पैतृक संपत्ति न होने पर संतानों को परिजनों की संपत्ति में कोई अधिकार नहीं

समस्या-

जौनपुर, उत्तर प्रदेश से अलका सिंह ने पूछा है-

मैंने दो साल पांच माह पहले एक पंडित लड़के से शादी की थी।  जिस से परिवार वाले सहमत नहीं थे धीरे धीरे पति के घर के लोग जहाँ हम रहते है वहाँ आने लगे हैं।  लेकिन वो मुझे घर नहीं आने देते हैं और न ही संपत्ति में हक देना चाहते।  इन परिस्थितियों में क्या वहाँ जाने का मेरा हक है? क्या संपत्ति में मेरा या मेरे बच्चों का कोई हक बनेगा?

समाधान-

Shopsप ने स्वयं अपनी इच्छा से और परिवार की इच्छा के विरुद्ध विवाह किया है तो नाराजगी तो झेलनी पड़ेगी। आप के पति के घर के लोग आप के पास आने लगे हैं यह अच्छी बात है। परिवार की इच्छा के विरुद्ध विवाह करने पर परिवार की जो नाराजगी है वह आसानी से तो खत्म होगी नहीं पर उन के आने जाने से विरल होगी और धीरे धीरे समाप्त भी होगी। इस में उन लोगों के प्रति आप का व्यवहार भी अच्छी खासी भूमिका अदा करेगा। आप का अपने पति के परिवार में जाने या साथ रहने का कोई कानूनी हक नहीं है। जब तक आप को न लगे कि नाराजगी समाप्त हो गयी है या अत्यन्त कम हो गई है वहाँ न जाएँ तो ही ठीक है। जाएँ तो भी बिना परिवार के किसी बुजुर्ग का बुलावा पाए न जाएँ।

संपत्ति के मामले में भारतीय हिन्दू परिवारों में बहुत भ्रांतियाँ हैं, विशेष रूप से पुश्तैनी/ पैतृक संपत्ति को ले कर।  1956 के पूर्व परंपरागत हिन्दू विधि में इस तरह की संपत्ति का अस्तित्व तब बनता था जब संपत्ति बनाने वाले व्यक्ति का बिना कोई वसीयत किए ही देहान्त हो जाता था। तब जिन वंशजों को संपत्ति मिलती थी उस में उन के वंशजों का भी अधिकार होता था, लेकिन बेटियों और पत्नी का अधिकार जीवनकाल तक सीमित होता था। 17 जून 1956 के पहले जो संपत्तियाँ पैतृक संपत्ति हो चुकी थी केवल वे ही अब पैतृक रह गई हैं। उन में भी एक बार विभाजन हो चुका है तो उन का भी पैतृक संपत्ति जैसा चरित्र समाप्त हो चुका है। अब संपत्तियाँ जिस की हैं जीवनकाल में उसी का उन पर स्वामित्व है। वह या तो उन के संबंध में वसीयत कर सकता है या फिर उस के देहान्त के उपरान्त वह संपत्ति हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार हस्तांतरित हो जाती है। इस कारण आप के पति को जब तक कोई संपत्ति उत्तराधिकार में प्राप्त न हो जाए उन का भी किसी संपत्ति में कोई अधिकार नहीं है। आप का या आप की संतानों का तो होने का कोई प्रश्न ही नहीं है। हाँ पत्नी का पति से व अवयस्क संतानों का अपने माता-पिता से भरण पोषण प्राप्त करने का अधिकार अवश्य है।  यदि कोई पुरानी पैतृक संपत्ति अभी आप के पति के परिवार में मौजूद है जिस में आप के पति सहदायिक हैं तो उस में आप की संतानों को जन्म से अधिकार मिल सकता है लेकिन ऐसा संभव प्रतीत नहीं होता कि आप के पति के परिवार में अब भी कोई सहदायिक/ पैतृक/ पुश्तैनी संपत्ति मौजूद हो।

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3 टिप्पणियाँ

  1. Comment by vinay singh bisht:

    बहुत ही काम की जानकारी है पर सह्दायिक/ पैत्रिक/ पुश्तैनी संपत्ति के सम्बन्ध में वहां पर हमेशा भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है जहाँ पर उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम लागू है

  2. Comment by RAJENDRA SINGH:

    बहुत काम की जानकारी है । राजेंद्र सिंह / अजमेर / राजस्थान.

  3. Comment by अजय कुमार झा:

    बहुत ही काम की जानकारी है सर ।
    अजय कुमार झा का पिछला आलेख है:–.पढेगा भारत , बढेगा भारत -ग्राम यात्रा -6My Profile

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