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सहदायिक संपत्ति में हिस्सा बेचा जा सकता है।

समस्या-

सरिता देवी ने सिकंदरा , जिला – जमुई, बिहार से पूछा है-

 

हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत क्या पैतृक कृषि भूमि बाहरी व्यक्ति को नहीं बेचा जा सकता है? क्या बाहरी का मतलब अपना दामाद भी हो सकता है । भाई की शादी नहीं हुई है और भाई की मृत्यु हो चुकी है तो क्या भाई के हिस्से की जमीन में सिर्फ मेरा अधिकार होगा कि मेरे पुत्र और पुत्रीयों का?

समाधान-

हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम में ऐसा कोई उपबंध नहीं है जो पैतृक कृषि भूमि में किसी व्यक्ति के हिस्से को बाहरी व्यक्ति को बेचने पर प्रतिबंध लगाता हो। कोई भी व्यक्ति पैतृक (सहदायिक) संपत्ति में अपने हिस्से को बेचने के लिए सदैव स्वतंत्र है। लेकिन हिस्सेदार अपना हिस्सा ही विक्रय कर सकता है। कृषि भूमि पर सभी हिस्सेदारों का सामुहिक कब्जा होने के कारण हिस्से का कब्जा क्रेताा को नहीं दे सकता। उस के लिए क्रेता को बंटवारा करवा कर अपना हिस्सा प्राप्त करना होगा। अब बाहरी व्यक्ति की अवधारणा ही नहीं है इस कारण दामाद को भी भूमि बेची जा सकती है।

अविवाहित भाई की मृत्यु हो चुकी है। यदि संपत्ति सहदायिक है तो हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम में 2005 में हुए संशोधन के बाद से आप भी उस संपत्ति की उसी तरह हिस्सेदार हैं जैसे कि आप का भाई था। उस कारण उस के हिस्से का हिस्सा आप को भी प्राप्त हो चुका है। आप जब चाहें बँटवारा करवा कर अपना हिस्सा पृथक करवा सकती हैं।
यदि संपत्ति सहदायिक है तो आप के पुत्र-पुत्रियों को भी उस संपत्ति में जन्म से ही अधिकार है। यदि संपत्ति सहदायिक नहीं है तो भाई के हिस्से में आप को हिस्सा प्राप्त होगा, और पिता-माता की मृत्यु पर (यदि वे अब जीवित नहीं हैं) आप को उन का हिस्सा मिल चुका है, आप की संतानों को आप के जीवनकाल में आप की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होगा।

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