5वीं में पढ़ता है और उन दोनो का रायपुर में वोटर आई डी बना हुआ है जो कि वोटर लिस्ट में है, और उन दोनों के कुछ फोटो मिले है गले मे हाथ डाले हुए और मांग में सिन्दूर है। उधर पुछा गया तो मालूम पड़ा कि उन दोनों ने प्रेम विवाह किया है। आप बताइए कि मेरा मित्र क्या करे? जिससे उसकी समस्या हल होजाये उन दोनों को सबक सिखाया जाए उसे सजा मिल सके साथ मे मित्र का बच्चा भी मिल जाये मित्र की पत्नी के दूसरी शादी का बस फ़ोटो और वोटर लिस्ट का सबूत है इन के आधार पर क्या कार्यवाही करें?

समाधान-

प के मित्र की पत्नी को छोड़ कर गए हुए 11 वर्ष हो चुके हैं और आप के मित्र ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की है। 11 वर्ष से आप के मित्र की पत्नी अलग रहती है और उस ने घर भी बसा लिया है। आप का मित्र चाहता तो अभी तक परित्याग के आधार पर तलाक ले सकता था।  देरी से न्यायालय तक जाने पर राहत मिलना कठिन होता है। अब भी आप के मित्र को सभी संभव आधारों पर तलाक के लिए आवेदन करना चाहिए।

आप का मित्र फौज में है, केवल अवकाश में घर आता है। एक लंबे समय तक उस की पत्नी को अकेले उस के ससुराल में रहना होता था। जब पत्नी को अकेले ही रहना होता था तो वह आप के मित्र के परिवार के साथ क्यों रहती? अपने मायके में क्यों नहीं। यही दोनों के बीच विवाद है।

मित्र की पत्नी सैटल हो चुकी है। बच्चा अब तक उस के साथ रहा है, वह अपने पिता को नहीं जानता या पिता के रूप में किसी दूसरे व्यक्ति को जानता है। ऐसी स्थिति में बच्चे की कस्टडी मिलना कठिन है जब कि आप का मित्र खुद फौज में रहता है।

आप के मित्र को पत्नी के विरुद्ध तलाक की और बच्चे की कस्टडी का मुकदमा करना चाहिए। इन मुकदमों के दौरान अदालत दोनों के बीच राजीनामा कराने की कोशिश करेगी। दोनों का साथ रहना तो मुमकिन नहीं फिर भी जो भी आपसी रजामंदी से हो सके वह करना चाहिए। कम से कम तलाक ले लेना चाहिए जिस से आप का मित्र दूसरा विवाह कर सके। पत्नी को सबक सिखाने की बात मन से निकाल दें। कानूनी स्थिति जो भी है वह ऐसी है कि सबक सिखाने के चक्कर में आप के मित्र ही कहीं चकरी न हो जाएँ।

 

जो भी करें पत्नी को विश्वास में ले कर करें।

June 1, 2017 को दिनेशराय द्विवेदी द्वारा लिखित

समस्या-

मनीश ने मरु मंदिर, सीकर, राजस्थान  से समस्या भेजी है कि-

मेरी शादी जनवरी 2015 में हुई और मुझे एक 9 महीने की बच्ची भी है। मेरी पत्नी मार्च से अपने पीहर में है। उस का ओर मेरा रिश्ता अच्छा नहीं चल रहा है। उससे मेरी बात होती है, वो मेरे परिवार से खुश नहीं है वो कहती है कि मेरी माँ और बहन उसके घर वालों के नाम से उसे गालियां देते हैं और उनकी वजह से वह परेशान है। उसके पिताजी मुझे धमकियाँ दे रहे हैं कि वो मेरे परिवार सहित मुझे जेल में डलवा देंगे। लेकिन चार महीने बाद क्योकि उनके लड़के की शादी होने के बाद अब उसके मामाजी का कॉल आया है कि उसे जाकर ले आऊँ। तो में किसी भी कानूनी समस्या में तो न फंस जाऊंगा? कहीं उसे लेकर आने के बाद ओर कोई समस्या हो जाये और परिवार किसी मुसीबत न फंस जाए कोई तरीका बताएँ कि अब उसे लेकर आना चाहिये या नहीं। अगर लेकर आऊँ तो फिर वो क्या कर सकते हैं मेरे ओर परिवार के साथ किस तरीके से मैं बच सकता हूँ?

