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किसी पितृपक्षी संबंधी के जीवित न होने पर मातृपक्षी संबंधी उत्तराधिकार प्राप्त कर सकते हैं।

समस्या-

शशि प्रकाश ने ग्राम हिरापट्टी, जिला आजमगढ़, उत्तर प्रदेस से पूछा है-

मेरे दादाजी ने जब मेरी दादी से विवाह किया था तो दादी का एक पुत्र सुभाष पहले से ही था और उन के पास 1 बीघा जमीन पहले से थी जो उनके जैविक पिता की मृत्यु के उपरान्त उनके पुत्र के नाम पर हो गयी। दादा और दादी के 3 पुत्र व एक पुत्री हुई। वर्तमान में सुभाष की मृत्यु हो चुकी है वे मृत्यु पर्यन्त अविवाहित थे। क्या सुभाष की भूमि के वारिस उन के भाई हो सकते हैं?

समाधान-

आप हिन्दू हैं और हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार ही सुभाष का दाय निश्चित होगा। हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा-8 में हिन्दू पुरुष के उत्तराधिकार के बारे में उपबंध दिये गए हैं जिस की उपधारा (1) के अनुसार एक अनुसूची बनाई गयी है जिस के दो स्तर हैं। इन दोनो स्तरों में कोई कोग्नेट / मातृपक्षी (माता के रिश्ते से संबंधी) सम्मिलित नहीं है।

यदि इस अनुसूची में कोई भी उत्तराधिकारी न जीवित न हो तो उपधारा (3) के अनुसार निकटतम जीवित एग्नेट/ पितृपक्षी (पिता के रिश्ते से संबंधी) उत्तराधिकारी होगा; तथा किसी एग्नेट के भी जीवित न होने पर कोई कोग्नेट / मातृपक्षी ( माता के रिश्ते से संबंधी) उत्तराधिकारी होगा।
इस तरह यदि सुभाष के जैविक पिता के रिश्ते का कोई भी उत्तराधिकारी उपलब्ध न हो तो ही सुभाष के एग्नेट्स उस का दाय प्राप्त कर सकते हैं। अन्यथा नहीं।

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