समाधान-

प की पत्नी की शिकायत की ओर आप को ध्यान देना चाहिए। यदि किसी स्त्री को उस के माता पिता को गालियाँ देते हुए अक्सर सास ननद प्रताड़ित करें तो यह तो कोई भी स्त्री सहन नहीं कर सकती। यदि आप की पत्नी की बात सही है जिस का पता आप सहज ही लगा सकते हैं तो आप को अपने परिवार में अपनी पत्नी की तरफदारी करते हुए बात करनी चाहिए कि ऐसा गलत व्यवहार आप अपनी पत्नी के साथ सहन नहीं करेंगे। यह अच्छी बात है कि पत्नी के साथ आप की बातचीत है। इस का अर्थ यह भी है कि वह सच बोल रही है। आप को अपनी पत्नी को आश्वस्त करना चाहिए कि उस के साथ ऐसा व्यवहार अब नहीं होगा। यदि होता है तो हम अलग रहेंगे।

आप को चाहिए कि आप पत्नी से बात करें। उस के आश्वस्त होने पर ही उसे ले कर आएँ। यदि आप अपनी पत्नी में विश्वास पैदा कर पाते हैं और प्रताड़ना के विरुद्ध उस का साथ देते हैं तो पत्नी भी आप के साथ खड़ी हो जाएगी। यदि पत्नी आप के विरुद्ध कुछ नहीं करती है तो उस के परिजन भी आपके विरुद्ध कुछ नहीं कर पाएंगे। इस कारण सब से पहले आप स्वयं अपने और अपनी पत्नी के बीच आपसी विश्वास अर्जित करें। इस के लिए आप को कई बार आप की ससुराल जाना पड़े तो भी जाइए।

समस्या-

रवि ने दिल्ली से समस्या भेजी है कि-


मेरा भाई और उसकी पत्नी शादी के 3 महीने बाद से ही घर से अलग रह रहे हैं। उनका आपस मे कोई विवाद हुआ और फिर 498/ 406 125 498और 406 में अभी कोर्ट में नहीं लगा है, एफआर्ईआर  हुए 2 साल हो गए हैं।  गुजारा भत्ता का केस कोर्ट में है जिस में 2500 प्रति माह खर्च देना होगा और पिछले 32000 भी। भाई हिप जुआइन्ट की बीमारी के कारण कुछ काम नहीं कर पाता, उसका खर्च भी दोस्त मिल कर उठाते हैं।  गुज़ारा भत्ता न देने पर कोर्ट ने 30 दिन का समय दिया है, नहीं तो कुर्की की कार्यवाही की जाएगी। भाई के पास कोई सम्पत्ति नहीं है। वह किराये के मकान में रहता है।  क्या कुर्की में माता पिता या भाई की सम्पत्ति को भी जप्त किया जा सकता है क्या?


समाधान-

त्नी का भरण पोषण करने की जिम्मेदारी पति की है न कि पति के रिश्तेदारों की। यह जिम्मेदारी भी पति की वर्तमान आय और संपत्ति पर  निर्भर करती है। यदि इन सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने आदेश नहीं दिया है तो उस आदेश के विरुद्ध अपील या रिविजन करना चाहिए और वसूली पर स्थगन प्राप्त करना चाहिए। यह तभी संभव हो सकता है जब संपत्ति और वर्तमान आय तथा शारीरिक स्थिति के संबंध में दस्तावेजी सबूत अपील या रिविजन कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए जाएँ।

जहाँ तक वसूली के लिए संपत्ति को कुर्क करने का प्रश्न है तो केवल पति की या उस की साझेदारी वाली किसी संपत्ति को ही कुर्क किया जा सकता है, अन्य किसी संपत्ति को नहीं। यदि किसी गलत फहमी के अंतर्गत किसी अन्य संपत्ति को कुर्क किया भी जाए तो उस संपत्ति का स्वामी संबंधित न्यायालय में अपनी आपत्तियाँ प्रस्तुत कर सकता है।

 

 

समस्या-

मितेश पालीवाल ने नाथद्वारा, जिला राजसमन्द , राजस्थान से समस्या भेजी है कि-


मेरी शादी 5 साल पूर्व हिन्दू रीती से हुई थी। हम दोनों ने शादी से पूर्व b.ed. की थी। मेरे एक लड़का भी है जिसे मेरी पत्नी मुझे देना नहीं चाहती क्योंकि मेरी पत्नी मुझसे सिर्फ सरकारी नौकरी पाने के इरादे से मुझसे तलाक चाहती है। मेरे द्वारा मना करने पर उसने मेरे व मेरे परिवार पर दहेज़, महिला उत्पीडन, मेन्टेनेंस आदि केस कर दिए हैं कोर्ट ने 4000 की डिग्री भी कर दी है। मेरी पत्नी ने RPSC सेकण्ड ग्रैड में ऑनलाइन आवेदन भी कर दिया है। जिसमें उसने अपने आप को तलाकशुदा बताया है।  उसका कहना है कि जब तक rpsc का exam होगा तब तक तो वो मुझ से तलाक भी ले लेगी,  मेने उस तलाक के फॉर्म को ऑनलाइन निकाल कर कोर्ट में पेश कर दिया है कोर्ट ने भी उसे गलत माना। साथ ही उसे आगे से एसा नहीं करने की नसीहत दी। श्रीमान मेरी पत्नी व सास-ससुर लालची प्रवृत्ति के हैं,  ये सब मुझसे पैसों की डिमांड करते रहते हैं।   मेरा सवाल है की मेरी पत्नी ने तलाक नहीं होने के बावजूद rpsc में तलाकशुदा का आवेदन किया है क्या यह गैरक़ानूनी है। अगर है तो किस धारा के अंतर्गत साथ ही और कोई उपाय हो तो अवगत करावे। मैं अपनी बात को मिडिया में भी बताना चाहता हूँ।

समाधान-

प की पत्नी नौकरी करना चाहती है और आत्मनिर्भर बनना चाहती है, यह एक अच्छी बात है। पर उस ने नौकरी पाने के लिए जो कदम उठाया है खुद को तलाकशुदा बता कर, वह गलत है और इस तरह वह नौकरी प्राप्त करती है तो वह धारा 420 आईपीसी का अपराध होगा। इस से प्राप्त की हुई नौकरी भी जा सकती है और उस पर अपराधिक मुकदमा चलाया जा कर उसे कारावास के दंड से दंडित भी किया जा सकता है।

मुझे नहीं लगता कि आप की पत्नी ने आप का घर छोड़ा है वह केवल इस कारण छोड़ा है कि वह तलाक की डिक्री प्राप्त कर नौकरी कर सके। लगता है यह योजना बाद में दिमाग में आई हो। आप के बीच विवाद का कारण कुछ और है जो आप यहां बताना नहीं चाहते। मीडिया में इस तथ्य को उजागर करना आप के लिए ठीक नहीं होगा। आप उस के पति हैं और यह पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण होगा। मेरे  विचार से आप को अपनी पत्नी को ऐसा गलत कदम उठाने से रोकना चाहिए। जब तक वाकई तलाक नहीं  हो जाता है तब तक आप की ओर से कोई कदम ऐसा नहीं उठाया जाना चाहिए जो पत्नी के प्रति दुर्भावना को व्यक्त करता हो।

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